bihar-assemblyबिहार में सत्ता की हनक में जनप्रतिनिधि और उनके रिश्तेदार बेलगाम हो गए हैं. जनप्रतिनिधि जनता के वोट से जीतकर विधानसभा और विधान परिषद तो पहुंच जाते हैं, लेकिन पावर और पैसा आने के बाद जब सत्ता से जुड़ जाते हैं तो ये भूल जाते हैं कि वह जनता के प्रतिनिधि हैं जनता की सेवा मेरा धर्म है. सत्ता के नशे में चूर यह जनप्रतिनिधि जनता के सेवक बनना तो दूर अपने आप को कानून से भी ऊपर समझने लगते हैं. यही कारण है कि ऐसे जनप्रतिनिधि कानून को भी ठेंगा दिखाने से बाज नहीं आते हैं. वहीं दूसरी ओर सत्ता से जुड़े होने के सवाल पर कोई मामला सामने आता है तो पुलिस-प्रशासन के वरीय अधिकारी भी ऐसे जनप्रतिनिधियों पर हाथ डालने से कतराते  हैं. लेकिन जब जनसमूह का आक्रोश और उबाल बढ़ने लगता है तो पुलिस-प्रशासन भी ऐसे मामले में कार्रवाई करने को बाध्य होता है. यह अलग बात है कि सत्ता से जुड़े जनप्रतिनिधयों को कभी-कभी राज्य के मुखिया के इशारे पर थोड़ी बहुत राहत भी मिल जाती है. लेकिन जब जन आक्रोश सत्ता को परेशान करने लगता है, तब सत्ता से जुड़े लोग अपने लोगों पर भी कानूनी कार्रवाई करने का सर्वाजनिक बयान देने पर बाध्य होते हैं.

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बिहार में विधानसभा चुनाव के बाद नए गठबंधन की सरकार बनी. लेकिन अभी छह महीने भी नहीं हुए कि सत्ता से जुड़े विधायकों की हरकतों से पूरा प्रदेश परेशान हो गया है. एक मामला ठंडा नहीं होता है कि दूसरा मामला सामने आ जाता है. जदयू विधायक सरफराज आलम ट्रेन में बिना टिकट सफर करते और शराब के नशे में महिला से छेड़खानी करते पकड़े जाते हैं, तो वहीं नवादा के राजद विधायक राजवल्लभ यादव नाबालिग लड़की से रेप के मामले में पकड़े जाते हैं. पटना जिले के एक विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस विधायक सिद्धार्थ लड़की भगाकर अपने ड्राइवर से जबरन शादी कराने के मामले में चर्चा में आते हैं. वहीं पूर्णिया की जदयू विधायक वीमा भारती अपने आरोपी पति को थाने से भगाने के मामले में चर्चा में आती हैं. इस मामले में पूर्णिया के जदयू सांसद संतोष कुशवाहा का भी नाम आया था. हाल ही के दिनों में जदयू के विधायक गोपाल मंडल एक डीएसपी को गंगा नदी में फेंक देने तथा सार्वजनिक रूप से नर्तकियों के साथ डांस करने और शराब पर बयानबाजी करने के मामले में चर्चा में आए थे. गया जिले के अतरी विधानसभा क्षेत्र के राजद विधायक कुंती देवी के पुत्र रंजीत यादव प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बथानी के चिकित्सक की पिटाई करने के मामले में जेल में बंद हैं.

पूरे प्रदेश में अभी इन घटनाओं की चर्चा चली रही थी कि 7 मई 2016 को गया में विधान पार्षद मनोरमा देवी और पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष बिंदेश्‍वरी प्रसाद ऊर्फ बिंदी यादव के पुत्र रॉकी यादव ने एक व्यवसायी पुत्र की इसलिए गोली मार कर हत्या कर दी, क्योंकि उसने रॉकी यादव के लैंड रोवर को साइड नहीं दी. लेकिन इन सभी मामलों की जड़ में एक ही बात महत्वपूर्ण है कि पैसा और पावर के साथ सत्ता के साथ जुड़े प्रतिनिधियों और उनके परिजनों को यह अहसास होता है कि वह समाज में सबसे ऊपर हो गए हैं और कानून उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता. लेकिन गया की घटना ने पूरे प्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है. इस मामले में यदि बिहार सरकार त्वरित कार्रवाई करते हुए व्यवसायी पुत्र के हत्यारे को त्वरित सुनवाई के माध्यम से सजा नहीं दिलाती है तो एक बार पुन:  राज्य से व्यवसायियों का पलायन शुरू हो जाएगा. गया के पाइप व्यवसायी श्यामसुंदर सचदेवा का पुत्र आदित्य सचदेवा अपने पांच साथियों के साथ स्विफ्ट कार से घर लौट रहा था.

उसके पीछे एमएलसी मनोरमा देवी के अंगरक्षक के साथ रॉकी अपनी 1.30 करोड़ की लैंड रोवर से आ रहा था. कार को साईड नहीं दिए जाने से गुुस्साए एमएलसी के पुत्र राकेश रंजन यादव ऊर्फ रॉकी ने गया सेंट्रल जेल के पीछे वाली सड़क पर आदित्य की कार को ओवरटेक कर रुकवाई और अपने पिस्टल से हवा में फायरिंग की. आदित्य व उसके दोस्तों से मारपीट भी की. पांचों युवकों ने माफी भी मांगी और डरकर गाड़ी से भागने लगे. इसी दौरान रॉकी ने पीछे से गोली चला दी जो कार के शीशे को पार करते हुए आदित्य को जा लगी. उसके बाद आदित्य को लेकर उसके साथी मेडिकल कॉलेज पहुंचे जहां चिकित्सकों ने आदित्य को मृत घोषित कर दिया. इस घटना की सूचना जैसे ही पुलिस-प्रशासन को लगी उनके हाथ-पांव फूलने लगे. लेकिन मामला जैसे ही पता लगा कि व्यवसायी से जुड़ा है और बवाल बहुत अधिक हो सकता है, तब पुलिस ने देर रात गया के एपी कॉलेनी स्थित एमएलसी मनोरमा देवी के आवास पर छापेमारी की. जहां से हत्या में उपयोग की गई लैंड रोवर और अंग रक्षक राजेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया. लेकिन घटना के बाद गया पुलिस का जो रवैया रहा उससे आम लोगों में यही चर्चा थी कि हत्यारे और रॉकी को भगाने में पुलिस की भी भूमिका संदिग्ध है. सुबह होते ही यह मामला पूरे शहर में गरम हो गया और लोगों का आक्रोश सड़क पर आ गया, तब पुलिस ने विधान पार्षद मनोरमा देवी के पति बिंदी यादव को साक्ष्य मिटाने तथा अपने बेटे का गलत बचाव करने के आरोप में गिरफ्तार किया. सबसे बड़ी बात यह है कि इस बड़ी घटना की प्राथमिकी दर्ज करने में पुलिस को लगभग 20 से 26 घंटे लगे. सत्ता से जुड़े लोगों के आरोपी बनने पर पुलिस यह चाह रही थी कि उनके मुताबिक प्राथमिकी दर्ज हो.

स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही : अज्ञात बीमारी से मर रहे नौनिहाल

इसके लिए मृतक आदित्य के परिजन तैयार नहीं थे. यहीं पर इस मामले में गया पुलिस भी संदेह की घेरे में आ गई. जबकि आदित्य के परिजन और चश्मदीद गवाह जो घटना हुई उसी के अनुसार प्राथमिकी दर्ज कराना चाहते थे और बाद में वही हुआ. गया के एसएसपी गरिमा मलिक बताती हैं कि यदि एमएलसी मनोरमा देवी के खिलाफ भी सबूत मिले तो उन्हें भी गिरफ्तार किया जाएगा. एनडीए ने आदित्य हत्याकांड के विरोध में 9 मई 2016 को गया बंद का आह्वान किया था. घटना के तुरंत बाद सत्ता से जुड़े कुछ नेताओं का बयान आया कि इस कांड के दोषी किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा. लेकिन मुख्यमंत्री समेत अन्य वरिष्ठ सत्ताधारी नेताओं का बयान मृतक के परिजनों की सहानुभूति के लिए नहीं आने से लोगों को अंदेशा है कि बिंदी यादव और उसका पुत्र कहीं सत्ता का लाभ लेकर इस हत्याकांड से मुक्तन हो जाएं. गया की घटना को लेकर पटना में भी राजनीतिक पारा गरम है. कोई सूबे में राष्ट्रपति शासन की मांग कर रहा है, तो कोई मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को कोस रहा है. जनता दरबार में नीतीश कुमार ने साफ कर दिया कि अपराधी छोड़े नहीं जाएंगे. राकी यादव पकड़ भी लिया गया है, पर सवाल यही है कि आखिर आदित्य को किस गुुनाह की सजा मिली और उसे दुनिया छोड़ कर जाना पड़ा. सत्ता का अहंकार ऐसा है कि छोटी सी बात पर एक युवक को अपनी जान गंवानी पड़ी. कानून मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता वाली सोच ही इस तरह की परिस्थति पैदा करती है. और जिसे जाना होता हैं वह चला जाता है और फिर सड़को पर राजनीति शुरू हो जाती है. आदित्य के परिवार का दर्द इस राजनीति से कम नहीं होगा. अगर यह सरकार हत्यारों को जल्द से जल्द सजा दिला देती है, तो कम से कम पीड़ित परिवार को इतना तो संतोष जरूर होगा कि अब दोबारा कोई किसी की निर्मम हत्या करने के पहले सौ बार सोचेगा. हो सकता है कि इस सोच की वजह से किसी और आदित्य की जान बच जाए.

अपराध और बिंदी यादव का पुराना रिश्ता है

बिंदेश्‍वरी प्रसाद यादव ऊर्फ बिंदी यादव ऐसे तो पिछले ढाई दशक से विभिन्न आपराधिक मामलों को लेकर चर्चा में रहा है. उसकेठेकेदार बनने के पीछे जीटी रोड पर प्रवेश का धंधा करने से लेकर आपराधिक मामले भी मुख्य रहे हैं. पिछले ढाई दशक में अकूत संपत्ति बनाने वाले बिंदी यादव की संपत्ति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बेटा राकेश रंजन यादव ऊर्फ रॉकी यादव 1.30 करोड़ की कीमत वाली लैंड रोवर से चलने और लगभग आठ लाख रुपये की कीमत वाला लाइंसेसी रिवाल्वर रखने का शौकीन है. उसके पास इतनी कीमती गाड़ी और रिवाल्वर कहां से आया यह भी जांच का विषय है. हाल ही में बिंदी यादव को जिला प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराए गए सरकारी अंगरक्षक का मामला भी सुर्खियों छाया हुआ था. बिंदी यादव पर पहले से ही दर्जनों केस थे. लेकिन वह गया शहर के सोना-चांदी के कारोबारी बबली जैन अपहरण कांड से चर्चा में आया. उसके बाद नक्सलियों को बड़े पैमाने पर कारतूस उपलब्ध कराने के मामले में बिंदी यादव पर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चला. लेकिन संयोग ऐसा रहा कि इन दोनों मामलों में बिंदी यादव बाहर निकलने में सफल रहा. उसके राजनीतिक आकाओं का उसे संरक्षण न मिले, तो अब उसके पुत्र रॉकी यादव द्वारा व्यवसायी पुत्र आदित्य की हत्या किए जाने के मामले में उसका बच पाना मुश्किल है. इन सबके अलावा बिंदी यादव पर अलग-अलग थानों में दर्जनों मामले दर्ज हैं.

जिनमें साक्ची थाना, जमशेदपुर अपराध संख्या 158/ 1995, धारा 387, साक्ची थाना जमशेदपुर अपराध संख्या 150/ 1995, धारा 387, रामपुर थाना अपराध संख्या 162/ 1995, धारा 160, 341, 323, 307, 504, मुफ्फसिल थाना अपराध संख्या 12/ 2004, धारा 379, सिविल लाइंस अपराध संख्या 132/ 2002 धारा 144, 353, 341, 504, 186, 189, सिविल लाइंस अपराध संख्या 281/2003, धारा 307, 379, 385, 504, 354, बोधगया थाना अपराध संख्या 17/2005, धारा 133 पीआर एक्ट, बाराचट्टी थाना अपराध संख्या 95/2005, धारा 406, 420 बाराचट्टी थाना अपराध संख्या 68/2001 धारा 25 (1) (बी) (ए) 26, बाराचट्टी थाना अपराध संख्या 133/2007, धारा 147, 148, 337, 353, 384, 386, 420, 120(बी), मदनपुर थाना अपराध संख्या 38/2005 धारा, 384, 420, बोधगया थाना अपराध संख्या 83/2010, धारा 414, 34, 33, कोंच थाना अपराध संख्या 29/2009, धारा 29(बी) 30 आर्म्स एक्ट, फतेहपुर थाना अपराध संख्या 79/2006, धारा 25(1-बी), 26, 35 आर्म्स एक्ट, वजीरगंज थाना अपराध संख्या 79/2006, धारा 147, 148, 143, 188, 171, 426, 427, बाराचट्टी थाना कांड संख्या 199/2006, धारा 341, 323, 379, 34. इसी प्रकार कई और थानों में बिंदी यादव के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं. इसके अलावा बिंदी यादव की पत्नी और विधान पार्षद मनोरमा देवी पर भी गया के थाने में आपराधिक मामले दर्ज हैं. चनौती थाना अपराध संख्या 160/ 2005, धारा 144, 171 (सी) 188, 123, (3), 131. चनौती थाना अपराध संख्या 161/ 2005, धारा 224, 225/34, मामले दर्ज हैं.

  – सुनील सौरभ

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