कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor ने सरकार के उस स्पष्टीकरण पर चिंता जताई है, जिसमें कहा गया है कि भारतीय पासपोर्ट नागरिकता का अंतिम और निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि आम नागरिकों के लिए इसका व्यावहारिक अर्थ क्या होगा।

थरूर का कहना है कि पासपोर्ट जारी करने से पहले पुलिस सत्यापन, दस्तावेजों की जांच और अन्य विस्तृत प्रक्रियाएं पूरी की जाती हैं। इसलिए लंबे समय से पासपोर्ट को पहचान और भारतीय नागरिकता के सबसे विश्वसनीय दस्तावेजों में से एक माना जाता रहा है।

सरकार के इस स्पष्टीकरण के बाद अब यह सवाल चर्चा का विषय बन गया है कि भारत में नागरिकता का वास्तविक प्रमाण क्या माना जाए। विवाद तब शुरू हुआ जब सरकार ने स्पष्ट किया कि भारतीय पासपोर्ट अपने आप में नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं है। यह स्थिति Passports Act, 1967 के प्रावधानों पर आधारित है, जिसके तहत विशेष परिस्थितियों में गैर-नागरिकों को भी पासपोर्ट जारी किया जा सकता है।

इस मुद्दे ने देशभर में नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों और उनकी वैधानिक मान्यता पर नई बहस छेड़ दी है।

Adv from Sponsors