sharabएटा जिले के अलीगंज कस्बे में जहरीली शराब से हुई मौत का आंकड़ा 44 पार कर गया है. मृतकों में अलीगंज क्षेत्र के 36 व फर्रुखाबाद के आठ लोग शामिल हैं. जहरीली शराब पीकर जिंदगी व मौत के बीच झूल रहे पांच दर्जन से अधिक लोगों का उपचार सैफई, आगरा, फर्रुखाबाद, अलीगंज के चिकित्सालयों में चल रहा है. अलीगंज की गलियों में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है. जिनका उपचार चल रहा है, उनके परिजन सहमे हुए हैं कि मौत की खबर फिर न आ जाए. सरकार व प्रशासन ने घटना के पांच दिन बाद भी शातिराना चुप्पी साध रखी है. जहरीली शराब के रूप में मौत बेचने वाले शराब माफियाओं की गिरफ्तारी में पुलिस नाकाम रही है. पुलिस ने दिखाने के लिए अलीगंज के मोहल्ला काजी में अवैध शराब बेचने वाले श्रीपाल को गिरफ्तार किया है. लेकिन असलियत में मामले की लीपापोती में जुटी है. पीड़ितों के परिजनों के सवाल अभी भी अनसुलझे हैं कि आखिर जहरीली शराब आई कहां से? इस नेटवर्क में कौन लोग शामिल हैं? सत्ता मृतकों के परिजनों को मुआवजा देकर परिवार पर टूटे कहर को भूल जाने और धंधेबाजों पर पर्दा डालने की जुगत में है.
गत 10 वर्षों में एटा, कासगंज, फर्रुखाबाद व मैनपुरी समेत आगरा जोन के कई जनपदों में अवैध शराब का धंधा पुलिस सरंक्षण में कुटीर उद्योग के रूप में फैल चुका है. सत्ता व प्रशासन की नाक के नीचे भारत के भविष्य युवा जहरीली शराब पीकर मौत के मुंह में जा रहे हैं. शासन व प्रशासन को कभी इसकी सुध ही नहीं आई कि इस धंधे पर प्रहार कर लोगों को मौत के मुंह में जाने से बचा सके. आगरा व कासगंज में जहरीली शराब से हुई मौत ने इस बात के संकेत दो वर्ष पूर्व ही दे दिए थे कि जहरीली शराब से अभी और लोग मरेंगे. प्रशासन व पुलिस ने गंभीर पहल की होती तो शायद अलीगंज की घटना न होती. अलीगंज में ही नौ जुलाई 2001 को बंजारा जाति के 10 लोगों की जहरीली शराब पीने से मौत हुई थी. उसमें भी पुलिस ने लीपापोती का ही काम किया था.
कासगंज जनपद के नगला भंडारी में दो वर्ष पूर्व आयोजित भंडारे में हुए जहरीली शराब के वितरण के बाद तीन लोगों की मौत हुई और एक दर्जन बीमार हुए थे तो पुलिस ने उसमें भी लीपापोती ही की. नगला भंडारी में जहरीली शराब से हुई मौत के मामले में पुलिस ने भाजपा नेता के पुत्र का नाम भी लिया और एफआईआर भी हुई. लेकिन वरिष्ठ नेताओं के दबाव के चलते पुलिस ने इसमें भी लीपापोती कर दी.
गत 16 जुलाई को अलीगंज में जहरीली शराब पीकर एक ही दिन में हुई 17 मौत से कोहराम मचा और मौत का आंकड़ा 19 जुलाई तक 44 तक पहुंच चुका है. कस्बे में जिस जगह अवैध शराब बेची जा रही थी वह कोतवाली के निकट ही है. जहरीली शराब से हुई मौत से घबराई सरकार व आलाधिकारियों ने एटा के जिला आबकारी अधिकारी, अलीगंज के क्षेत्राधिकारी व थाना प्रभारी समेत कुछ पुलिस कर्मियों से सस्पेंड कर यह दिखाने की कोशिश जरूर की कि वह दोषियों पर कार्रवाई करेगी.आगरा जोन के आईजी दुर्गा चरण मिश्र ने एटा पहुंचकर पत्रकारों से कहा कि पुलिस आगरा जोन के सभी जनपदों में शराब माफियाओं पर कार्रवाई करेगी. उसके बाद पुलिस सक्रिय भी हुई तो कच्ची शराब खींचने वाले लोगों पर कार्रवाई की. एटा में कच्ची शराब का धंधा करने वाले 53 लोगों की गिरफ्तारी भी हुई. लेकिन पुलिस जानती है कि असली दोषी कौन लोग हैं. जनता भी जानती है. मृतकों के परिजन भी जानते हैं. वे पुलिस की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं. अलीगंज व आस-पास के क्षेत्रों में शराब माफियाओं के विरुद्ध आक्रोश है. पुलिस ने जिस श्रीपाल को जहरीली शराब बेचने के मामले में गिरफ्तार किया है, उसका कहना है कि उसके पास शराब मैनपुरी से आई थी. मैनपुरी के रहने वाले अनिल (निवासी गोकिलपुर) ने उसे शराब बेची थी. मैनपुरी पुलिस ने अनिल को गिरफ्तार किया और उसे जेल भेज दिया. मैनपुरी पुलिस का कहना है कि श्रीपाल व अनिल के बीच कोई संबंध ही नहीं हैं. अनिल की न तो श्रीपाल से रिश्तेदारी है और न ही कोई कारोबारी रिश्ता है. लेकिन पुलिस इस बात का जवाब नहीं दे पा रही है कि शराब आखिर आई कहां से. सूत्रों की मानें तो श्रीपाल के पास टैंकर में भरकर मिथाइल अल्कोहल मैनपुरी से ही आया था. जिससे शराब बनी और एटा के बॉर्डर वाले क्षेत्रों में बेची गई. यही शराब लोगों की मौत की वजह बनी. अलीगंज क्षेत्र में लोग सत्ता, पुलिस व शराब माफिया के खौफ से डरे सहमे हैं और कुछ भी बोलने से बच रहे हैं. सरकार, आला अधिकारी व पुलिस मामले में कार्रवाई के नाम पर केवल स्वांग रच रहे हैं. अलीगंज क्षेत्र में ही डेढ़ सौ गांवों में अवैध शराब का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है. गत वर्षों में पुलिस ने टपुआ गांव को ही टारगेट कर जो कार्रवाई की उससे भी अलीगंज के अन्य क्षेत्रों में अवैध शराब का कारोबार फैला. टपुआ गांव के आस-पास बिकने वाली अवैध शराब गत 40 वर्षों से बिक रही है. टपुआ गांव के शराब माफियाओं को भी सत्ता का संरक्षण वर्षों तक मिलता रहा. शराब माफियाओं ने हरियाणा व दिल्ली से तस्करी कर लाई गई शराब को बेचना शुरू कर दिया. इसके साथ ही हरियाणा की शराब के नाम पर मिथाइल अल्कोहल से बनी शराब भी खूब बिक रही है. इस काम में पुलिस ने माफियाओं को संरक्षण दे रखा है.

डेढ़ सौ गांवों में होती है अवैध शराब की बिक्री 

कासगंज जनपद की काली नदी, हजारा नहर व कटरी क्षेत्र के डेढ़ सौ गावों में अवैध शराब का कारोबार होता है. त्योहारों व विवाह समारोहों के दौरान राजस्थान, हरियाणा व दिल्ली से तस्करी होकर आने वाली शराब भी धड़ल्ले से बेची जाती है. इस शराब में नशीली दवाओं व कैमिकल का प्रयोग शराब माफिया धड़ल्ले से करते हैं. शहर कोतवाली के भैंसोरा व सतावी महादेवा व काली नदी के आस-पास के गांव कच्ची शराब बनाने के लिए मशहूर हैं. काली नदी के किनारे बसे एटा व मैनपुरी के गांवों में कच्ची शराब बनाने का कारोबार चलता है. इन गांवों तक पुलिस की पहुंच नहीं हो पाती इसलिए लोगों को कोई डर भी नहीं रहता. सोरों के नगला लक्ष्मी, सूखा नगला, पचलाना, सियपुर, खड़ैया आदि गांवों में शराब की बिक्री होती है. पटियाली के नगला हीरा, घौसगंज, नगला भिटी, नगला मुंशी, नगला देवी, नगला चतुरी, नगल जयकिशन, नगला रौकरी, नगला भटमई, नगरिया, उस्मानपुर, दीवान नगर, अलीपुर दादर, अजीजपुर, चाकरपुर, नगला रगी, नगला बौड़ार, गंगनपुर, सनौढ़ी, नगला दरका, नगला हंसी, नगला गुलाबी, नगला खड़ऊआ आदि हैं. इसी तरह अमांपुर क्षेत्र के भृगवासिनी, जाटऊ, अशोकपुर, बरसौड़ा,नगला पौपी, कुचलपुर, महदवा, नगला सीडर, नगला तालई, महेशपुर, जारई, नगलाबरी आदि गांवों में कच्ची शराब बनाने का कारोबार होता है.

विपक्ष की उंगली सपा विधायक पर

एटा के अलीगंज में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद राजनीति शुरू हो गई है. विरोधियों के निशाने पर सपा विधायक रामेश्‍वर सिंह हैं. रामेश्‍वर सिंह यादव का कहना है कि भाजपा लाशों पर राजनीति कर रही है. शराब से मौत के बाद भाजपा का प्रतिनिधिमंडल अलीगंज पहुंचा और पीड़ित परिवारों से मिल कर उन्हें ढाढस बंधाया. भाजपा के प्रतिनिधिमंडल में शामिल प्रदेश महामंत्री पंकज सिंह ने जहरीली शराब से हुई मौत की जांच सीबीआई से कराने की मांग की. पंकज सिंह ने आरोप लगाया कि अवैध शराब का कारोबार सरकार, विधायक व पुलिस प्रशासन की मदद से चल रहा है. सत्ता का संरक्षण होने की वजह से पुलिस अधिकारी शराब माफियाओं पर कार्रवाई करने से डर रहे हैं. कांग्रेस पार्टी का प्रतिनिधिमंडल भी अलीगंज पहुंचा और उन्होंने पीड़ित परिवारों से मिलकर शराब माफियाओं के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की. पूर्व मंत्री अवधपाल सिंह ने भी इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है. बहुजन समाज पार्टी ने भी इस मामले की न्यायिक जांच की मांग की है.

मंत्री जी शराब बिकवाते ही क्यों हो?

पीड़ित परिवार आबकारी मंत्री से सवाल पूछ रहे हैं कि जब शराब से लोग मर रहे हैं तो शराब बिकने की इजाजत ही क्यों दी जा रही है? उत्तर प्रदेश सरकार के आबकारी मंत्री राम करन आर्य पीड़ित परिवारों से मिलने के बाद जब लोगों से शराब न पीने की अपील कर रहे थे तो पीड़ित परिवार के आक्रोशित परिजनों ने मंत्री से सवाल पूछा कि मंत्री जी शराब बिकवाते ही क्यों हैं? आबकारी मंत्री इस सवाल का कोई जवाब नहीं दे पाए और उन्होंने चुप्पी साध ली. सपा विधायक पर शराब माफियाओं को संरक्षण देने के आरोप का आबकारी मंत्री ने यह कहकर जवाब दिया कि विरोधियों का काम ही आरोप लगाना है. जहरीली शराब से हुई मौत के बाद लोगों में जर्बदस्त आक्रोश है. सरकार व पुलिस को लोगों के कई सवालों के जवाब देने होंगे, जिसमें जहरीली शराब बिक्री के नेटवर्क में कौन शराब माफिया शामिल हैं और उन्हें किन लोगों का संरक्षण मिला हुआ था. पीड़ित परिवारों की महिलाओं ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषी लोगों को फांसी की सजा दी जाए. जहरीली शराब से जो 44 लोग मरे हैं उनमें अधिकांश युवा हैं.

शराबबंदी के समर्थन में उतरे लोग

एटा के अलीगंज में जहरीली शराब से हुई मौत के बाद प्रदेश में पूर्ण शराबबंदी की मांग उठने लगी है. समग्र विकास परिषद संस्था ने एटा के डीएम को ज्ञापन सौंपकर प्रदेश में शराब की बिक्री पर रोक लगाए जाने की मांग की है. परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिल यादव, तेज सिंह वर्मा व अन्य कार्यकर्ताओं ने डीएम से मांग की है कि शराब की बिक्री फौरन बंद की जाए. जहरीली शराब से हुई 44 मौत देख कर आम लोग भी कहने लगे हैं कि बिहार में लागू पूर्ण शराबबंदी की कामयाबी को देखते हुए उसे उत्तर प्रदेश में भी लागू किया जाना चाहिए.

नोटिस और कार्रवाई के बीच धंधा भी जारी है

एटा में जहरीली शराब से हुई मौतों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी संज्ञान लेने की औपचारिकता निभाई और प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक से जवाब तलब किया है. आयोग ने स्पष्ट तौर पर माना है कि इस मामले में पुलिस और आबकारी विभाग के कुछ अधिकारियों के निलंबन से यह जाहिर होता है कि सरकारी मशीनरी की लापरवाही के कारण इतना बड़ा हादसा हुआ. आयोग ने इस मामले में राज्य के मुख्य सचिव दीपक सिंघल और पुलिस महानिदेशक जावीद अहमद को नोटिस जारी कर चार हफ्ते के भीतर जवाब देने को कहा है. आयोग का कहना है कि एटा और फर्रुखाबाद में जहरीली शराब पीने से लोगों की मौत के बाद बरेली, बिजनौर, कानपुर देहात, इलाहाबाद, मऊ, कुशीनगर और सोनभद्र जिलों में अनेक स्थानों पर मारे गए छापों में बड़े पैमाने पर अवैध रूप से बनाई गई शराब और उसे बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री बरामद की गई है. लिहाजा, इसके फैलने का अंदेशा है. जहरीली शराब मामले में कार्रवाई के बारे में शासन ने बताया है कि अलीगंज थाने के प्रभारी मुकेश कुमार सहित कुल सात पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है. एटा के जिला आबकारी अधिकारी, आबकारी निरीक्षक एवं आबकारी सिपाही को पहले ही निलंबित कर दिया गया था. पहले मृतकों के परिजनों को सरकार की तरफ से दो-दो लाख मुआवजा दिए जाने की बात कही गई, बाद में संवेदनशीलता दिखाते हुए इसे 5 लाख रुपये कर दिया गया. प्रदेश में अवैध शराब कारोबारियों के खिलाफ चलाए गए अभियान में 1585 मुकदमे दर्ज कर 1621 लोगों को गिरफ्तार किया गया. 36121 लीटर अवैध शराब भी जब्त की गई.इस अभियान और सतर्कता के दिखावे के बीच एटा में ही नौसादर और मिथाइल अल्कोहल से शराब बनना और बिकना जारी है.

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