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मनोहर पर्रिकर ने राहुल गांधी पर लगाया देश को गुमराह करने का आरोप
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मनोहर पर्रिकर ने राहुल गांधी पर लगाया देश को गुमराह करने का आरोप

manohar parrikar wrote a letter to rahul gandhi

पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने राहुल गांधी को चिट्ठी लिखी है जिसमें उन्होंने कहा है कि , ”राहुल जी आपसे मुलाकात तो हुई थी, लेकिन राफेल डील को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई. मनोहर पर्रिकर ने चिट्ठी में ऐसी बात इसलिए कही थी क्योंकि हाल ही में राहुल गांधी ने दावा किया था कि कल वो पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने उनसे राफेल डील को लेकर बात की थी. लेकिन अब पर्रिकर ने जो चिट्ठी लिखी है उससे काफी सवाल खड़े हो रहे हैं.

राहुल गांधी ने जो दावा किया था उसे लेकर पर्रिकर ने प्रेस रिलीज जारी की है. इस प्रेस रिलीज में लिखा हुआ है मनोहर पर्रिकर की राहुल गांधी से महज 5 मिनट की मुलाक़ात हुई थी. इस मुलाक़ात के दौरान उन्होंने राहुल गांधी से राफेल डील को लेकर कोई भी बात नहीं की थी. आपको बता दें कि मनोहर पर्रिकर ने इस चिट्ठी में जिक्र किया हिअ कि राहुल गांधी ने राजनीतिक फायदे के लिए देश के सामने झूठ बोला है.

आपको बता दें कि मनोहर पर्रिकर बीमारी से जूझ रहे हैं और इसी के चलते कल राहुल गांधी उनका हाल-चाल लेने उनसे मिलने पहुंचे थे जिसके बाद राहुल गांधी ने ये बयान दिया था कि पर्रिकर जी ने खुद कहा था कि डील बदलते समय पीएम मोदी ने हिंदुस्तान के रक्षा मंत्री से नहीं पूछा था.’’ राहुल ने आगे कहा, ‘’राफेल पर हमने 3-4 सवाल पूछे…बड़े सवाल नहीं थे. लेकिन चौकीदार कभी यूं देखें, कभी इधर देखें, कभी उधर देखें, कभी यहां देखें पर आंख से आंख नहीं मिला पाए.”

बता दें कि तत्कालीन यूपीए सरकार ने 600 करोड़ रुपये में एक राफेल का सौदा किया था. अब बताया जा रहा है कि सरकार को एक राफेल करीब 1600 करोड़ रुपये का पड़ेगा. राफेल डील में 50 फीसदी ऑफसेट क्लॉज का प्रावधान है. यानि इस सौदे की पचास फीसदी कीमत को राफेल बनाने वाली कंपनी दसॉल्ट को भारत में ही रक्षा और एयरो-स्पेस इंडस्ट्री में लगाना होगा.

इसके लिए दसॉल्ट कंपनी ने भारत की रिलायंस इंडस्ट्री से करार किया है. अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेंस इंडस्ट्री ने जो कंपनी बनाई है, उसके साथ मिलकर दसॉल्ट कंपनी भारत में ज्वाइंट वेंचर कर रही है. ये दोनों मिलकर भारत में नागरिक विमानों के स्पेयर पार्ट्स बनाने जा रही हैं. रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया था कि “36 राफेल आईजीए (इंटर गर्वमेंटल एग्रीमेंट) में ऑफसेट्स की मात्रा 50 फीसदी है, जिसमें योग्य उत्पादों और सेवाओं के निर्माण या रखरखाव के लिए प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण में निवेश शामिल हैं.”

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