arvind-Kejriwal

नई दिल्ली (ब्यूरो, चौथी दुनिया):  दिल्ली नगर निगम चुनावों में आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। दो साल में ही केजरीवाल को दिल्ली वालों ने दिल से निकाल दिया। हालांकि आम आदमी पार्टी अपनी हार स्वीकार नहीं कर रही है वो इसे ईवीएम से छेड़छाड़ का नतीजा बता रही है। लेकिन इस हार के पीछे कई कारण हैं जिसे आम आदमी पार्टी स्वीकार करने से कतरा रही है। आइए नजर डालते हैं इन कारणों पर।

नकारात्मक राजनीति: अरविंद केजरीवाल को लेकर दिल्ली की राजनीति में एक छवि तैयार हो रही है इस छवि में केजरीवाल का हर वार मोदी पर जाता है। इस तरह से आम आदमी पार्टी के लिए जनता के मन में नकारात्मक प्रभाव पड़ा।

वादों पर खरी नहीं उतरी: अरविंद केजरीवाल की सरकार ने दिल्ली के विधानसभा चुनाव में जो वादे किए थे उनमे ज्यादा तर वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं। जिसमे सीसीटीवी कैमरे और वाई-फाई का वादा प्रमुखता से हैं। लोगों के बीच नाराजगी है कि दिल्ली के सीएम दिल्ली में काम करने के बजाय दूसरे राज्यों के चुनावों में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

बीजेपी का बढ़ता दबदबा:  पिछले कुछ चुनावों में बीजेपी का प्रभाव भारतीय राजनीति में तेजी से बढ़ा है। खासकर नोटबंदी के बाद जनता ने माना है कि मोदी सरकार केंद्र में काम कर रही हैं। इसका प्रभाव पिछले 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों में भी देखने को मिला। ऐसे में अरविंद केजरीवाल का बार-बार मोदी पर निशाना साधना भी उनके खिलाफ जाता हुआ दिखाई दिया।

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