lalu prasad yadavनोटबंदी के विरोध को लेकर जारी विपक्ष की कोशिशों को भी अब अपनों का साथ नहीं मिल रहा. राष्ट्रीय जनता दल ने बुधवार को बिहार के सभी ज़िला मुख्यालयों पर धरना देने का ऐलान किया. लालू यादव ने खुद कहा कि वो पटना में धरने की अगुवाई करेंगे. लेकिन बिहार में राजद की गठबंधन सहयोगी दोनों पार्टियों जेडीयू और कांग्रेस ने इससे दूरी बना ली. गठबंधन के इस अंतर्विरोध पर जेडीयू सांसद केसी त्यागी कहते हैं, जनता दल यूनाइटेड, राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस विभिन्न विचारधाराओं की पार्टियां हैं. भाजपा को सत्ता से बाहर करने के लिए हमारा समझौता हुआ है. तीनों दल अपनी रणनीति के हिसाब से कार्यक्रम करने के लिए स्वतंत्र हैं.

इससे पहले भी राजद ने नोटबंदी के ख़िलाफ बिहार के सभी ज़िलों में आक्रोश मार्च निकाला था. राजद का कहना है कि देश में उत्पन्न आर्थिक अराजकता की स्थिति को देखते हुए धरने का आयोजन किया जा रहा है. पार्टी के बिहार प्रदेश के अध्यक्ष रामचंद्र पुर्वे कहते हैं, नोटबंदी को लेकर पूरे देश में त्राहिमाम मचा है. किसान, मजदूर और नौजवान सभी तबाह हो गए हैं. धरने के ज़रिए किसानों का ऋण माफ़ करने, नोटबंदी से प्रभावित छोटे व्यापरियों को 50 हज़ार रुपये मुआवज़ा देने, छोटे व्यापारियों के 5 लाख रुपये तक के ऋण माफ़ करने और नोटबंदी की वजह से कथित तौर पर जिन लोगों की मौत हुई है उन्हें उचित मुआवज़ा देने की मांग उठाई जाएगी.

राजद के इस धरने को भाजपा ने विपक्षी घबराहट करार दिया है. भारतीय जनता पार्टी ने धरने पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष भारत बंद फ्लॉप होने के बाद भी ये नहीं समझ सका है कि जनता कष्ट सहकर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ है. भाजपा नेता और केंद्रीय राज्यमंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, नोटबंदी से विपक्ष क्यों घबराया हुआ है, ये समझ में नहीं आ रहा है. मायावती की परेशानी की वजह तो समझ में आ गई है. लेकिन लालू यादव क्यों घबराए हुए हैं.

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