social mediaतेज गति से बढ़ता हुआ ‘सोशल मीडिया’ का निरंतर उपयोग पूरे विश्व के लिए एक चुनौती है. इसका उपयोग एक तरफ जहां वरदान है, वहीं इसका दुरूपयोग अभिशाप से कम नहीं है. निजी उपयोगों के लिए हर व्यक्ति प्रतिदिन कुछ घंटे इंटरनेट पर व्यतीत करता है. लेकिन कुछ संस्थानों और व्यक्ति विशेष द्वारा ट्‌वीटर, फेसबुक और यू-ट्‌यूब आदि सोशल साइट्‌स का अपनी व्यापारिक और व्यक्तिगत गतिविधियों के लिए भरपूर उपयोग किया जाता है.

सोशल मीडिया से जुड़े जोखिम केवल ब्रांड की प्रतिष्ठा को ही नुकसान नहीं पहुंचाते, वरन्‌ व्यापार और उत्पाद से जुड़े हर मुद्दे और आंकड़ों का दुरूपयोग कर उत्पाद और व्यापार की प्रतिष्ठा का भी अत्यधिक हनन करते हैं. सच्चाई ये है कि अधिकतर संस्थान, संगठन एवं उद्योग से जुड़ी सभी इकाईयां, सोशल मीडिया के इस दुरूपयोग, जोखिम और समस्या के समाधान के लिए आज भी सक्षम नहीं हैं.

इस विषय पर हमने आई.टी. लेखा परीक्षा और अनुपालन उद्योग (आई.टी. ऑडिट और कम्पलाइंस) के श्री वरूण वोहरा से बातचीत की. उनका कहना था कि किसी संस्था या उत्पाद जगत से जुड़े अधिकतर कर्मचारी सोशल मीडिया का उपयोग करते हुए अपनी व्यक्तिगत और संवेदनशील सूचनाएं भी सोशल मीडिया पर प्रेषित करते हैं. ऐसा करने के दौरान, भावावेश में जाने-अनजाने, निजी-सूचनाओं और आंकड़ों के साथ अपने कार्य से जुड़ीं संवेदनशील जानकारियों का भी वे उल्लेख सोशल मीडिया पर कर देते हैं.

इन सबसे केवल संस्था की प्रतिष्ठा का ही हनन नहीं होता है, वरन व्यापारिक स्तर पर भी काफी नुकसान पहुंचता है. चील की तरह घात लगाए कुछ छोटे संस्थान व संगठन इन्हीं अवसरों की तलाश में सदैव सोशल मीडिया के इर्द-गिर्द मंडराते रहते हैं. अवसर मिलते ही वे इन सूचनाओं के आधार पर आंकड़ों का विश्लेषण कर निष्कर्ष निकालते हैं और उस संस्था या संगठन की समस्त गोपनीय जानकारियों को प्राप्त करने में सक्षम हो जाते हैं.

वरूण वोहरा ने ये भी बताया कि सोशल मीडिया पर वीडियो लिंक और फिशिंग-मेल आदि के माध्यम से दी गई जानकारियां भी किसी संस्था के लिए घातक साबित हो सकती हैं, अतः इस संबंध में काफी जागरूक होने की आवश्यकता है. असमाजिक तत्व, मालवेयर से जुड़े लिंक को इस तरह प्रस्तुत करते हैं कि वो वास्तविक-लिंक ही प्रतीत हों.

सोशल मीडिया की किसी भी साइट पर जब इन लिंक का प्रयोग किया जाता है, तो ये लिंक मालवेयर के माध्यम से किसी भी व्यक्ति, संस्था, संगठन या कार्यालय की व्यक्तिगत और कार्यक्षेत्र से जुड़ी सभी गोपनीय व संवेदनशील जानकारियों को कम्प्यूटर/सिस्टम से चुराकर स्वतः ही उन व्यक्ति विशेष या संस्थानों तक पहुंचा देते हैं, जो मालवेयर-लिंक को प्रेषित करते हैं.

यदि सोशल मीडिया का उपयोग करने वाले व्यक्ति, संस्थान, कार्यालय या संगठन अपने कम्प्यूटर/सिस्टम पर उचित सुरक्षा साधनों का प्रयोग नहीं करते हैं, तो ऐसे में सभी महत्वपूर्ण सूचनाएं व आंकड़ों के दुरूपयोग की पूर्ण संभावना बन जाती है, जिससे व्यवसायिक स्तर पर हानि होने का जोखिम अति प्रबल हो जाता है.

हर जोखिम क्षेत्र को जहां एक अति प्रभावशाली व परिभाषित अनुपालन ढांचे की आवश्यकता है, वहीं सोशल मीडिया के प्रयोग में भी उन्हीं विशिष्ट अनुपालनाओं और सावधानियों की आवश्यकता है, जिनको नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. प्रत्येक संस्थान, संगठन, कार्यालय व व्यक्ति विशेष को सोेशल मीडिया का प्रयोग करने पर एक अति विश्वसनीय, समर्पित व प्रभावशाली अनुपालन प्रोग्राम की आवश्यकता होती है, ताकि सोशल मीडिया से सम्बंधित जोखिमों को न्यूनतम किया जा सके. एक प्रभावी और सुचारू कार्यप्रणाली एवं सावधानियां सोशल मीडिया से होने वाले जोखिमों को कम नहीं करतीं, वरन उनका पूर्ण रूप से निवारण व समाधान भी करती है.

अनुपालन कार्यक्रम की रूपरेखा में कम से कम परिभाषित कार्यनीतियां और सोशल मीडिया के प्रयोग के सम्बंध में समुचित कार्यप्रणाली होनी चाहिए. इतना ही नहीं, सोशल मीडिया से जुड़े सभी जोखिमों की पहचान करना, उनको कम करने की कार्यप्रणाली और सोशल मीडिया से जुड़े खतरों पर एक कड़ी निगरानी की आवश्यकता होती है.

कोई भी अनुपालन कार्यक्रम (कम्पलाइंस प्रोग्राम) संस्था या संगठन की वरिष्ठ प्रबंधन समिति और सभी कर्मचारियों के सहयोग के बिना सफल नहीं हो सकता. अतः सोशल मीडिया के उपयोग के लिए समस्त संस्थानों व कार्यालयों के कर्मचारियों व प्रबंधन समिति को इससे जुड़े जोखिमों से अवगत व जागरूक कराना अति आवश्यक हो जाता है, ताकि जोखिम आए ही नहीं और यदि आए भी तो उसका निवारण तुरन्त ही हो सके.

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