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योगी आदित्यनाथ को भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का साथ मिला और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने योगी के सिर पर हाथ रख दिया. फिर योगी का रथ फर्राटा भरता हुआ आगे निकल गया. संघ से जुड़े एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बस्ती की उस सभा की याद दिलाई जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह मौजूद थे और उनकी मौजूदगी में यूपी का सीएम कैसा हो, योगी आदित्यनाथ जैसा हो के नारे लग रहे थे.

इन नारों से शाह के भाषण में व्यवधान हो रहा था. भाषण बीच में ही रोक कर अमित शाह ने लोगों से नारेबाजी रोकने के लिए कहा, फिर अपना भाषण शुरू किया. उस सभा के बाद अमित शाह ने कई सभाओं में यह बात कही कि योगी आदित्यनाथ का नाम आते ही लोगों में जोश भर जाता है. ऐसा बोल कर अमित शाह ने योगी का प्रभाव भी आंका.

अमित शाह ने योगी को मुख्यमंत्री के प्रबल दावेदार के रूप में स्वीकार कर लिया था और उन्होंने योगी को संकेत भी दे दिए थे. मुख्यमंत्री के चयन में संघ का सबसे अधिक नम्बर योगी को ही प्राप्त हुआ. संघ के उक्त पदाधिकारी का कहना है कि योगी को साधु के रूप में सम्मान प्राप्त है.

उनके साथ जाति जोड़ना उचित नहीं है, क्योंकि संन्यासी होने के बाद किसी व्यक्ति की कोई जाति नहीं रह जाती. इसके बावजूद योगी के राजनीतिक विरोधी और मीडिया के लोग योगी को जाति के फ्रेम में कसने की कोशिश करते हैं.

जबकि उनकी स्वीकार्यता न केवल हिन्दुओं बल्कि मुसलमानों और अन्य समुदायों में भी है. इसका उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि भाजपा की ऐतिहासिक जीत पर पिछले दिनों जब गोरखपुर में योगी आदित्यनाथ की शोभा यात्रा निकली तो मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा किए जाने वाले भव्य स्वागत के  कारण रेती के पुल पर घंटों जाम लगा रहा.

यहां तक कि योगी को प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के लिए 18 मार्च को लोग तोता-मैना शाह की मजार पर चादर चढ़ा रहे थे. संघ के उक्त पदाधिकारी का दावा है कि योगी कानून व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवा, किसानों की समस्या के  साथ-साथ बिजली-पानी जैसी मूलभूत समस्याओं के निवारण पर ध्यान देंगे.

2019 का लोकसभा चुनाव सामने है और वर्ष 2018 में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे राज्यों में भी विधानसभा चुनाव होने हैं. लिहाजा योगी और मोदी दोनों ही बेहतर माहौल बनाना चाहेंगे. तलाक के मसले पर वैसे ही मुस्लिम महिलाओं का भाजपा को समर्थन मिला है और शिया समुदाय ने भी भाजपा के पक्ष में कई स्थानों पर वोट डाले हैं.

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