केंद्रीय जांच टीम के निष्कर्षों पर आई नई रिपोर्टों में बीमारी की निगरानी, कर्मचारियों की तैनाती और पोषण से जुड़ी खामियां सामने आई हैं।*

मध्य प्रदेश के बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौतों की जांच अब स्वास्थ्य सेवाओं की बुनियादी हालत पर सवाल खड़े कर रही है। केंद्रीय जांच टीम के निष्कर्षों पर शुक्रवार को प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, जिले में बीमारी का प्रकोप पहचानने और उसकी जांच करने वाले महत्वपूर्ण पद खाली थे। जिला जनस्वास्थ्य प्रयोगशाला भी नहीं थी।

The Indian Express ने नेशनल जॉइंट आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम की जांच के हवाले से बताया है कि जिला महामारी विशेषज्ञ और माइक्रोबायोलॉजिस्ट के पद रिक्त थे। रोग निगरानी इकाई का काम एक डेटा मैनेजर के सहारे चल रहा था। प्रभावित कुंदेकसा गांव में एक साल से अधिक समय से आशा कार्यकर्ता नहीं थी।

ये मौतें आज की घटना नहीं हैं। अखबार की रिपोर्ट में जून से लगभग 32 आदिवासी बच्चों की मौतों का उल्लेख है। नई जानकारी उस जांच से जुड़ी है, जिसमें स्वास्थ्य तंत्र की कमियों को दर्ज किया गया है। बच्चों में तेज बुखार, शरीर पर दाने और पेट दर्द जैसे लक्षण सामने आने की बात कही गई है।

NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, जांच में खसरा और मलेरिया के मामले मिले और कुछ बच्चे दोनों संक्रमणों से प्रभावित थे। कुपोषण की समस्या भी दर्ज हुई। फिर भी, सभी मौतों को एक ही बीमारी या केवल कुपोषण से जोड़ देना उपलब्ध निष्कर्षों से आगे की बात होगी। अलग-अलग मामलों में कारणों की स्पष्टता जरूरी है।

इस संकट पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी हुए हैं। राज्य के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने सरकार का पक्ष रखते हुए प्रभावित क्षेत्रों में मंत्रियों के दौरे, अधिकारियों की तैनाती और नए स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना की प्रक्रिया का उल्लेख किया है। सरकार की इन कार्रवाइयों का वास्तविक असर आगे की पड़ताल का विषय है।

सितंबर में Scroll की मैदानी रिपोर्ट ने भी इलाके में टीकाकरण और पोषण की कमियों को उठाया था। अब जांच संबंधी नई जानकारी आने के बाद जवाबदेही के सवाल अधिक स्पष्ट हैं: खाली पद कब भरेंगे, गांवों में नियमित स्वास्थ्य निगरानी कब होगी और बीमार बच्चों को समय पर जांच तथा इलाज कैसे मिलेगा?

अगला फॉलो-अप इन्हीं कदमों की स्थिति पर होना चाहिए। केवल नए केंद्र की घोषणा पर्याप्त सूचना नहीं होगी; उसके खुलने, कर्मचारी आने और सेवाएं शुरू होने की तारीख भी दर्ज करनी होगी।

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