एसआईटी को जांच के लिए 15 दिन का और समय, एनसीबीसी प्रमुख बोलीं– साजिशकर्ताओं को बख्शा नहीं जाएगा
राम मंदिर दान राशि के कथित गबन मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) को जांच आगे बढ़ाने के लिए 15 दिन का अतिरिक्त समय दिया गया है। इस बीच, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (एनसीबीसी) की अध्यक्ष साध्वी निरंजन ज्योति ने उत्तर प्रदेश सरकार की जांच का समर्थन करते हुए कहा कि मामले में शामिल किसी भी साजिशकर्ता को बख्शा नहीं जाएगा।
उन्होंने कहा कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और जांच पूरी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ रही है। एसआईटी अब मामले से जुड़े सभी पहलुओं की गहराई से जांच करेगी। अयोध्या के राम मंदिर में दान राशि के कथित गबन मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) को अपनी जांच पूरी करने के लिए 15 दिन का अतिरिक्त समय दिया गया है। अधिकारियों ने वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े इस मामले की जांच का दायरा बढ़ाने का फैसला किया है।
यह अतिरिक्त समय जांच एजेंसियों को मामले के सभी पहलुओं की गहराई से पड़ताल करने के लिए दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच को और व्यापक बनाया जाएगा, ताकि हर संभावित पहलू की जांच हो सके और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सके।

उन्होंने कहा, “यह मामला दुखद है, क्योंकि हम 500 वर्षों तक चले राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे हैं। इस आंदोलन में अनेक कार्यकर्ताओं और कारसेवकों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। मुझे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा है कि सच सामने आएगा और अब जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। जो भी इस साजिश में शामिल होंगे, चाहे वे कितने ही प्रभावशाली क्यों न हों, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।” साध्वी निरंजन ज्योति ने यह भी कहा कि मंदिर प्रशासन से जुड़े सभी लोगों को इस मामले से जोड़ना उचित नहीं है। उनके अनुसार, जिन लोगों की लापरवाही या अनियमितताओं में भूमिका पाई जाएगी, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन पूरे प्रशासन को दोषी ठहराना सही नहीं होगा। जांच ने 25 जून को उस समय रफ्तार पकड़ी, जब राम मंदिर में मिली दान राशि के कथित गबन के आरोपों के बाद एफआईआर दर्ज की गई।

अधिकारियों के अनुसार, मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की कई धाराओं के तहत दर्ज किया गया है, जिनमें धारा 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61 और 3(5) शामिल हैं। एफआईआर में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, टिन्नू यादव, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव समेत अन्य लोगों के नाम दर्ज किए गए हैं। यह शिकायत अयोध्या से समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक पवन पांडे के आरोपों के बाद दर्ज की गई, जिन्होंने दावा किया था कि मंदिर की दान राशि में से 7 करोड़ से 7.5 करोड़ रुपये तक का गबन किया गया है।

27 जून को, कथित गबन की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। पुलिस ने चंपत राय का बयान दर्ज कर लिया है, जबकि जांच के दौरान जरूरत पड़ने पर अनिल मिश्रा और ट्रस्ट के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों के बयान भी दर्ज किए जा सकते हैं। जांच एजेंसियों ने आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई तेज कर दी है। हाल ही में पुलिस की एक टीम जांच के सिलसिले में अयोध्या स्थित अविनाश शुक्ला के घर पहुंची थी।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पहले जारी एक बयान में कहा था कि वह इस घटना से “स्तब्ध, आहत और बेहद दुखी” है। ट्रस्ट ने निष्पक्ष जांच के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए श्रद्धालुओं को भरोसा दिलाया कि सच सामने लाया जाएगा।
इस कथित दान घोटाले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश सरकार को घेरा है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि विपक्ष राम मंदिर निर्माण का पहले भी विरोध करता रहा है और अब इस मुद्दे को विवाद का रूप देने की कोशिश कर रहा है।

उन्होंने कहा, “जांच जारी है और कई गिरफ्तारियां भी हो चुकी हैं। कई बार ऐसा होता है कि किसी संस्था का प्रमुख ईमानदार होता है, लेकिन उसके अधीन काम करने वाले कुछ लोग गलत इरादों से काम करके समस्याएं पैदा कर देते हैं। मुझे लगता है कि इस मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ है।”

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