HL Promotersकौन नहीं चाहता कि उसका अपना खुद का एक घर हो. इस सपने को पूरा करने के लिए आदमी अपने जीवन भर की कमाई एक बिल्डर के हाथों में सौंप देता है. लेकिन आमतौर पर ग्राहकों को बिल्डर से कई शिकायतें रहती हैं. देश भर में फैले रियल एस्टेट डेवलपर भी कई स्तर पर, कई तरह की कारगुजारियों से ग्राहकों को मूर्ख बना कर पैसा लूटने का काम करते हैं. बिल्डर ग्राहकों को कई ऐसी तकनीकी शब्दावलियों में उलझा देते हैं, जिसे उनके लिए समझना आसान नहीं होता.

मसलन, कारपेट एरिया, सेल एरिया, जीना इत्यादि के नाम पर भरमा कर उनसे पैसा ले लिया जाता है. आमतौर पर ग्राहक इस सब से वाकिफ नहीं होता और जो ग्राहक इस तरह की चालाकी को समझ जाता है, वो इन ताकतवर बिल्डरों के खिलाफ चाह कर भी कुछ नहीं कर पाता, क्योंकि इनका बहुत सारा पैसा बिल्डरों के पास पहले से ही जमा होता है.

ऐसी ही एक कहानी हरियाणा के बहादुरगढ़ से निकल कर सामने आई है. एचएल प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड, टाटा वैल्यू होम्स (टाटा समूह की कम्पनी) की सहायक कंपनी है. एचएल प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड यहां पर अपार्टमेंट बना रही है. दिल्ली के करीब बहादुरगढ़ के नए प्रोजेक्ट न्यू हैवेन बहादुरगढ़ में कई गड़बड़ियों की खबरें आई हैं. इस मामले को ले कर दिल्ली पुलिस के पास शिकायत भी दर्ज कराई गई है. ये शिकायत इसी कंपनी के एक पूर्व कर्मचारी ने दर्ज कराई है. कंपनी पर ग्राहकों को गलत जानकारी दे कर अधिक पैसा वसूलने का आरोप है. इस शिकायत में बताया गया है कि उक्त कंपनी ने आर्किटेक्ट्स द्वारा तय किए गए पूर्व निर्धारित मानकों को तोड़ते हुए एक मेल जारी किया, जिसमें 2 बेडरुम, हॉल, किचन वाले फ्लैट की लोडिंग 41 फीसदी और 3 बीएचके वाले फ्लैट की लोडिंग 39 फीसदी तय कर दी. इन सब का मतलब क्या है? इसे समझना जरूरी है.

दरअसल, जब किसी ग्राहक ने फ्लैट बुक कराया, तो उसे पता चला कि कंपनी ने 2 बीएचके का कारपेट एरिया (ये वो एरिया होता है, जिसे कस्टमर्स वाकई इस्तेमाल में लाते हैं) 911 स्न्वायर फीट और सेल एरिया (जिसमें कॉमन एरिया भी आता है, जैसे सीढ़ी, लिफ्ट लॉबी, कॉरिडोर इत्यादी) 1185 वर्ग फीट तय किया है. इसी तरह 2 बीएचके (लार्ज) का कारपेट एरिया 1067 वर्ग फीट और सेल एरिया 1390 वर्ग फीट और 3 बीएचके का कारपेट एरिया 1356 वर्ग फीट और सेल एरिया 1750 वर्ग फीट तय किया गया. लेकिन, पुलिस के पास जो शिकायत दर्ज कराई गई है उसके मुताबिक, 4 मार्च 2015 को मैनेजिंग डिपार्टमेंट से एक मेल जारी किया गया, जिसमें कारपेट और सेल एरिया रिवाइज़ कर दिया गया.

इस रिवीजन के अनुसार, 2 बीएचके (स्मॉल) का  कारपेट एरिया 916 वर्ग फीट, सेल एरिया 1296 वर्ग फीट और 2 बीएचके (लार्ज) का कारपेट एरिया 1074 वर्ग फीट, सेल एरिया 1521 वर्ग फीट और 3 बीएचके का कारपेट एरिया 1357 वर्ग फीट, सेल एरिया 1917 वर्ग फीट तय कर दिया गया. इससे हुआ ये कि ग्राहकों के इस्तेमाल में आने वाले कारपेट एरिया में 7 वर्ग फीट की बढ़ोतरी हुई, जबकी कंपनी को फायदा पहुंचाने वाले सेल एरिया में कम से कम 111 वर्ग फीट की बढ़ोतरी हो गई. कंपनी की तरफ से प्रति वर्ग फीट 4000 रुपए कीमत तय की गई है. अब मनमाने तरीके से एरिया रिवाइज करने के कारण कंपनी को 2 बीएचके (स्मॉल) पर 4.4 लाख, 2 बीएचके (लार्ज) पर 5.24 लाख और 3 बीचके पर 6.68 लाख का अतिरिक्त मुनाफा होगा.

इस प्रोजेक्ट में 1200 फ्लैट्स बनने है. मान लीजिए कि औसतन एक फ्लैट की बिक्री पर 5 लाख का अतिरिक्त मुनाफा होता है, तो कंपनी को कुल 60 करोड़ की अतिरिक्त आय हो जाएगी. अब सवाल है कि क्या ये करना टाटा होम्स जैसी कंपनी के लिए नैतिक माना जा सकता है. बहरहाल, इस पुलिस शिकायत पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. इस मामले में वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने भी कंपनी को पत्र लिख कर इस गड़बड़ी के बारे में बताया है. इसके अतिरिक्त हरियाणा सरकार की अथॉरिटी को भी इन गड़बड़ियों के बारे में सूचित किया गया है. लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है. अलबत्ता ये कह कर मामले को और लंबा खींचा जा रहा है कि जांच चल रही है.

जाहिर है, टाटा समूह की बाजार में अपनी एक साख है, लेकिन इस प्रोजेक्ट की वजह से इस साख पर सवाल खड़े हो रहे हैं. गौरतलब है कि भारत सरकार ने हाल ही में रियल एस्टेट रेगुलेशन एक्ट भी पास किया है, लेकिन ये पहले से चल रहे प्रोजेक्ट्स पर लागू नहीं होता है. ऐसे में टाटा समूह की जिम्मेवारी है कि वो अपनी सहयोगी कंपनी के द्वारा की जा रही धोकाधड़ी के मामले की पूरी जांच करवा कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करें, ताकि उसकी साख बरकरार रह सके. अगर वो ऐसा नहीं करते हैं, तो ये समूह भी बाजार में लूट मचा रही अन्य रियल एस्टेट कंपनियों की श्रेणी में जल्द ही आ जाएगी.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here