छत्तीसगढ़ : 10 लाख करोड़ का चावल घोटाला

कुछ दिन पहले रायपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके आरटीआई एक्टिविस्ट गौरीशंकर जैन और छत्तीसगढ़ वित्त निगम के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र पांडेय ने 10 लाख करोड़ रुपये के चावल खरीद में घाटे की बात कहकर हड़कंम मचा दिया था. इन दोनों एक्टिविस्टों ने आरोप लगाया कि कस्टम मिलिंग व्यवस्था में पिछले बीस सालों में सरकार […]

ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती उर्दू-अरबी-फारसी विश्‍वविद्यालय : अराजकता और अनियमितता का अड्डा

उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी सरकार पर मुस्लिम तुष्टिकरण के चाहे जितने आरोप लगें, लेकिन असलियत यह है कि अखिलेश सरकार उर्दू, अरबी एवं फारसी भाषाओं की जड़ें मजबूत नहीं होने दे रही है. वह पूर्ववर्ती मुलायम सिंह सरकार की जड़ें काट रही है. उर्दू को रोज़गारपरक और मुख्य धारा की भाषा बनाने की घोषणाएं […]

अनगिनत फाइलें खुलवाने वाले की फाइल बंद

सतीश शेट्टी का नाम आपको याद है? अगर नहीं याद है, तो इसमें आपकी गलती भी नहीं है. इतने बड़े देश में, जहां रोज सौ ख़बरें पैदा होती हैं और उतनी ही दम तोड़ देती हैं, वहां चार साल पहले सच के एक सिपाही की हत्या की घटना भला कौन याद रखना चाहेगा और क्यों? […]

दस वर्षों के वादों का हिसाब चाहिए

गत 29 जनवरी 2014 को कांग्रेस के झूठ की पोल एकबार और खुल गई जब केंद्र में कांगे्रस के नेतृत्ववाली यूपीए सरकार के प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह एवं यूपीए के साथ कांग्रेस की मुखिया सोनिया गांधी द्वारा नई दिल्ली के विज्ञान भवन में अल्पसंख्यकों के कल्याण एवं विकास के कामों की प्रशंसा के पुल को […]

सूचना का अधिकार ज़रूरी है

सूचना क़ानून को लागू हुए क़रीब पांच साल हो गए. इस दौरान सूचना क़ानून ने आम आदमी को कितना शक्तिशाली बनाया, आम आदमी कैसे सवाल पूछकर व्यवस्था में लगी दशकों पुरानी जंग छुड़ाने में सफल रहा, अपने अधिकार को पाने में सफल रहा आदि बिंदुओं से जुड़े चंद उदाहरण इस अंक में दिए जा रहे […]

लोकपाल के आगे की ज़िम्मेदारी जनता की है

महत्वपूर्ण बात यह है कि लोकपाल बिल पारित होने और क़ानून बनने के बाद इसकी जानकारी लोगों के पास कैसे जाएगी? मुझे याद है जब सूचना का अधिकार क़ानून बना था, बहुत कम लोग उसका इस्तेमाल करते थे. लोगों को ये भी पता नहीं था कि सूचना के अधिकार क़ानून का फार्म कैसे भरा जाए […]

अभी और आगे जाना है

इंदिरा आवास योजना के तहत 25,000 रुपये देने के लिए ब्लॉक डेवलपमेंट अफसर (बीडीओ) के दफ्तर में 5,000 रुपये की रिश्‍वत मांगी जा रही थी. लाचार, अनपढ़ और ग़रीब मज़लूम तीन सालों से बीडीओ के दफ्तर के चक्कर लगा रहा था. मज़लूम की मदद गांव के ही सामाजिक कार्यकर्ता अशोक सिंह ने सूचना के अधिकार […]

कहां कितना आरटीआई शुल्क

सूचना अधिकार क़ानून के तहत आवेदन शुल्क या अपील या फोटो कॉपी शुल्क कितना होगा, यह तय करने का अधिकार राज्य सरकार को दिया गया है. मतलब यह कि राज्य सरकार अपनी मर्जी से यह शुल्क तय कर सकती है. यही कारण है कि विभिन्न राज्यों में सूचना शुल्क/अपील शुल्क का प्रारूप अलग-अलग है. इस […]

जानें अपना अधिकार

कई बार आपको मांगी गई सूचना के बदले गैर जरूरी सूचना थमा दी जाती है या फिर आपके मोहल्ले या शहर की सड़क बनने के एक महीने के भीतर ही टूट जाती है. फिर सालों तक उसकी मरम्मत नहीं होती. आखिर सरकार ने तो पूरा पैसा दिया था, तब इतनी घटिया सड़क क्यों बनी? सड़कें […]

स्कूल की हालत कैसे सुधरेगी

सरकारी स्कूल इस देश के करोड़ों बच्चों के लिए किसी लाइफ लाइन से कम नहीं हैं. वजह, निजी स्कूलों का ख़र्च उठा पाना देश की उस 70 फ़ीसदी आबादी के लिए बहुत ही मुश्किल है, जो रोज़ाना 20 रुपये से कम की आमदनी पर अपना जीवन यापन करती है. ऐसे में सरकारी स्कूल ही एक […]

अगर न मिले स्कूल ड्रेस या किताब

सरकारी स्कूलों में बच्चे पढ़ने आएं, इसके लिए बहुत सारी सरकारी योजनाएं बनाई गई हैं. जैसे यूनीफॉर्म और किताबों का वितरण. उक्त योजनाएं दरअसल वैसे परिवारों को प्रोत्साहित करने के लिए हैं, जो ग़रीबी की वजह से अपने बच्चों की शिक्षा पर आने वाले ख़र्च को उठा पाने में सक्षम नहीं होते. सर्व शिक्षा अभियान […]

सूचना शुल्क : कैसे-कैसे लोक सूचना अधिकारी

सूचना के अधिकार क़ानून की धारा-7 में सूचना मांगने के  लिए शुल्क की बात की गई है. धारा-7 की उप धारा-1 में लिखा गया है कि यह फीस सरकार द्वारा निर्धारित की जाएगी. इसमें स्पष्ट किया गया है कि आवेदन करने से लेकर फोटोकॉपी आदि के लिए कितनी फीस ली जाएगी. देश के सभी राज्यों […]

आपके पत्र, आपके अनुभव और हमारी सलाह

सड़क टूट रही है मेरे इला़के में एक सड़क दो साल पहले बनी थी और अब टूट रही है. मैं इस संबंध में सूचना का अधिकार क़ानून का इस्तेमाल करना चाहता हूं. मुझे बताएं कि इस मामले में कैसे आवेदन दिया जा सकता है. -मोजिबुल्लाह खान, जनता बाजार, सारण, बिहार. 8 आप चौथी दुनिया में […]

पंचायत के ख़र्च का हिसाब मांगें

सूचना के अधिकार क़ानून के आने से अब सरपंच अपनी मर्जी नहीं चला सकता. बशर्ते, आप सरपंच और पंचायत से सवाल पूछना शुरू करें. एक पंचायत में विकास कार्यों के लिए सलाना लाखों रुपये आते हैं. इसके अलावा, विभिन्न प्रकार की सरकारी योजनाएं भी आती हैं. गाँधी जी का सपना था कि देश का विकास […]

पंचायत की भूमि और पट्टे की जानकारी

भारत की लगभग 67 फीसद जनसंख्या गांवों में ही रहती है. ग्रामीण भारत के लिए मुख्य संसाधन भूमि है. ऐसे में ग्राम पंचायत की ज़मीन का काफ़ी महत्व है. ग्राम पंचायत की ज़मीन अक्सर कई कामों के लिए पट्टे पर दी जाती है. जैसे भूमिहीनों को आवास के लिए, कृषि, खनन या वनीकरण के लिए. […]

आधारभूत बातों की जानकारी ज़रूरी

आरटीआई सूचना प्राप्त करने का एक माध्यम ही नहीं, बल्कि अधिकार है, जिसके द्वारा सूचना प्राप्त कर हम अपने अधिकारों को हासिल कर सकते हैं, लेकिन आज भी आरटीआई को लेकर शिक्षित लोगों में भी हिचक या भ्रम देखने को मिलती है. इसके पीछे मूल कारण जागरुकता का अभाव है. सबसे पहले आरटीआई आवेदक को […]

जीने का सशक्त हथियार

आख़िर क्या है सूचना का अधिकार क़ानून? कैसे बदल सकता है यह क़ानून आपकी ज़िंदगी? इस क़ानून के प्रयोग से आप भ्रष्ट अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को कैसे सिखा सकता हैं सबक़? घबराएं नहीं, क्योंकि चौथी दुनिया अब आपको देगा एक ऐसा सशक्त हथियार, जिसका प्रयोग कर आप भ्रष्ट और निकम्मे कर्मचारियों का पसीना छु़डा सकते […]

छात्रवृत्ति न मिले, तो क्या करें?

सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को छात्रवृत्ति दी जाती है, ताकि ऐसे छात्र, जिनके परिवार की माली हालत अच्छी नहीं है, उनकी पढ़ाई-लिखाई में कोई दिक्कत न आए. इसके लिए बाक़ायदा नियम-क़ानून भी बनाए गए हैं कि कौन इस छात्रवृत्ति का हक़दार होगा और कौन नहीं. इसके बावजूद, कई बार ऐसी ख़बरें भी आती […]

क्या है विधान मंडल के विशेषाधिकार का हनन

इस बार हम बात करेंगे संसदीय विशेषाधिकार के बारे में. कैसे और कब फंसता है संसदीय विशेषाधिकार का पेंच? सबसे पहले एक उदाहरण से इस मामले को समझने की कोशिश करते हैं. अमेरिका से एटमी डील के दौरान यूपीए सरकार को जब सदन में विश्‍वास मत हासिल करना था, उसके कुछ घंटे पहले सदन में […]

सूचना अधिकार : बीपीएल चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता कैसे आएगी?

इस अंक में हम एक ऐसी समस्या पर बात कर रहे हैं, जो सीधे-सीधे ग़रीबों के अधिकारों और विकास से जुड़ी हुई है, यानी बीपीएल सूची, जिसके आधार पर ग़रीबों को बहुत-सी सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सकता है, मसलन सस्ता राशन, इंदिरा आवास या फिर पेंशन. जिस देश की अधिकांश आबादी ग़रीब हो, वहां […]

भारत का दूषित प्रजातंत्र

राजनीतिक दलों का वर्चस्व इतना मज़बूत है कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पूरी तरह से पार्टी तंत्र में तब्दील हो चुकी है. हालत यह है कि चुनाव अब महज़ खानापूर्ति बनकर रह गए हैं. हर राजनीतिक दल अपनी मूल विचारधारा को त्याग कर येन केन प्रकारेण सत्ता पर क़ाबिज़ होना चाहता है. दरअसल, भारत का […]

जानने का अधिकार, जीने का अधिकार

आख़िर क्या है सूचना का अधिकार क़ानून, कैसे आप इस क़ानून का इस्तेमाल कर बदल सकते हैं अपनी ज़िंदगी और सिखा सकते हैं भ्रष्ट अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को सबक़. चौथी दुनिया आपको बताएगा कि कैसे करें इस क़ानून का इस्तेमाल और कैसे बनाएं आरटीआई आवेदन. अगर आपको इस क़ानून के इस्तेमाल से संबंधित कोई परेशानी […]