एससी-एसटी एक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ दलितों द्वारा बुलाया गया भारत बंद का व्यापक असर 10 राज्यों में देखने को मिला. मध्यप्रदेश के 4 और राजस्थान के एक व्यक्ति की मौत इस हिंसात्मक आंदोलन मेें हो गई. वहीं भीड़ द्वारा एम्बुलेंस रोकने के कारण एक नवजात की भी जान चली गई. आंदोलन के कारण पंजाब में चल रही सीबीएसई की परीक्षाएं टाल दी गई हैं. आंदोलन का सबसे ज्यादा असर मध्यप्रदेश के भिंंड, मुरैना और ग्वालियर, राजस्थान के अलवर और बिहार के करीब दर्जन भर जिलों में देखने को मिला.

इधर केंद्र सरकार ने एससी-एसटी एक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ सोमवार को रिव्यू पिटिशन दायर की, लेकिन कोर्ट ने इस मामले की फौरन सुनवाई से इनकार कर दिया. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च को जारी एक आदेश में एससी-एसटी एक्ट के दुरुपयोग पर चिंता जताया था. कोर्ट ने इसके तहत तत्काल गिरफ्तारी या आपराधिक मामला दर्ज करने पर रोक लगा दी थी, साथ ही एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज होने वाले केसों में अग्रिम जमानत को भी मंजूरी दे दी थी.

इसके बाद विभिन्न दलित संगठनों और राजनीतिक दलों के साथ-साथ सत्ताधारी गठबंधन के कई नेताओं ने भी इस फैसले का विरोध किया था. केंद्रीय मंत्रियों रामविलास पासवान और थावरचंद गहलोत की अगुआई में एससी-एसटी सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ अपना विरोध दर्ज करवाया था. इसके बाद इस मुद्दे ने पूरी तरह से राजनीतिक रूप ले लिया. इसका चुनावी असर भी साफ देख जा सकता है. आज के बंद के दौरान जिन 10 राज्यों में उग्र प्रदर्शन हुए वहां की 68 लोकसभा सीटें ऐसी हैं, जिन पर एससी/एसटी वोटरों का खास प्रभाव है.

राहुल गांधी ने इसे लेकर ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने कहा कि दलितों को भारतीय समाज के सबसे निचले पायदान पर रखना आरएसएस/भाजपा के डीएनए में है. जो इस सोच को चुनौती देता है उसे वे हिंसा से दबाते हैं. हजारों दलित भाई-बहन आज सड़कों पर उतरकर मोदी सरकार से अपने अधिकारों की रक्षा की मांग कर रहे हैं. हम उनको सलाम करते हैं. राहुल गांधी के अलावा विपक्ष के कई नेताओं ने खुले तौर पर इस बंद का समर्थन किया. बिहार में पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव भी बंद के समर्थन में सड़कों पर उतरे.

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