हमारे देश के ऊपर एक गंभीर खतरा मंडरा रहा है. जिन पर इस ख़तरे से निपटने की ज़िम्मेदारी है, वे हाथ पर हाथ रखकर बैठे हैं. एक तरह से उनका साथ दे रहे हैं. हमारे सरकारी तंत्र को भी इस खतरे के बारे में पता है, लेकिन वह कुछ भी करने में असमर्थ है. दुनिया की दो प्रमुख खुफिया एजेंसियों-सीआईए और मोसाद ने मिलकर भारत को तबाह करने की घातक रणनीति बनाई है. वे आतंकवादियों की तरह आत्मघाती हमले तो नहीं करेंगी, लेकिन जो करेंगी, उसका असर बम के धमाकों से भी ज़्यादा खतरनाक होगा. उनके निशाने पर आम लोगों की जान नहीं, पूरी व्यवस्था होगी. उनकी साज़िश व्यवस्था के प्रति लोगों का विश्वास तोड़ने की है. सीआईए और मोसाद मिलकर एक ऐसे खतरनाक ऑपरेशन को अंजाम देने जा रही हैं, जिससे देश के सरकारी तंत्र और इस तंत्र को चलाने वाले लोगों पर से जनता का विश्वास खत्म हो जाएगा. इस साज़िश को अंजाम देने के लिए दोनों खुफिया एजेंसियों ने देश के 35 राजनेताओं, न्यायाधीशों, अधिकारियों, उद्योगपतियों और पत्रकारों को निशाने पर लिया है. ये देश के वे लोग हैं, जिनके व्यक्तित्व, कामकाज और विचारों पर देश की जनता यक़ीन करती है. लोगों का देश पर विश्वास मज़बूत करने में ये महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले लोग हैं. सीआईए और मोसाद ने वैसे लोगों को अपने निशाने पर ले रखा है, जो भारत में सांप्रदायिक एकता के पक्षधर और अल्पसंख्यकों के हितैषी हैं. वे हिंदू हैं, मुसलमान हैं और ईसाई भी हैं. वे भारत की गंगा-जमुनी संस्कृति के वाहक हैं
दाहिने हाथ से काम करो और बाएं को भनक तक न लगे, यह खुफिया एजेंसियों के काम करने का मूलमंत्र होता है. खुफिया एजेंसियां अपने कामों को बड़ी स़फाई से अंजाम देती हैं. जो इन एजेंसियों के लिए काम करते हैं, उन्हें इस बात की भनक नहीं होती कि वे किसके लिए काम कर रहे हैं. अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए और इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद दुनिया भर में फैली हैं. अपने दुश्मनों से निपटने के लिए उनके पास न स़िर्फ पैसे हैं, बल्कि वे अत्याधुनिक तकनीक से भी लैस हैं. आंखों के सामने सबूत होता है, लेकिन उन पर यक़ीन नहीं होता है. अमेरिका और इजरायल की खुफिया एजेंसियां इस तरह के ऑपरेशन को अंजाम देने में सबसे अव्वल हैं. इनके मंसूबे खतरनाक हैं. भारत के ही लोगों का इस्तेमाल करके दोनों खुफिया एजेंसियों ने देश के नामचीन लोगों को बेआबरू करने की पूरी तैयारी कर ली है.
सीआईए और मोसाद की योजना यह है कि इन 35 लोगों को एक-एक करके निशाने पर लिया जाए और उनके चरित्र, उनकी मर्यादा एवं उनकी साख को नेस्तनाबूद कर दिया जाए. इसके तहत इन लोगों की आपत्तिजनक तस्वीरें दिखाना, इनके ऊपर गबन का आरोप लगवाना या इनके बैंक एकाउंट में भारी-भरकम धनराशि जमा कर देना और टेक्नोलॉजी की मदद से इनका नकली एमएमएस बनाकर न्यूज़ चैनलों में बंटवाने से लेकर अन्य तमाम तरह की योजनाएं हैं, जिससे एक झटके में कोई शख्स समाज की नज़रों में गिर जाए और उसे स़फाई देने का भी मौक़ा न मिले. इसके लिए मोसाद और सीआईए देश के एक न्यूज़ चैनल, कई पत्रकारों एवं अधिकारियों को इस्तेमाल करेंगी. भारत को खोखला करने के इस ऑपरेशन में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए 20 मिलियन डॉलर खर्च करने जा रही है. हज़ारों लोगों को इस काम के लिए नियुक्त किया गया है. सीआईए के 90 एजेंट इस पूरे अभियान को दिशा और गति दे रहे हैं. इन एजेंसियों ने जिन लोगों को अपने निशाने पर लिया है, उनके फोन और इंटरनेट पर होने वाले सभी संपर्क और संवाद का रिकॉर्ड सीधे सीआईए मुख्यालय में दर्ज़ हो रहा है. व़क्त-बेव़क्त इन जानकारियों का इस्तेमाल देश में बवंडर खड़ा करने के लिए हो सकता है. इसी ऑपरेशन का नतीजा है कि अमेरिका की वेबसाइट से दुनिया भर में कांगे्रेस महासचिव राहुल गांधी से संबंधित बहुत सारी अश्लील सामग्रियां अचानक आ गईं. ऐसा ही कुछ जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के साथ हुआ, जब उनका नाम एक सेक्स स्कैंडल में घसीटा गया. यह काम भी अमेरिका की एक वेबसाइट के ज़रिए हुआ.

खबर यह भी आ रही है कि इस साज़िश में देश की खुफिया एजेंसी के कई अधिकारी भी शामिल हैं. मोसाद और सीआईए के ऐसे घिनौने ऑपरेशन से दो बातें एक साथ होंगी. पहला तो यह कि देश की जनता का विश्वास टूटेगा, दूसरा यह कि इनका शिकार बना नेता या अधिकारी फिर समाज के सामने आने की हिम्मत नहीं जुटा पाएगा.

इन लोगों को बदनाम करने का ज़िम्मा कई देशी-विदेशी कंपनियों को दिया गया है, जिनका काम है नए-नए सॉफ्टवेयर बनाकर इंटरनेट पर जासूसी करना. सीआईए और मोसाद की योजना सा़फ है कि वे भारत को भी पाकिस्तान, बांग्लादेश और उन अफ्रीकी देशों की तरह बना देना चाहती हैं, जहां की जनता का विश्वास सरकार से उठ चुका है. जैसे वहां के नेताओं, न्यायाधीशों, अधिकारियों और पत्रकारों की साख खत्म हो गई है, वैसा ही हमारे देश में होने वाला है.
इनकी योजना और तैयारी इतनी खतरनाक है कि इनके एजेंट्‌स लोगों के शयनकक्षों तक में घुसकर अपना जाल बिछा लेंगे और किसी को कानोंकान खबर भी नहीं होगी. लोगों की गतिविधियां, टेलीफोन पर बातचीत, दोस्तों और दूसरे लोगों के साथ उनका मिलना-जुलना, यानी हर बात की जानकारी इन एजेंसियों को रहती है. सबसे अ़फसोसनाक बात यह है कि भारत की गुप्तचर एजेंसियों को इन खुफिया एजेंसियों के ऑपरेशन के बारे में पूरी खबर है कि आने वाले दिनों में सीआईए और मोसाद देश के नामचीन लोगों का चरित्र हनन करने वाली हैं. फिर भी उन्हें रोकने के लिए कोई क़दम नहीं उठाया गया है. देश की खुफिया एजेंसियों ने उनके सामने घुटने टेक दिए हैं. हमारी जानकारी के अनुसार, इस साज़िश में देश की खुफिया एजेंसी के कई अधिकारी भी शामिल हैं. लेकिन कुछ खुफिया अधिकारी इतने बेबस हैं कि वे षड्‌यंत्र के खिलाफ कुछ कर नहीं सकते, क्योंकि सरकार ने उनके हाथ बांध दिए हैं. वे सिर्फ देश के खिलाफ होने वाले इस षड्‌यंत्र को देखकर आंसू बहा सकते हैं. मोसाद और सीआईए के ऐसे घिनौने ऑपरेशन से दो बातें एक साथ होंगी. पहला तो यह कि देश की जनता का विश्वास टूटेगा, दूसरा यह कि इनका शिकार बना नेता या अधिकारी फिर समाज के सामने आने की हिम्मत नहीं जुटा पाएगा. जब जनता के  विश्वास के केंद्र टूटेंगे तो देश कमज़ोर होगा, अराजकता फैलेगी और इसका फायदा उठाकर अलगाववादी शक्तियां अपने कारनामों को अंजाम दे सकेंगी. विघटनकारी तत्व देश की अखंडता पर हावी हो जाएंगे. सांप्रदायिकता को हवा दी जाएगी और यह भारत की संप्रभुता को छिन्न-भिन्न कर देगी.
आज़ादी के बाद भारत एक हुआ. मज़बूत बना. विकास की गतिविधियों और भाईचारे की ताक़त से भारत विश्वशक्ति बनने की ओर अग्रसर है. आज़ादी के बाद अमेरिका और यूरोप के कई राजनीतिक विश्लेषकों ने यह भविष्यवाणी की थी कि भारत कुछ ही सालों में टूट कर बिखर जाएगा, देश में अंतहीन दंगे और हर तऱफ अलग देश की मांग करने वाले अलगाववादी आंदोलन होंगे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. सारी भविष्यवाणियां ग़लत साबित हुईं. बाबरी मस्जिद विध्वंस और गुजरात दंगा प्रकरण के बाद से देश की जनता ने वैसी ताक़तों को सिरे से नकार दिया है, जो देश में धर्म के नाम पर घृणा फैलाने का काम करती हैं. हिंदू-मुसलमान एक साथ इस देश कीप्रगति के हिस्सेदार होंगे, यही बात सीआईए और मोसाद को खटक  रही है. भारत में अमन अमेरिका और इजरायल को गंवारा नहीं है. नए भारत की जनता का धर्मनिरपेक्ष विश्वास अब इतना मज़बूत हो चुका है कि उसने मुंबई जैसे हमले के बावजूद देश में एक भी जगह दंगे नहीं होने दिए. सांप्रदायिक संगठनों को इसका ज़रा भी फायदा नहीं उठाने दिया. जो लोग इस श्रेय के हक़दार हैं, उन्हें सीआईए और मोसाद ने अपने निशाने पर ले लिया है.
सीआईए और मोसाद भारत में चरित्र हनन का एक खतरनाक खेल खेल रही हैं.  ऐसे में देश की सरकार और मीडिया को खास सावधानी बरतने की ज़रूरत है. खासकर टेलीविज़न चैनलों को विशेष सतर्क रहना पड़ेगा, जो आपसी प्रतियोगिता की वजह से खबरों को बिना छानबीन किए दिखा देते हैं. वे खुफिया एजेंसियों की साज़िश का माध्यम बन सकते हैं. देश की जनता से भी यही उम्मीद है कि वह इस तरह की खबरों पर विश्वास करने से पहले पूरी सावधानी बरतेगी.

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  1. मोसाद और सीआईए ने हिन्ुस्तान को बर्बाद और टुकड़ों में बांटने के लिए ‘स्माइल इंडिया 2015’ प्लान बनाया है। इस प्लान के तहत आने वाले समय में देश के नामचीन लोगों के चरित्र हनन, हिन्दु-मुस्लिम दंगों और बड़े लोगों की हत्याओं का दौर शुरु किया जाएगा, जिससे पूरे देश में अफरा-तफरी का माहौल पैदा होगा। हालात 1947 सरीखे हो जाएंगे। देश को 31 भागों में बांटने की साजिश हो रही है। हालात पर काबू पाने के लिए अमेरिका भारत को गुलाम बना लेगा। आदि-आदि। यह भी कि इस काम के लिए सीआईए ने देश के बड़े-बड़े और असरदार लोगों को मुंहमांगी कीमत पर खरीद लिया है।
    उपरोक्त बातें किसी सुरेन्द्र मोहन पाठक या वेदप्रकाश शर्मा के जासूसी उपन्यास के कथानक का हिस्सा नहीं हैं। ये सब देश का पहला साप्ताहिक अखबार कहे वाला ‘चौथी दुनिया’ अपने पिछले तीन अंकों में लिखता आ रहा है। अखबार जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहा है, उससे दहशत और सिहरन पैदा होती है। इन सब बातों को लिखने के लिए अखबार का क्या उद्देश्य है, यह तो अखबार का सम्पादक जानें, हमारा सवाल यह है कि इन सब बातों का आखिर आधार क्या ? जहां तक सीआईए और मोसाद की भारत में दखअंदाजी की बात है तो उसमें नई बात भी कुछ नहीं है। यह विदित ही है कि सीआईए और मौसाद के एजेण्ट किसी-न-किसी रुप में दूसरे देशों में मौजूद रहते ही हैं। सीआईए और मोसाद ही क्यों, क्या रुस की खुफिया एजेंसी केजीबी के अस्तित्व को भारत में नकारा जा सकता है ? अखबार ने जिस तरह से भारत के भविष्य का चित्रण किया है, उससे लगता है कि अखबार का मकसद केवल सनसनी फैलाने के अलावा कुछ नहीं है। चौथी दुनिया’ की रिपोर्ट क्या ऐसी नहीं है, जिसमें यह कहा जाता है कि 2012 में दुनिया का अस्तित्व खत्म हो जाएगा ? क्या ‘चौथी दुनिया’ प्रिंट मीडिया का ‘इंडिया टीवी’ बनने की ओर बढ़ रहा है ?
    यदि किसी अखबार में इस तरह की रिपोर्ट 80 और 90 के दशक में आती तो शायद लोग उस पर यकीन भी कर लेते। क्योंकि उस दौर में भयानक साम्प्रदायिक दंगे हुए थे। राम मंदिर आंदोनल उग्र रुप लिए हुए था। मंडल कमीशन की वजह से पूरे देश में आग लगी हुई थी। इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की हत्या भी इन्हीं दशकों में हुई थीं। कोई केन्द्र सरकार स्थिरता से काम नहीं कर सकी थी। देश की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी। चन्द्रशेखर सरकार को देश का सोना गिरवी रखना पड़ा था। यह वह दौर था, जिसे कहा जा सकता था कि देश अस्थिरता की और बढ़ रहा है। 26/11 तक आतंकवादी हमलों की बाढ़ आई हुई थी। लेकिन बीता 2009 काफी हद तक पूरसकून गुजरा है। ऐसे में ‘चौथी दुनिया’ की रिपोर्टें गले से नहीं उतरती हैं। यदि रिपोर्ट को सही मान भी लिया जाए तो क्या देश में होने वाले बम धमाके और 26/11 की घटना सीआईए और मोसाद की करतूत थी ? जैसा कि कुछ लोग शक करते हैं, क्या 9/ 11 का हादसा मोसाद की देन था ? क्या साध्वी प्रज्ञा सिंह और कर्नल पुरोहित सीआईए और मोसाद के इशारे पर काम कर रहे थे ? क्या हेडली और तहव्वुर राणा सीआईए के एजेन्ट हैं ?
    ‘चौथी दुनिया’ ने इस बात को बहुत प्रमुखता से कहा है कि आने वाले समय में कुछ बड़े सम्पादकों, नेताओं और उच्च अधिकारियों का चरित्र हनन करने के लिए उनकी अश्लील सीडी बनायी जा सकती हैं। तो क्या एनडी तिवारी की अश्लील सीडी इसी सिलसिले की कड़ी है ? क्या भाजपा के बंगारु लक्षमण की रिश्वत लेते बनी सीडी भी सीआईए की करतूत थी ? सबसे बड़ा सवाल यह है कि भारत को बर्बाद करने में सीआईए और मोसाद का क्या फायदा होने वाला है ? अमेरिका तो पहले ही अफगानिस्तान और इराक में फंसा हुआ है। अफगानिस्तान और इराक जैसे कमजोर और छिन्न-भिन्न देशों पर ही उसका बस नहीं चल रहा है। अमेरिका दोनों देशों से किसी भी सूरत में बाहर आने की जुगत में लगा हुआ है। इन दोनों देशों में अमेरिका आतंवाद के खिलाफ जंग में पता नहीं कितने ट्रिलियन डालर झोंक चुका है, जिसके चलते उसकी आर्थिक स्थिति भी डांवाडोल होने लगी है। भारत बहुत बड़ा देश है। यहां पर अमेरिका की सीआईए क्या कर लेगी ?

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