नोटबंदी का जिन्न एक बार फिर बाहर, बैंक अमित शाह का पैसा किसका!

नोटबंदी लागू करने का उद्देश्य आतंकवाद, नकली नोट और कालाधन पर हमला बताया गया था. लेकिन जल्द ही यह पता चल गया कि इनमें से कोई भी उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता. क्योंकि नोटबंदी के कुछ दिनों बाद ही कश्मीर में दो आतंकी मारे गए थे, जिनके पास से दो हज़ार के नए नोट बरामद […]

ठगी करने वाला बैंक और बचाने वाले मंत्री

बॉम्बे मर्केंटाइल बैंक की जालसाजियां देशभर में कुख्यात हैं. शेयर घोटाले से लेकर तरह-तरह के फ्रॉड में यह बैंक लंबे अर्से से लिप्त रहा है. केंद्रीय मंत्री के साथ-साथ दूसरे दल के कई नेता और नौकरशाह बैंक को संरक्षण देते हैं. भ्रष्टाचार के खिलाफ सौ-सौ कसमें खाकर सत्ता में आई भाजपा की सरकार बैंक की […]

कंपनियों को नीलाम करने में देश का हित नहीं है

देश में उद्योगों और बैंकों की स्थिति बहुत गंभीर हो गई है. पिछले दिनों पंजाब नेशनल बैंक ने घोषणा की कि उनके 11 हजार करोड़ रुपए खतरे में पड़ गए हैं. ये पैसे बैंक ने एक व्यवसायी को दिए थे. अब ये पता नहीं चल रहा है कि बैंक को अचानक यह पता चला या […]

संपत्ति में इतनी ज्यादा बढ़ोत्तरी कैसे

आम आदमी के खाते में चंद पैसों की आमद भी बैंकों के लिए तहकीकात का कारण बन जाती है, लेकिन हमारे माननीयों की संपत्ति में हो रही बेतहाशा वृद्धि खबरों में भी जगह नहीं पाती. हालांकि संपत्ति में बढ़ोतरी नितांत निजी मामला है, लेकिन अगर किसी जनप्रतिनिधि की संपत्ति 17 लाख 68 हजार से बढ़कर […]

नीरव मोदी का कुनबा

फैक्ट फाइल 29 जनवरी को हुई 11 हज़ार करोड़ के घोटाले की शिकायत 31 जनवरी को 6 लोगों के खिलाफ ए़फआईआर दर्ज़ नीरव जैसे 9339 कर्ज़दारों पर बकाया है 11 हज़ार करोड़ एनपीए के कारण बंद होने की कगार पर हैं 9 सरकारी बैंक 10 साल में बैंकों ने 6 लाख करोड़ का लोन राइट […]

कॉर्पोरेट बनाम किसान, सरकार की प्राथमिकता कौन

भारत में सरकारी क्षेत्र के बैंकों का एनपीए (यानि नॉन-परफॉर्मिंग असेट) एक ऐसा मुद्दा है, जो सरकारी तंत्र के लाख छुपाने के बावजूद हमेशा सुर्ख़ियों में बना रहता है. कभी विजय माल्या के बहाने तो कभी क़र्ज़ के बोझ तले दबे किसानों की आत्महत्या के कारण. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में पिछले 25 वर्षों […]

सरकार की प्राथमिकता में नहीं हैं किसान

किसानों का सवाल पिछले 60 साल में हर गुजरते दिन के साथ महत्वपूर्ण होता चला गया है, लेकिन किसी सरकार ने किसानों की समस्याओं को कभी अपनी प्राथमिकता में नहीं रखा. लोग ये मानते थे कि किसान कभी संगठित नहीं हो सकते हैं. किसान कभी अपनी मांगों को लेकर जोर नहीं दे सकते हैं, दबाव […]

बैंकों की ओर से नए साल का तोहफा, एसबीआई समेत तीन बैंकों ने सस्ते किए ब्याज दर

देश के तीन बड़े बैंकों एसबीआई, पंजाब नेशनल बैंक और यूनियन बैंक ने अपने लोन सस्ते कर फीसदी की कटौती की है, जिसके बाद अब यह 8.45 फीसदी होगा. वहीं यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने एमसीएलआर को 0.65 फीसदी घटाकर 8.65 फीसदी कर दिया है. नई सभी दरें दिए हैं. एसबीआई ने बेंचमार्क लेंडिंग रेट […]

लेवी की करोड़ों की राशि ठिकाने लगाने में लगे नक्सली

बिहार-झारखण्ड के नक्सल प्रभावित सीमावर्ती क्षेत्रों के ग्रामीण इन दिनों काफी दहशत में हैं. सक्रिय नक्सली संगठन लेवी में वसूले गए करोड़ों के हजार व पांच सौ के नोट ग्रामीणों के सहारे एक्सचेंज कराने में लगे हैं. गया जिले के बांके बाजार एवं गुरारू क्षेत्र में रुपया बदलवाने आए प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के […]

जितेंद्र सिंह जी यह ग़ुस्सा पौरुषहीन है

हम अपने को उस भीड़ में चाह कर भी शामिल नहीं कर पाते, जो भीड़ विरुदावली गाती है, जो भीड़ चंदबर दाई की श्रेणी की है और जो भीड़ ताकतवर और सत्ताधारियों के कशीदे पढ़ती है. दरअसल हमारे दिमाग में पत्रकारिता के उस सिद्धांत का फितूर भरा है कि किसी भी पत्रकार को विरुदावली गाने […]

पूंजीपतियों ने लूट लिया देश का धन : बैंकों की मिलीभगत से हड़प लिए पांच लाख करोड़ रुपये : असली राष्ट्रद्रोही

मीडिया, राजनीति और कमोबेश पूरा समाज आजकल सांसद व कारोबारी विजय माल्या के 9 हजार करोड़ रुपये के कर्ज को लेकर चर्चा कर रहा है. चर्चा इस बात की भी है कि बैंकों का लाखों करोड़ रुपये का कर्ज डूब चुका है. लेकिन, इस सब के बीच यह जानकारी शायद ही बाहर आ पाती है […]

चौथी दुनिया ने उजागर किया था फ़र्जी ऋृण का मामला

फर्जी एलपीसी (भूमि स्वामित्व प्रमाण पत्र) सहित अन्य फर्जी कागजातों के आधार पर विभिन्न बैंकों को करोड़ों रुपये की चपत लगाने वाले संगठित गिरोह के कुछ सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद भी पुलिस मुख्य सरगना को दबोच नहीं सकी है. कई तरह के फर्जी कागजात और विभिन्न बैंकों की मुहर सहित पुलिस की गिरफ्त में […]