बहत्तर साल के गणतंत्र को बेहद अफसोस से गुजरना पड़ा…! अल सुबह से सड़कों से होकर स्कूल और वहां से देशभक्ति के नारे गुंजायमान करते मैदान तक पहुंचने वाले बच्चे आम दिनों की तरह रजाई में दुबके दिखाई दिए…! बच्चों को कार्यक्रम की शिरकत के लिए तैयार करने के लिए जाग जाने वाले अभिभावकों के लिए भी ये दिन किसी आम छुट्टी जैसा गुज़र गया…!

न टीवी पर लालकिले से प्रसारित भाषण सुनने की ललक, न स्कूलों में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बच्चों के शामिल होने की कसक… लहराते झंडे के तले जन गण मन का उत्साह, न मुंह में मिठास घोलते लड्डुओं का अरमान…! दस महीने पुराना Corona बहत्तर साल की परंपराओं पर भारी है…! कहने को तो परेड भी हैं, भाषण भी, झांकियां lic भी… लेकिन इनको देखकर मन प्रफुल्लित करने वाले बच्चों की दूरी है…!

सियासी भीड़, चुनावी जमावड़े, सांस्कृतिक कार्यक्रम, सामाजिक मिलन से लेकर पारिवारिक और मांगलिक अवसरों पर जमा होने वाली तादाद कंट्रोल्ड होते होते अनकंट्रोल हो चुकी… सब कुछ नियंत्रण में आने के दावे लहरा चुके, डर, खोफ के बीच दबाव के टीके लगाए जाने लगे… इन सबके बीच बच्चों को देश के इतिहास, देश के लिए संस्कार, देश के लिए जज्बे पैदा करने के हालात से रोका जाना… गणतंत्र याद रखेगा….! पहली बार इस मौके को देखने वाली पीढ़ी एक साल के लिए पिछड़ गई…! अफसोस इसलिए नहीं होना चाहिए, दस महीने में इतना कुछ खोने और पिछड़ने के आगे ये पिछड़ाव कम ही आंका गया होगा…!

पुछल्ला
नशा नाश ही करेगा…!

नशे की बुराई को मानते हुए सरकारें अपने दूध देते नशा उद्योग की कुछ छुट्टियां करती है। हालांकि इस छुट्टी वाले दिन कारोबार चार गुना बढ़ कर कमाई करता है। मेरे छोटे भाई सारिम ने नशे की बुराई, इससे होते नुक़सान, इससे बर्बाद होती पीढ़ियों को लेकर एक शॉर्ट फिल्म ड्रग ट्रैप को आकार दिया है। इसका साकार रूप YouTube पर आज २६ जनवरी को अवतरित हो चुका है। इसको जरूर देखें, अच्छा लगेगा।

खान अशु

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