दिल्‍ली सरकार ने 13 सवाल पूछे थे जिसके जवाब आज राज्‍य सरकार दे सकती है. शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान एनजीटी दिल्‍ली सरकार को फटकार लगाई थी और कहा था कि हमारी संतुष्टि के बिना ऑड ईवन लागू नहीं होगा. दिल्ली सरकार ने अनुरोध किया था कि जरूरी सामान के उद्योगों को बैन से बाहर रखा जाए जिस पर एनजीटी ने कहा था कि हम अगर बच्चों को साफ हवा नहीं दे रहे हैं तो पाप कर रहे हैं.

एनजीटी ने दिल्‍ली सरकार की उस दलील को भी खारिज कर दिया जिसमें उसने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उन्‍होंने ऑड-ईवन लागू किया था. एनजीटी ने साफ किया कि सुप्रीम कोर्ट ने आपको ऑड-ईवन लागू करने का कोई आदेश नहीं दिया. कोर्ट ने आपको ग्रेडेड प्लान बताया था और 100 चीजें बताईं थीं. एनजीटी ने कहा कि जब प्रदूषण कम हो रहा है तो आप ऑड-ईवन लागू कर रहे और पिछले एक साल में आपने कुछ नहीं किया.

एनजीटी ने ऑड-ईवन से जुड़े पूछे ये सवाल  

1- आप किस डेटा के आधार पर सिर्फ 5 दिन के लिए ऑड-ईवन क्यों लागू कर रहे हैं?
2- पिछली बार ऑड-ईवन लागू हुआ था तब डीपीसीसी के अनुसार प्रदूषण कम नहीं हुआ था
3- 48 घंटे पीएम 10 अगर 500 होता है और पीएम 2.5 अगर 300 होगा तो क्या आप ऑड-ईवन लागू कर देंगे?
4- जो 500 बसें लाई जा रही हैं उनमें कितनी डीजल की हैं?
5- एक डीजल गाड़ी कितनी पेट्रोल कार के बराबर प्रदूषण करती है?
6) पेट्रोल और छोटी गाड़ियों का दिल्ली के प्रदूषण में कितना योगदान है?
7) मोटरसाइकिल कितना प्रदूषण करती हैं और आपने इन्हें क्यों छूट दी?
8) बोर्ड और मीडिया के मुताबिक, निर्माण कार्य चल रहा है. हम निर्देश देते हैं दिल्ली सरकार डीडीए और दूसरी सरकारें इंस्पेक्ट करें कि ये न हो और एक लाख रुपये का जुर्माना लगाएं.
10) उद्योग जो जरूरी सामान और खाने का सामान बनाती हैं उन्हें हम बैन से बाहर करते हैं.
11) हम हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, यूपी, दिल्ली को आदेश देते हैं कि किसी भी प्रकार की कोई पराली नहीं जलाई जाए.
12) अगर पराली जलाई जाएगी तो जिम्मेदार अधिकारियों के वेतन से दंड काटा जाएगा.
13) कोई भी ओवरलोडड ट्रक दिल्ली और एनसीआर में न आएं.

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