पत्रकारों की दुनिया में ये 3 शब्द बहुत मायने रखते हैं, पर अब इनका मतलब ही खत्म हो गया

पत्रकारिता की परिभाषाएं और उदाहरण अब बिल्कुल बदल गए हैं। बहुत सारे पत्रकार अब अपने को नए माहौल में ढाल नहीं पा रहे हैं, क्योंकि उन्होंने जो सीखा, वह आज बेकार हो गया है। अपनी पूरी जिंदगी उनके सामने सिद्धांतों का पीछा करने की कहानी है और वह सिद्धांत बहुत साधारण हैं। हमारी यानी पत्रकारों […]

चौथी दुनिया की इफ्तार पार्टी में मीडिया की दिग्गज हस्तियों ने की शिरकत

माह-ए-रमजान में बीती शाम चौथी दुनिया मीडिया ग्रुप की तरफ से दिल्ली के कान्स्टिटूशन क्लब में इफ्तार पार्टी का आयोजन किया गया. इस मौके पर प्रिंट, इलेक्ट्रानिक और डिजिटल मीडिया से जुड़े दिग्गज हस्तियों के साथ अन्य गणमान्य लोगों ने शिरकत की. चौथी दुनिया और लाउड टीवी परिवार की तरफ से प्रधान संपादक संतोष भारतीय […]

Exclusive: पहली बार बालकोट में हुए Indian Air force के स्ट्राइक पर सबसे बड़ा ख़ुलासा। हमले के बाद मौत से भगदड़ तक की पल-पल की कहानी

पाकिस्तान के बालाकोट में हुई Indian Air force की एयर स्ट्राइक में मारे गए आतंकियों की संख्या को लेकर घमासान मचा हुआ है. जहां पाकिस्तान लगातार दावा कर रहा है कि भारत की एयर स्ट्राइक फ्लाप रही. तो वहीं विपक्ष मोदी सरकार को घेरते हुए ऑपरेशन में मारे गए आतंकियों से जुड़े सबूत मांग रही […]

विंग कमांडर अभिनंदन की रिहाई के पीछे की कहानी वो नहीं है, जो मीडिया बता रहा है

पाकिस्तान ने अपनी हिरासत में मौजूद भारतीय विंग कमांडर अभिनंदन को छोड़ने का फैसला लिया है। जल्द ही उन्हें रिहा कर भारत को सौंप दिया जाएगा। इस बारे में भारतीय सरकार से लेकर देश का मीडिया अपने-अपने दावे कर रहे हैं कि उनके दवाब की वजह से अभिनंदन को छोड़ा जा रहा है। इस बारे […]

लोकतंत्र के नाम पर तानाशाही लाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है

पिछले पंद्रह सालों में मध्य प्रदेश में, छत्तीसगढ़ में, पांच सालों में राजस्थान में सरकारों ने क्या वायदे किए, राजनीतिक दलों ने क्या वायदे किए, उन वायदों को उन्होंने निभाया या नहीं निभाया या जो कहा था उसका कितना प्रतिशत वायदा पूरा हुआ, इसे लेकर लोगों में कोई चिंता नहीं है. हर चुनाव में एक […]

भाजपा के लिए ‘राम’ वोट पाने का साधन भर हैं 

किसी ने सही कहा कि जो आपका काम नहीं है, वह काम न करे, वर्ना बर्बादी के लिए उतना ही काफी है. इस सरकार ने यही किया है. साढ़े चार साल में जहां सरकार को कारगर कदम उठाने चाहिए थे, उसने  नहीं उठाए और बेकार के कामों की लिस्ट इतनी लंबी होती गई कि अब […]

अब सच-झूठ और विकास-विनाश का फर्क़ मिट गया है

हम सोचने लगे कि वो व्यक्ति जिसे हम बहुत पढ़ा-लिखा नहीं मानते, वो यह बात समझ रहा है कि पीढ़ियों के बदलाव का मतलब उत्थान से पतन की ओर जाना नहीं होता, पर हम तो पतन की ओर जा रहे हैं. तब हमारे सामने रास्ता क्या रह जाता है, जब पतन की ओर ले जाने […]

आरबीआई को समझना चाहिए कि भारत अमेरिका नहीं है

जब मौजूदा सरकार सत्ता में आई और अरुण जेटली वित्त मंत्री बने, तो रघुराम राजन गवर्नर थे. रघुराम राजन शिकागो कॉनसेन्सस के आदमी हैं. उनकी सोच अलग है. मैं नहीं समझता कि अमेरिका में पढ़ा हुआ अर्थशास्त्री यहां के अर्थशास्त्रियों से ज्यादा होशियार होगा. हिन्दुस्तान की आबादी सवा सौ करोड़ है, जबकि अमेरिका की आबादी […]

संवैधानिक संस्थाएं जन भावना से संचालित नहीं होती हैं

ये सारी चीजें हम जैसों को सोचने पर मजबूर कर रही हैं कि अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, दीनदयाल उपाध्याय जैसे लोकतंत्र का सम्मान करने वाले राष्ट्रभक्त लोगों की विचारधारा का क्या अब हमारे समाज में कोई स्थान नहीं है? इनका नाम भले ही लें, लेकिन सत्ता इन सबके विचारों के खिलाफ […]

देश का आत्मविश्वास डोल गया है

मोदी जी सरदार पटेल और नेताजी बोस की तारीफ करते हैं. इसलिए नहीं करते हैं कि आप उनके प्रशंसक हैं. आपको लगता है पटेल की स्टैच्यू बना दिया तो नेहरू बौना हो गए. या बोस की तारीफ की तो नेहरू छोटा हो गए, ऐसा नहीं है. पटेल ने जो काम किया वो तो करिए. पटेल […]

सर्वोच्च पद और संस्था को मज़ाक़ का विषय मत बनाइए

हमें अगर अपने संस्थान पर नियंत्रण रखना है या अपना वर्चस्व बनाए रखना है या अपने नेतृत्व के प्रति पूरे संस्थान का विश्वास कायम रखना है, तो आवश्यक है कि सर्वोच्च व्यक्ति ज्ञान, कल्पनाशीलता और सत्यनिष्ठा में उदाहरण प्रस्तुत करे. जहां यह नहीं होगा, वहां पर लोग आदेश मानते तो दिखाई देंगे, लेकिन उनमें न […]

अगले प्रधानमंत्री के लिए समस्याओं का पहाड़ तैयार है

इस देश में 19 महीने तक आपातकाल रहा. इंदिरा गांधी पर आपातकाल हटाने का कोई दबाव भी नहीं था. हां, मीडिया पर सेंशरशिप था. संजय गांधी उनके पुत्र थे. उनके पास कोई आधिकारिक पद नहीं था. चर्चा थी कि सब जगह संजय गांधी की चलती है. वे जो बोल देते हैं, वही अंतिम होता है. […]

सत्य से साक्षात्कार कराने के लिए नितिन गडकरी का धन्यवाद 

नितिन गडकरी दरअसल देश को ये बता रहे थे कि देश में जितनी आशा जगी है, वो इसलिए जगी है क्योंकि हमने इतने ज्यादा वादे कर लिए और हमें पता ही नहीं था कि केंद्र में हमारी सरकार बनेगी. महाराष्ट्र का चुनाव देश का भविष्य बदलने वाला चुनाव नहीं था. भाषाओं के ऊपर लोगों को […]

देश की हालत और खराब मत कीजिए

एक अहम सवाल यह है कि इस चुनाव में क्या होगा? मोदी जी के लिए सबसे घातक यह है कि देश की आर्थिक स्थिति चरमरा गई है. 2014 में जब मोदी आए थे तब पेट्रोल का मूल्य कम हो गया था. उस स्थिति का इस्तेमाल करने के बजाए सरकार ने गुडविल बिगाड़ लिए और आज […]

जो असहमति जता सके वही जेपी का नाम लेने का हक़दार है

आज की भारतीय जनता पार्टी के नेता ये भूल गए हैं कि कैसे नानाजी देशमुख को जेपी का प्यार मिला और नानाजी देशमुख ने उस प्यार के सहारे कैसे अटल बिहारी वाजपेयी जी और लालकृष्ण आडवाणी को जयप्रकाश जी के साथ खड़ा होने का आदेश दिया. लालू प्रसाद यादव सहित मुलायम सिंह यादव का भी […]

तेरी रहबरी का सवाल है

आज भी कश्मीरी चाहते हैं कि भारत पाकिस्तान का कोई समझौता हो जाए. जब मुशर्रफ आगरा आए थे, तो वे समझौता करने को तैयार थे, लेकिन आरएसएस ने वो समझौता नहीं होने दिया. मोदी खुद आरएसएस के नुमाइंदे हैं, वो भी चाहते हैं कि कोई समझौता हो, लेकिन पाकिस्तान की तरफ भी कुछ लोग हैं, […]

किसान को अपनी मूलभूत समस्याओं का समाधान चाहिए

आज किसान आंदोलन ने एक ऐसा मोड़ ले लिया है, जो न सिर्फ राजनीति या सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों के लिए, बल्कि आम लोगों के लिए भी चिंता की बात है. ऐसा नहीं है कि यह आंदोलन अप्रत्याशित है, क्योंकि नरेंद्र मोदी ने अपने चुनावी भाषणों में यह वादा किया था कि वे किसानों […]

आज पत्रकारिता के मायने बदल गए हैं

       ये 2018 का वर्ष चल रहा है. हिंदुस्तान में यह उत्साह का वर्ष होना चाहिए था. लेकिन यह वर्ष उन लोगों के लिए क्यों ऐसा वर्ष बन रहा है, जिनके ऊपर सबसे ज्यादा भरोसा था और अब उन्हीं का सबसे ज्यादा मजाक सोशल मीडिया पर उड़ रहा है. ऐसे में एक भारतीय […]

भाग्यशाली प्रधानमंत्री से देश का भाग्य तय नहीं होता

       देश के किसी नेता का भाग्य ऐसा नहीं है कि उसके कार्यकर्ता उसके लिए इतने ज्यादा सपर्पित हों. इसीलिए भारतीय जनता पार्टी बहुत ज्यादा उत्साह में है. भले ही लोगों की थाली में रोटी न पहुंचे, उन्हें नौकरी न मिले, आंतरिक या बाहरी शक्तियां नियंत्रण में न हों, इससे कोई फर्क नहीं […]

राफेल पर गोपनीयता और चुप्पी का मतलब क्या है

अगर आप कह रहे हैं कि राफेल डील साफ है, तो फिर बताइए रुपए कहां से आए. मैं पर्सनल आरोप-प्रत्यारोप के खिलाफ हूं. बोफोर्स का जब मामला आया था, तब मैं विपक्ष में था. मैंने कभी नहीं कहा कि राजीव गांधी ने पैसे लिए हैं. उस समय विपक्ष कहता था कि रिश्वतखोरी हुई है, तो कांग्रेस कहती […]

विकास का एजेंडा खत्म हो गया है

क्या देश की नीतियां टाटा, बिड़ला, अंबानी, अडानी के कहने पर बनेंगी? क्या कर रही है सरकार? एनपीए और दिवालिया कानून को लेकर सरकार ने सब घालमेल कर दिया है. अगर किसी के पास 70 हजार करोड़ का लोन है, तो सरकार क्या कर रही है? सरकार कहती है कि उसने समाधान कर दिया. कैसे? […]

ज़िंदगी की चुनौतियों का सामना मुस्कुरा कर करना चाहिए

कल्पेश याग्निक एक ऐसे पत्रकार थे, जो स्वयं में एक संस्था थे. कल्पेश याग्निक ने विश्वविद्यालय की खबरों से जिंदगी शुरू की और भास्कर जैसे हिंदी के प्रसिद्ध अखबार के ग्रुप एडिटर बने. कल्पेश याग्निक की आत्महत्या ने मनोवैज्ञानिक सवाल तो खड़े किए ही, संस्थान की निर्ममता पर भी कई सवाल खड़े किए. अब जब […]

92 फीसदी आबादी को नकार कर देश कहां जाएगा

अब देश को सीधे रास्ते पर चलना ही चाहिए. आखिर 70 सालों से यह देश गलत रास्ते पर चल रहा था. इन दिनों देश की जनता के दिमाग का पैमाना सोशल मीडिया है. इसे प्रधानमंत्री जी ने देश की मिजाज जानने का एक बैरोमीटर बना रखा है. दूसरी तरफ संघ प्रमुख मोहन भागवत जी के […]

भाजपा ने बोरिया-बिस्तर बांधना शुरू कर दिया है

जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आता जा रहा है, हर पार्टी का उल्टा दृष्टिकोण सामने आ रहा है. भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई. अभी तक जिन लोगों को यह वहम है कि भाजपा बहुत लोकप्रिय है और चुनाव जीतने जा रही है, तो कार्यकारिणी के भाषण के बाद सर्वविदित हो जाना चाहिए कि भाजपा खत्म […]

अमेरिका दौरे पर आईं सऊदी महिला उद्यमी, फ्रैंक इस्लाम ने दिए सफलता के मंत्र

भारतीय-अमेरिकी उद्यमी, सिविक लीडर, समाजसेवी और परोपकारी फ्रैंक इस्लाम ने अमेरिका दौरे पर आईं युवा सऊदी महिला उद्यमियों को संबोधित करते हुए कहा कि आप न केवल सऊदी अरब, बल्कि दुनिया का भविष्य हैं. मैं आप से, आपकी कहानी से और आपके अबतक के सफ़र से बहुत प्रभावित हूं. महिलाओं द्वारा संचालित सऊदी स्टार्ट-अप्स की […]

अर्बन नक्सल जैसे शब्द सत्ता के दिमागी दिवालिएपन की उपज हैं

नए-नए शब्द हमारे सामने आते रहते हैं. अब एक नया शब्द आया है, अर्बन नक्सलिज्म. इस शब्द को गढ़ने वाली एक महिला हैं, जो स्वयं हिंदू कोर्ट की स्वयंभू जज बनी हुई हैं. अभी तक किसी ने भी यह सवाल नहीं उठाया कि ये हिंदू कोर्ट क्या है और इसकी ये महिला सर्वोच्च जज कैसे […]

जनता को क्या जवाब देगी सरकार?

इस कॉलम के जरिए पिछले एक साल से जो बातें मैं कह रहा हूं, वो अब धीरे धीरे सर्वविदित हो रही हैं. चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, मोदी जी और अमित शाह को समझ में आ गया है कि यह 2014 की तरह आसान नहीं है. अगर आज सिर्फ ये बोलते रहें कि हमने […]

क्या अटल जी के आचरण का अनुकरण करेंगे मोदी जी?

शेख चिल्ली की बातें भारत जैसे देश में नहीं चलती हैं. किसान जानता है कि मेरी इतनी जमीन है, न मैं इसकी उत्पादकता दुगनी कर सकता हूं और न सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य दुगनी करेगी. अगर बहुत अच्छी सरकार आ गई, तो समर्थन मूल्य में  दस प्रतिशत का इजाफा कर देगी. भारत में हरेक किसान […]

भारत: लोकतंत्र की आशा का वैश्विक अग्रदूत

मेरी राय में भारत को लोकतंत्र के वैश्विक अग्रदूत की भूमिका में आने के लिए तीन महत्वपूर्ण सुधार बिन्दुओं पर काम करने की आवश्यकता होगी. पहला, समावेशी समाज और आर्थिक समानता और समान अवसर के एजेंडे का पालन. पिउ रिसर्च सेंटर के अध्ययन में यह निष्कर्ष निकला है कि मज़बूत लोकतांत्रिक प्रणाली वाले समृद्ध देशों […]

इमरान खान और भारत-पाक शांति प्रक्रिया

पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के महानायक इमरान खान द्वारा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का पदभार संभालने के बाद क्या भारत और पाकिस्तान के  बीच तनाव कम होंगे? पिछले दिनों पाकिस्तान के 22वें प्रधानमंत्री के  रूप में शपथ लेने वाले इमरान खान, भारतीय क्रिकेट-प्रेमियों के बीच भी बेहद लोकप्रिय हैं. लेकिन पिछले 70 वर्षों में तीन जंग लड़ […]