इस महीने के अंत मे मै 67 की उम्र पूरी करके 68 वे साल मे प्रवेश हो रहा हूँ मुझे होश आया तब से मै सार्वजनीक जिवन मे दुनिया को बेहतर बनाने की कोशिश मे शायद पचास से भी ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ !
और इस कारण कई आयोजन करने मे मेरी भुमिका रही है मुख्यतः राष्ट्र सेवा दलके शीविर जो उम्र के 15 साल का था तब से आयोजीत करने का अनुभव वह भी महाराष्ट्र के बाहर !

फिर कॉलेज की विद्यार्थि युनियन के अध्यक्ष के कारण कॉलेज के कार्यक्रमो से लेकर होस्टेल की मेस चलाना और उत्तर भारत दर्शन के स्टडी टूर का आयोजन खाना बनानेवाले को लेकर!
फिर 1973-75 के समय मे जेपी आंदोलन,फिर घरमे हाऊस हज्बंड ! 10 साल खाना बनाने से लेकर बच्चो की परवरीश ! और भागलपुर दंगेके बाद के काम मे बंगाल के मित्रो को लेकर ग्रामिण इलाको मे संवाद शिबिरो का आयोजन !
नब्बेके दशक मे एन ए पी एम के संयोजक टिम के एक सदस्य के नाते एन ए पी एम के रेलिय शिबिर तथा बैठको के,वैसाही सी एन डी पी,भारत-फिलिस्तीन के दोनो कारवाओ के संयोजक के नाते किसी भी सार्वजनीक कार्यक्रम मे खाने-पीने से लेकर रहने का बंदोबस्त करने के अनुभव !


आज दिल्ली के सिमाओ पर गत दो सप्ताह से लाखो किसानो के खाने-पीने,तथा रहने का प्रबंध देखकर मै बहुत ही प्रभावित होकर यह पोस्ट लिखने के लिये प्रेरित हुआ हूँ !
मैने इसके पहले मेरे कई आयोजन के उल्लेख मैने किया है और इसी कारण मै किसी भी कार्यक्रमकी मांगे और उसके सैद्दातीक पक्ष के उपर तो बहुत लिखकर आ रहा है !
लेकिन यह जो व्यवस्था जिसे अन्ग्रेजी मे लोजेस्टीक बोलते है वह इस आंदोलन मे का मेरे जैसे इस तरह के काम किया हुआ कार्यकर्ता के लिये बहुत अहमियत है !
क्यो की एक कहावत है ना की किसि के भी दिल तक पाहूचने का रास्ता पेट से होकर जाता है और शिख समाज के अन्य रीति-रिवाज मुझे ज्यादा नही मालुम लेकिन यह लंगर की प्रथा का मै बहुत ही कायल हूँ !

पकिस्तान दो बार वाघा बॉर्डर क्रॉस करके गया हूँ ! और एक बार वीसा की झंझट हमारी आई बी ने अंतिम समय मे एन ओ सी का ठप्पा नही लगाने के कारणो से वापिस आना पडा !
फिर मिडिया ने इस विषय को काफी उछालने के कारण उस समय के विदेश मंत्री एस एम कृष्णा जी के हस्तक्षेप से दुसरे दिन हमे एन ओ सी मिल गया था!
लेकिन एक रात रहने का मामला था तो हमको पंजाब के जो दोस्त छोड़ने के लिए आये थे और उनके जान पहचान के बॉर्डर के बगल के ही किसी शिख किसान के खेत के घर मे ठहरने का इंतजाम उन्होँने किया था
वह अनुभव जिन्दगी मे कभी भी नही भुल सकता! हम पचास से भी ज्यादा लोग थे लेकीन उस घर के किसी भी सदस्यके चेहरे पर शिकन तो छोडो उल्टा हमारा किसी बारात के बाराती जैसा स्वागत !


यही दिसंबर का महीना था सरसो की साग और मख्खन लगी मक्के की रोटिया पिवर दुध का ग्लास भर के चाय ! और पुरा घर औरते आदमी मिलकर हम लोगो की खातिरदारी देर रात तक बहुत ही खुषी से कर रहे थे !
और उसी समय खेत मे ट्रेक्टर की लाईट मे लगातार काम भी चल रहा था ! कही पानी दिया जा रहा है तो कही ट्रेक्टर से खेत मे हल चल रहा हैं ! और घर के अंदर हम 50-55 लोग मेहमान ! भरपेट खाना खा रहे !
और सुबह बॉर्डर पर जाने के पहले हमारे भरपेट नाश्ता और लम्बे-लम्बे ग्लास भर के पिवर दुध की चाय ! यह सिर्फ शिख लोग ही कर सकते है !
दुसरे अनुभव मे तो अमृतसर के सुवर्ण मंदीर के लंगर मे खाना खा रहे थे ! और देखा की बहुत संपन्न परिवार की औरते आदमी लंगर मे कोई सब्जियां काट रहा है !तो कोई रोटिया बेल रहा है तो कोइ खाना परोस रहा है !तो कोई झूठे बर्तन धो रहा है ! तो कोई अंडर्ग्राउंड चप्पल-जूते को सिल्सिलेवार रख रहा है !
और जो वपसिमे जा रहा है उनको बहुत ही नम्रता से वापस कर रहा है ! और कहिभी पै-पैसोकी बात नही सब कुछ निशूल्क !

और यह अनुभव के बाद याद आ रही है और! हमारे हिंदू प्रार्थना स्थल ! वहाके पुजारी और सेवकोने लुट के अड्डे बनाकर रखे हुये है ! एक बार जानेके बाद दोबारा जानेकी इच्छा खत्म हो जाती है ! फिर वह काशी विश्वनाथ हो या कलकत्ता की काली मा के मंदीरोके निजि अनुभव से ही लिख रहा हूँ !

मुख्य बात वर्तमान किसान आंदोलन के प्रबंधन और वह भी रहने,खाने-पीने की व्यवस्था देखकर मै बहुत ही प्रभावीत हूँ!और किसनोका दावा है कि वह कमसे कम दो तीन महिने के तैयारी से आये है !
भारत के विभिन्न आंदोलन मैने अपने 50 साल से भी ज्यादा के जिवन मे इस तरह का कभिभी नही देखा है ! लखोकी संख्यामे लोग रात दीन बैठे हुये है ! और उत्तरभारत की इस कडाकेकी ठंड मे लगातार उन्हे चाय,नास्ता,दोनो समय का खाना बनानेकी वीडियो देखकर मै विलक्षण प्रभावीत हूँ !
जिस प्रेम और अनुशाशन से यह सब कुछ हो रहा है कहिभी अव्यवस्था या रेलंपेल नहीं बिल्कुल ही सुव्यवस्थित तरीकेसे सब कुछ चल रहा है !
यह बहुत ही महत्त्वपूर्ण प्रबंधन का उदहारण है ! अब सरकार कब तक उनको इसी तरह रखने वाली है ? वह सरकार ही जाने ! क्योकि जबसे नरेंद्र मोदी जीने सत्ता सम्हाली तबसे गरिबोके,मजदूरो के और किसान छोटे उद्यमशील,छोटे दुकानदार, व्यापारी,दलित,आदिवासी,महिला और अल्पसंख्याक समाजोके खिलाफ ही निर्णय लिये है !
और बात अपनी खुद की गरीबी की करते रहते है! इतना चालाक और लोगोको भुल-भुलैया मे डालने वाला प्रधान-मंत्री भारत के ईतिहास मे एकमात्र अगर कोई है तो वर्तमान प्रधान-मंत्री महोदय !

एक तरफ कह रहे है कि हमने जो भि कानुन बदले है वह किसानोके भले के लिये है ,! लेकिन बगैर किसान भाई योसे बात किये! बगैर संसद में बहस किये! और राज्यसभा में तो हमारे मित्र हरिवंश की मदद जो भारत के संविधान के ईतिहास मे सबसे काली करतूत के रूप में आगे आनेवाले समय में याद कि जायेगी ! और यह कम लगा तो अपने मातहत के कुछ लोगोको तथकथित वार्ता के दौर और कुछ लोगोको आंदोलन के खिलाफ अनर्गल बकनेके लिये जिन्हे विशेष महारत हासिल है ऐसे लोगोको लगा दिया है !


हालाकि वर्तमान सरकार खुद राममंदीर आंदोलन के रथपर सवार होकर आज सत्ता पर आई है !
जहा बिजेपी सरकार मे नही है महाराष्ट्र,बंगाल ,केरल इत्यादि जगहोपर आये दिन कुछ ना कुछ खुरापती करकेही लगातार हंगामा कर रहे है और दुसरा कोई इनके खिलाफ इनकी जनविरोधी नीतियोके खिलाफ आंदोलन कर रहे वह राष्ट्र विरोधी ? क्या बात है ? राष्ट्र के स्वाधीनता आंदोलन मे हिस्सा लेना तो दूर ऊल्टा अंग्रेजोके दलाल बनकर सेनामे भर्ती करनेसे लेकर स्वतंत्रता सेननियो के नाम पुलिस को बताने वाले और 100 सालसे हिंदु-मुसलमाँनोका राग आलाप कर देशके बटवारे के लिये जिम्मेदार !
और आजादीके बाद भी राष्ट्रपिता कि हत्या से लेकर दंगे और आतंकी घटनाओं को अंजाम देनेवाली जमात दूसरोको देश भक्ति के सर्टीफिकेट बाटना याने उल्टा चोर कोतवाल को डाटे वाली कहावत को दोहरा रहे है !
डॉ सुरेश खैरनार 8 दिसम्बर 2020,नागपूर

Adv from Sponsors