कार्रवाई नियोक्ता के जरिए स्थायी निवास की प्रक्रिया से जुड़ी है। मौजूदा कार्य वीजा और ग्रीन कार्ड आवेदन को एक ही व्यवस्था मानना गलत होगा।
अमेरिका ने आठ प्रौद्योगिकी कंपनियों से जुड़े स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम, यानी PERM, पर रोक की घोषणा की है। इनमें टीसीएस, इन्फोसिस, विप्रो और एचसीएलटेक जैसी भारतीय कंपनियां शामिल हैं।
अमेरिका में काम कर रहे भारतीय पेशेवरों के लिए खबर का पहला सवाल यही है: इसका असर ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया पर है या पहले से मौजूद काम करने की अनुमति पर भी?
दोनों प्रक्रियाओं में फर्क
PERM नियोक्ता के जरिए स्थायी निवास के लिए आवेदन की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण है। H-1B विशेष कौशल वाले काम के लिए अलग वीजा व्यवस्था है।
उपलब्ध विवरण के अनुसार, कार्रवाई प्रभावित कंपनियों के नए और लंबित PERM आवेदनों से जुड़ी है। इससे मौजूदा H-1B वीजा अपने आप रद्द नहीं होते। व्यक्तिगत वीजा की समयसीमा और दूसरे नियम पहले की तरह अलग जांच का विषय रहेंगे।
कंपनियां क्या कह रही हैं?
नैसकॉम ने कौशल आधारित कामगारों की आवाजाही और स्थायी प्रवासन को अलग मुद्दे बताया है। उसका कहना है कि भारतीय कंपनियां अमेरिका में स्थानीय भर्ती बढ़ा रही हैं और PERM से स्थायी निवास की ओर जाने वाले कर्मचारियों की संख्या अपेक्षाकृत सीमित है।
टीसीएस ने भी अपने कार्यबल और ग्राहक सेवाओं पर सीमित असर की बात कही है। कंपनी की भर्ती योजना या कारोबारी आकलन से किसी व्यक्तिगत कर्मचारी के आवेदन की स्थिति तय नहीं होती।
कर्मचारियों के लिए अनिश्चितता
जिन कर्मचारियों की स्थायी निवास प्रक्रिया नियोक्ता पर निर्भर है, उन्हें आवेदन की स्थिति पर स्पष्ट जानकारी चाहिए होगी। रोक कितने समय रहेगी और उसे हटाने की शर्तें क्या होंगी, इसका अगला आधिकारिक विवरण महत्वपूर्ण है।
कंपनियों के कारोबार पर तत्काल कम असर का दावा और कर्मचारी की लंबी अवधि की योजना पर असर—दोनों एक साथ संभव हैं। अगला अपडेट अमेरिकी आदेश तथा कंपनीवार कर्मचारी सूचनाओं से आएगा।











