शशिकला को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलती नहीं दिख रही है. सरेंडर के लिए समय मांगे जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त आपत्ति जताते हुए कहा कि फैसले में एक शब्द का भी हेर-फेर नहीं होगा. फैसले में सबकुछ कहा जा चुका है. शशिकला के वकील को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपको तुरंत का मतलब तो पता होगा. शशिकला ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए सरेंडर के लिए कुछ समय की मांग की थी.

वरिष्ठ वकील केटीएस तुलसी ने समय दिए जाने की अपील की थी. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को शशिकला को आय से अधिक संपत्ति के मामले में दोषी करार दिया था. यह फैसला 21 साल से चल रहा था, जिस पर महज आठ मिनट में कोर्ट ने फैसला पढ़कर सुना दिया. हाईकोर्ट के फैसले को खारिज कर सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के 4 साल कैद के फैसले का बरकरार रखा. उन पर 10 करोड़ का जुर्माना भी लगाया गया है.

इस फैसले के बाद शशिकला का राजनीतिक सफर शुरू होने से पहले ही खत्म हो गया है. चार साल की सजा पूरी होने के बाद वे अगले 6 साल तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगी. इससे पहले कर्नाटक हाईकोर्ट ने इस मामले में शशिकला और जयललिता को बरी कर दिया था. दोनों पर आरोप था कि उन्होंने बेहिसाब संपत्ति को ठिकाने लगाने के लिए कई फर्जी कंपनियां बनाईं. ये कंपनियां जयललिता के घर से ही चल रही थीं. कोर्ट ने कहा कि चूंकि जयललिता की मौत हो चुकी है, इसलिए उनके खिलाफ मामला खत्म हो जाता है.

 

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