पूरे चुनाव अभियान के दौरान चुप्पी बनाये रखने वाले मतदाता ने इस बार रिकॉर्ड तोड़ मतदान किया है जिसके बाद पहले से ही उलझन में चल रहे सियासी पंडित और चकरा गये हैं. दरअसल यह मध्यप्रदेश के अभी तक के चुनावी इतिहास की सबसे बड़ी वोटिंग है और खास बात ये है कि इस बार महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत पुरुषों से ज्यादा रहा है. इस बार प्रदेश में रिकॉर्ड तोड़ 74.85 फीसदी मतदान हुआ है जिसमें पुरूषों ने 75.72 प्रतिशत और महिलाओं ने 73.86 प्रतिशत मतदान किया है. ध्यान रहे 2003 में जब दिग्विजय सिंह की सत्ता बदली थी, तब उस वक्त 67 प्रतिशत मतदान हुआ था.

साल 2013 के मुकाबले इस बार वोटिंग में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी भी काबिलेगौर है, जो 2003 के 7.3 प्रतिशत के मुकाबले तो बहुत कम है जिसके बाद दिग्विजय सिंह की सरकार चली गयी थी लेकिन यह 2003 और 2013 विधानसभा चुनावों के दौरान हुये करीब दो प्रतिशत के आसपास हुई वृद्धि से ज्यादा है. ऐसे में दोनों तरफ से दावा किया जा रहा है कि 3 प्रतिशत की ज्यादा वोटिंग उनके पक्ष में हुई है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ का दावा है कि “पहले मैंने कहा था कि हम 140 सीटों पर जीत दर्ज कराएंगे परंतु अब वोटिंग के बाद जो सूचनाएं मिल रहीं हैं उसके बाद कहा जा सकता है कि इस बार चौंकाने वाले परिणाम आयेंगें”. दूसरी तरफ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह का कहना है कि “प्रदेश में जो ज्यादा मतदान हुआ है, दरअसल वो बीजेपी के पक्ष में है. लोगों में डर था कि कहीं वोट नहीं डालने से कांग्रेस को लाभ ना हो जाये”.

दिलचस्प बात ये है प्रदेश के अलग–अलग अंचलों के वोटिंग पैटर्न में भी विभिन्नता है. जैसे ग्वालियर-चंबल क्षेत्र जो कांग्रेस के ज्योतिरादित्य सिंधिया का गढ़ माना जाता है और जहां ज्यादा मतदान की उम्मीद की जा रही थी वहां इस बार बाकी क्षेत्रों के मुकाबले कम मतदान हुआ है. हालांकि पिछली बार के मुकाबले इसमें बढ़ोतरी हुई है. यहां मतदान प्रतिशत करीब 70 प्रतिशत का है जबकि मध्यक्षेत्र जो मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है वहां करीब 76.75 प्रतिशत मतदान हुआ है जिसे एंटी इंकम्बेंसी के तौर पर देखा जा सकता है. इसी तरह से महाकौशल क्षेत्र जहां कमलनाथ का प्रभाव माना जाता है वहां 74.88 प्रतिशत मतदान हुआ है जो कि पिछली बार हुये 76.94 प्रतिशत के मुकाबले कम है. मालवा निमाड़ जो कि भाजपा-संघ का गढ़ माना जाता है वहां इस बार मतदान में बहुत मामूली वृद्धि दर्ज की गयी है, यहां 2013 में 69.88 प्रतिशत मतदान हुआ था जबकि इस बार 70.16 प्रतिशत की वोटिंग दर्ज की गयी है.

इन सबके बीच प्रदेश की करीब 66 सीटें ऐसी हैं जिनपर 80 प्रतिशत से ज्यादा वोटिंग हुई है जिसमें सबसे ज्यादा  मालवा की करीब 30, महाकौशल की 15 और मध्य क्षेत्र की 17 सीटें शामिल हैं. 80 प्रतिशत से ज्यादा वोटिंग सत्ता विरोधी रुझान की ओर इशारा भी हो सकता है. इधर भाजपा के बुजुर्ग नेता बाबूलाल गौर ने कांग्रेस की सरकार आने की भविष्यवाणी करके माहौल को और गरमा दिया है .

कुल मिलाकर मध्यप्रदेश के इस बार के मतदान ने चौंकाया है और पहले से ही उलझन में चल रहे चुनावी गणित को इस कदर उलझा दिया है कि बैचेनी 11 दिसंबर तक बनी रहेगी.

चुनाव और मतगणना के लम्बे वक्त से कांग्रेस बैचेन है. इस दौरान ईवीएम मशीनें “स्ट्रांग रूम” में बंद रहेंगी लेकिन कांग्रेस इनकी पुख्ता सुरक्षा चाहती है इसलिये उसने चुनाव आयोग से प्रदेश के हर जिले के स्ट्रांग रूम एवं मतगणना स्थल पर जैमर्स लगाये जाने की मांग की है जिससे ईवीएम मशीनों को किसी भी तरह के छेड़-छाड़ से बचाया जा सके.

 

मध्यप्रदेश में क्षेत्रवार वोटिंग पैटर्न

क्षेत्र 2018 2013 2008
ग्वालियर-चंबल 69.91 66.42 64.46
बुंदेलखंड 70.51 69.43 67.43
महाकौशल 74.88 76.94 73.43
विंध्य क्षेत्र 71.01 68.77 68.89
मालवा-निमाड़ 70.16 69.88 68.54
मध्य क्षेत्र 76.75 74.86 70.43

 

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