Tag: history

बापू से पहले आजादी के आंदोलन की नींव रखने वाले ‘बाल गंगाधर तिलक’

बापू से पहले आजादी के आंदोलन की नींव रखने वाले ‘बाल गंगाधर तिलक’

गुलाम भारत में ब्रिटिश राज के खिलाफ शुरू हुए महात्मा गांधी के पहले अभियान यानी असहयोग आंदोलन को साल 1921 में एक साल बीत चुका था. आंदोलन की आग देश भर में फैल रही थी. लेकिन किसी भी आंदोलन को...

Labour Day 2019 : जानिए आखिर 1 मई को ही क्यों मनाया जाता है मजदूर दिवस ?

Labour Day 2019 : जानिए आखिर 1 मई को ही क्यों मनाया जाता है मजदूर दिवस ?

दुनिया के इतिहास में 1 मई की तारिख मजदूर दिवस के रूप में दर्ज है. 1 मई 1886 में अमेरिका के शिकागो से शुरू हुआ यह सिलसिला आज भी बदस्तूर जारी है. दरअसल इस दिन अमेरिका के लाखों मज़दूरों ने...

PAK-आतंकियों पर आसमान से निगरानी, ISRO ने लांच किया EMISAT, अंतरिक्ष में और बढ़ी ताकत

PAK-आतंकियों पर आसमान से निगरानी, ISRO ने लांच किया EMISAT, अंतरिक्ष में और बढ़ी ताकत

दुनिया भर में भारत अब अंतरिक्ष महाशक्ति बन गया है. अंतरिक्ष की दुनिया में भारत लगातार इतिहास रचता जा रहा है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) सोमवार को फिर नया कीर्तिमान स्थापित किया. आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से आज सुबह...

ओवैसी ने योगी के बयान पर किया पलटवार, कहा ये मुल्क मेरे पिता का है

ओवैसी ने योगी के बयान पर किया पलटवार, कहा ये मुल्क मेरे पिता का है

एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि ये मुल्क मेरे पिता का है. अब जब ये मुल्क मेरे पिता का है तो उसके बेटे को कोई कैसे जबरदस्ती...

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री तक सीमित नहीं है करुणानिधि की शख्सियत

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री तक सीमित नहीं है करुणानिधि की शख्सियत

महाराष्ट्र में मराठा समुदाय की गिनती उंची जाति में होती है. गुजरात के पाटिदारों की तरह अब वो भी पुरजोर तरीके से आरक्षण की मांग कर रहे हैं. दरअसल, देश में आरक्षण का एक लंबा इतिहास रहा है. मंडल कमीशन...

कश्मीर का इतिहास : कल्हण बनाम खालिद बशीर अहमद

कश्मीर का इतिहास : कल्हण बनाम खालिद बशीर अहमद

पूर्व नौकरशाह खालिद बशीर अहमद की किताब कश्मीर: एक्स्पोजिंग द मिथ बिहाइंड नैरेटिव निस्संदेह अपनी तरह की पहली किताब है. इनसे पहले किसी भी मुस्लिम विद्वान ने इतिहास लेखन को इस तरह से नहीं देखा है. इस किताब के 387...

श्रीलंका की इस पहाड़ी पर मिला ‘रावण’ का ताबूत, इसी में बंद है दशानन का शरीर

श्रीलंका की इस पहाड़ी पर मिला ‘रावण’ का ताबूत, इसी में बंद है दशानन का शरीर

नई दिल्ली, (विनीत सिंह) : रावण के के बारे में तो हर कोई जानता है जिसने भगवान् राम की पत्नी सीता माता का हरण किया था. बाद में जब भगवान् राम माँ सीता को बचाने लंका गए तब रावण से...

अ़फसाना जो ना बन सका इतिहास

अ़फसाना जो ना बन सका इतिहास

सन्‌ 1857 में छिड़े प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के स्वाधीनता सेनानियों में से एक अति महत्वपूर्ण हस्ताक्षर थे, जगदीशपुर के बाबू कुंवर सिंह. इसके अलावा उनके साथ एक ऐसी कहानी भी जुड़ी है, जिसे इतिहास में मुकम्मल स्थान नहीं मिल सका...

इसरो के ऐतिहासिक कारनामे, जो इसे बनाते हैं अंतरिक्ष का शहंशाह

इसरो के ऐतिहासिक कारनामे, जो इसे बनाते हैं अंतरिक्ष का शहंशाह

आज एक साथ 104 सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजकर इसरो ने विश्‍व रिकॉर्ड बना लिया है. परएसएलवी के जरिए एक साथ 104 सैटेलाइट का सफल प्रक्षेपण कर के इसरो ने आज रूस को पीछे छोड़ दिया. रूस ने 2014 में 37...

इतिहास से छंटती धुंध

इतिहास से छंटती धुंध

साहित्य अकादमी पुरस्कारों को लेकर साहित्य जगत में कई तरह की किवदंतियां और मिथक मौजूद हैं. कब किसको मिला और कब किसको नहीं मिला, इसको लेकर भी कई तरह की बातें और प्रसंग साहित्य जगत में गूंजते रहते हैं, बहुधा...

कुरीतियों को तोड़ने के लिए लेते हैं अवतार

कुरीतियों को तोड़ने के लिए लेते हैं अवतार

एक गृहस्थ किस प्रकार अपने व्यवसाय एवं पारिवारिक दायित्वों का निर्वाह करते हुए बाबा से संबद्ध कार्यों में संलग्न हो सकता है? एक गृहस्थ को अपने परिवार के प्रति अपने सभी दायित्वों का श्रेष्ठता से निर्वाह करते हुए बाबा के...

संस्कृति सहेजने वाली भावना

संस्कृति सहेजने वाली भावना

आपने यह तो सुना ही होगा कि बनारस का पान खाने से अक्ल का ताला खुल जाता है, लेकिन बनारस का यह मशहूर पान आखिर मिलता कहां है, यह पान बनता कैसे है और यह पान किस तरह बनारस की...

पत्रों से खुलते राज

पत्रों से खुलते राज

अच्युतानंद मिश्र जी द्वारा संपादित इस किताब में निराला जी का एक पत्र है 17 अक्टूबर, 1931 का, जिसमें वह लिखते हैं, प्रिय श्री पोद्दार जी, नमो नम:. आपका पत्र मिला. मैं कलकत्ता सम्मेलन में जाकर बीमार पड़ गया. पश्चात...

महिलाओं की सुध स़िर्फ दिवस विशेष पर!

महिलाओं की सुध स़िर्फ दिवस विशेष पर!

यह देश, यह आज़ादी और ये तमाम सड़कें, इन सब पर महिलाओं का उतना ही हक़ है, जितना पुरुषों का. अब समय आ गया है कि महिलाएं अपनी ज़िंदगी की कमान अपने हाथ में लें. बेटियों की पोशाक पर ही...

भीलों का उजड़ता जीवन

आदिवासियों की हालत के बारे में सामाजिक कार्यकर्ता शंकर तलवड़ा बताते हैं कि हमारे सामाजिक ताने-बाने को छिन्न भिन्न कर दिया गया है. बाजार ने हमारी सामूहिकता को तोड़ दिया है. लालच ने एक-दूसरे को सहयोग करने की भावना को...

कॉकस के कब्जे में अकादमी

कॉकस के कब्जे में अकादमी

भारतीय जनता पार्टी के केंद्र में सरकार बनाने के बाद इस बात की आशंका तेज हो गई थी कि सांस्कृतिक संगठनों पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि के लोगों की नियुक्ति होगी. वामपंथी बुद्धिजीवी लगातार आशंका जता रहे हैं कि...

इतिहास फिर से क्यों लिखा जाना चाहिए

इतिहास फिर से क्यों लिखा जाना चाहिए

आम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की भारी-भरकम जीत के साथ ही यह तय हो गया था कि अब देश में इतिहास को लेकर विवाद उठेगा. भारतीय जनता पार्टी की सरकार इतिहास को फिर से लिखने की कोशिश करेगी, जिसका...

भारत का सशक्त प्रधानमंत्री

भारत का सशक्त प्रधानमंत्री

नरेंद्र मोदी को ईश्‍वर ने, अल्लाह ने, गॉड ने, वाहेगुरू ने या दूसरे शब्दों में कहें तो वक्त ने इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया है. नरेंद्र मोदी के सामने पिछले 64 सालों की सफलताओं और असफलताओं के अनुभव...

लोकसभा 1952 से अब तक…

लोकसभा 1952 से अब तक…

पहली लोकसभा (1952) देश की पहली लोकसभा का गठन वर्ष 1952 में हुआ. पहले लोकसभा चुनाव के बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) 364 सीटों के साथ सत्ता में आई. पार्टी ने कुल पड़े वोटों का 45 प्रतिशत हिस्सा हासिल किया...

इतिहास को सच का आईना

इतिहास को सच का आईना

क़रीब दो साल पहले की बात है, मेरे एक अग्रजवत वरिष्ठ सहयोगी ने आपसी चर्चा के दौरान कहा था कि हमारे देश का इतिहास उतना विश्‍वसनीय नहीं है, जितना उसे लोग समझते हैं. यह अपनी सुविधा और अपनी मर्जी के...

किया न धरा, गिलास तोड़ा बारह आना

किया न धरा, गिलास तोड़ा बारह आना

सांसदों का मूल काम होता है विधेयक बनाना. संसद में बैठे सांसदों से यही अपेक्षा की जाती है कि वे देशहित एवं जनहित में बेहतरीन क़ानून बनाने का काम करेंगे. इस लिहाज से देखें, तो पंद्रहवीं लोकसभा कामकाज के मामले...

लोक के लिए या लोभ के लिए

लोक के लिए या लोभ के लिए

चौदहवीं लोकसभा के बाद जब देश में पंद्रहवीं लोकसभा का गठन हो रहा था और नई सरकार बनी, तब ऐसा लगा कि बस रंगमच का पर्दा बदल रहा है, क्योंकि पात्र तो वही पुराने हैं. इसलिए नीतिगत स्तर पर यह...

विवाद का बेवजह कोना

विवाद का बेवजह कोना

मशहूर अमेरिकी लेखिका एवं शिकागो विश्‍वविद्यालय में इतिहास और धर्म में प्रोफेसर वेंडी डोनिगर की किताब-द हिंदूज, एन अल्टरनेटिव हिस्ट्री को उसके प्रकाशक पेंग्विन बुक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने बाज़ार से वापस लेने और छपी हुई बाकी प्रतियों को नष्ट...

क्या ग़ज़ब का देश है

क्या ग़ज़ब का देश है

13फरवरी को इतिहास में दो तरह से याद किया जाएगा. 13 फरवरी को अन्ना हजारे ने अपने जीवन की सबसे बड़ी घोषणा की कि वह आगामी लोकसभा के चुनाव में ममता बनर्जी को प्रधानमंत्री बनाए जाने का समर्थन करेंगे और...

…और तभी सार्थक होगा मोमबत्तियों का जलना

…और तभी सार्थक होगा मोमबत्तियों का जलना

भ्रष्टाचार तो हम भारतीयों के रक्त में सम्मिलित हो गया है. इसे हमारे समाज ने सहजता से स्वीकार कर लिया है. हम ले-देकर काम कराने के आदी हो गए हैं. शॉर्टकट ढूंढने में मसरूफ हो गए हैं, हम जुगाड़ू हो गए...

मुस्लिमों के सवाल

मुस्लिमों के सवाल

विभाजन कांग्रेस द्वारा भारत को लेकर देखे गए सपने पर एक गहरा धक्का था, फिर भी कांग्रेस के नेता विभाजन के लिए तैयार हो गए थे. उन्होंने मुहम्मद अली जिन्ना का विरोध नहीं किया. इस बात के काफी सबूत हैं...

इतिहास कभी मा़फ नहीं करता

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पंद्रह अगस्त को लाल क़िले से देश को संबोधित किया. संबोधन से पहले लोग आशा कर रहे थे कि वह उन सारे सवालों का जवाब देंगे, जो देश के सामने हैं या जिन्हें उनके सामने उठाया...

महाभारत के पात्र आसपास बिखरे हैं

महाभारत के पात्र आसपास बिखरे हैं

भारतीय समाज में प्राचीन काल से लेकर आज तक सामाजिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि में कोई विशेष बदलाव नहीं आया है. उस व़क्त भी ताक़तवर व्यक्ति अपने फायदे के लिए कमज़ोर व्यक्ति का इस्तेमाल करता था, और आज भी ऐसा ही...

स्त्री विमर्श की बदमाश कंपनी

स्त्री विमर्श की बदमाश कंपनी

हिंदी में स्त्री विमर्श का इतिहास बहुत पुराना नहीं है. हिंदी साहित्य में माना जाता है कि राजेंद्र यादव ने अपनी पत्रिका हंस में स्त्री विमर्श की गंभीर शुरुआत की थी. दरअसल स्त्री विमर्श पश्चिमी देशों से आयातित एक कांसेप्ट...

लॉयनल मेसी : फुटबॉल का स्वर्णिम युग या सर्वश्रेष्‍ठ फुटबॉलर?

लॉयनल मेसी : फुटबॉल का स्वर्णिम युग या सर्वश्रेष्‍ठ फुटबॉलर?

फुटबॉल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि वैज्ञानिक किसी खिला़डी के अद्‌भुत खेल का कारण जानना चाहते हैं. इसके लिए उन्होंने लॉयनल मेसी के दिमाग़ का परीक्षण करने का फैसला किया है, क्योंकि मेसी अभी 25 साल...

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