मुंबई में स्तिथ भगवान गणेश का सिद्धिविनायक मंदिर सबसे समृद्ध और विशाल मंदिरों में से एक माना जाता है. बता दें कि गणेश जी की जिन प्रतिमाओं की सूड़ दाईं ओर मुड़ी होती है, वे सिद्घपीठ से जुड़ी होती हैं और उनके मंदिर सिद्धिविनायक मंदिर कहलाते हैं. सिद्धिविनायक गणेश जी का सबसे लोकप्रिय रूप है. हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक यहां दर्शन के लिए आते हैं और यह मंदिर सबसे अमीर मंदिरों में भी शामिल है. यहां रोजाना करीब 25 हजार से लेकर 2 लाख रुपए तक का चढ़ावा चढ़ाया जाता है. यहां पर काले पत्थर पर बने हुए गणेश भगवान की मूर्ति जो की करीब 200 साल पुरानी है पर सबसे ज्यादा दान चढ़ाया जाता है. मंदिर की सलाना कमाई 48 करोड़ रुपए से 125 करोड़ रुपए के बीच है.

मंदिर की बनावट:-
मुंबई के प्रभादेवी इलाके में स्थित इस मंदिर का निर्माण 19 नवंबर 1801 में हुआ था. वर्तमान में सिद्धिविनायक मंदिर में 5 मंजिला इमारत है. जहां प्रवचन ग्रह से लेकर गणेश संग्रहालय, गणेश विद्यापीठ के अलावा दूसरी मंजिल पर गरीब के मुफ्त इलाज के लिए अस्पताल भी है. इस मंजिल पर रसोईघर भी है. जहां से लिफ्ट सीधे गर्भग्रह में आती है. गणपति पूजन के लिए प्रसाद और लड्डू इसी रास्ते से लाया जाता है. मंदिर में लकड़ी के दरवाजे पर अष्टविनायक को प्रतिबिंबित किया गया है. मंदिर के अंदर सोने के लेप से सजी छतें हैं.

मंदिर का इतिहास:-
मान्यता है कि जब सृष्टि की रचना करते समय भगवान विष्णु को नींद आ गई, तब भगवान विष्णु के कानों से दो दैत्य मधु व कैटभ बाहर आ गए. इन दोनों दैत्यों ने बाहर आते ही उत्पात मचाया और देवताओं को परेशान करने लगे. दैत्यों के आंतक से मुक्ति पाने हेतु देवताओं ने श्रीविष्णु की शरण ली. तब विष्णु शयन से जागे और दैत्यों को मारने की कोशिश की लेकिन वह इस कार्य में असफल रहे. तब भगवान विष्णु ने श्री गणेश का आह्वान किया, जिससे गणेश जी प्रसन्न हुए और दैत्यों का संहार हुआ. इस कार्य के उपरांत भगवान विष्णु ने पर्वत के शिखर पर मंदिर का निर्माण किया तथा भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित की. तभी से यह स्थल ‘सिद्धटेक’ नाम से भी जाना जाता है.

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