कामतापुर पीपुल्स पार्टी ने नवें दशक से अलग राज्य और कामतापुरी भाषा की संवैधानिक स्वीकृति के लिए आंदोलन छेड़ा था, पर जल्द ही इसके कॉडरों को लगने लगा कि लोकतांत्रिक तरीक़े से आंदोलन करने से कुछ हासिल नहीं होने वाला. वर्ष 1993 में जलपाईगुड़ी के कुमारग्राम प्रखंड के दक्षिण पुखुरी गांव में छात्रनेता तघीर दास उर्फ़ जीवन सिंह, आत्मसमर्पण कर चुके कॉडर मधुसूदन दास उर्फ़ टार्जन, असम से आए उर्लें नेता भास्कर कालिता एवं अजय घोषाहारी के बीच एक बैठक हुई, जिसमें कामतापुरी रिवोल्युशनरी स्टूडेंट्‌स यूनियन का गठन हुआ. भास्कर कालिता ने उस दिन जीवन सिंह को 10 हज़ार रुपये दिए और कॉडरों की बहाली का काम शुरू करने को कहा. इसके बाद 1994 में 28 दिसंबर को कुमारग्राम के दुर्गादास के घर में हुई एक बैठक में केएलओ का गठन हुआ. जीवन सिंह को नेता बनाया गया और 21 कॉडरों को मिलाकर केएलओ कमेटी बनाई गई. सबसे पहले 2001 में केपीपी ने उत्तर बंगाल के तीन ज़िलों और असम के एक पश्चिमी ज़िले को मिलाकर अलग कामतापुरी राज्य की मांग की.
इसके कुछ ही दिनों बाद उर्लें की मदद से केएलओ के 10 सदस्य  प्रशिक्षण लेने असम के कोकराझार गए, पर सेना ने इनकी कोशिशें नाकाम कर दीं. 1995 में उर्लें के भूटान स्थित एक प्रशिक्षण शिविर में केएलओ कॉडरों का प्रशिक्षण शुरू हुआ. वर्ष 2003 में भूटान में सेना की कार्रवाई में उर्लें के साथ-साथ केएलओ के शिविर भी ध्वस्त कर दिए गए. इस ऑपरेशन ऑल क्लीयर के बाद भूटानी सेना के समक्ष क़रीब 200 कॉडरों ने आत्मसमर्पण किया. केएलओ सुप्रीमो जीवन सिंह ने भागकर बांग्लादेश में शरण ली. जीवन सिंह आज तक फ़रार हैं. पुलिस केएलओ की अगली पंक्ति के कई नेताओं को जेल भेज चुकी है, पर जीवन सिंह तक उसके हाथ नहीं पहुंच पाए हैं. जीवन सिंह की पत्नी भारती दास फिलहाल पुलिस की गिरफ़्त में हैं

तेलंगाना की आग उत्तर बंगाल के ब़र्फीले पहाड़ों के साथ-साथ मैदानी इलाक़ों तक पहुंच गई है. वैसे गोरखालैंड की तरह कामतापुर आंदोलन कभी तीव्र नहीं रहा, पर मौक़ा देखकर एक बार फिर इसके कॉडर सड़कों पर उतर आए हैं. कामतापुर पीपुल्स पार्टी, कामतापुर प्रोग्रेसिव पार्टी और कामतापुर लिबरेशन आर्गेनाइज़ेशन नामक तीन संगठन इस आंदोलन को चला रहे हैं.

पिछले सितंबर में असम के गोसाईं गांव में सेना और पुलिस के संयुक्त अभियान में जीवन सिंह की बहन सुमिता और रिश्तेदार धनंजय बर्मन पकड़े गए. धनंजय और सुमिता से पूछताछ में पुलिस को पता चला कि केएलओ का आठवां प्रशिक्षण शिविर बांग्लादेश में शुरू होने वाला है. इसके लिए उत्तर बंगाल के मैनागुड़ी, धूपगुड़ी और कुमारग्राम प्रखंड से कॉडरों की बहाली चल रही है. 1999 से 2004 तक केएलओ कॉडरों ने दर्ज़नों माकपा नेताओं का ख़ून किया. 2004 से एक सौ से ज़्यादा केएलओ कॉडरों ने हथियार डाले हैं और अभी उत्तर बंगाल की जेलों में 80 से ज़्यादा कॉडर विचाराधीन क़ैदियों के रूप में बंद हैं. भूटानी सेना के अभियान के बाद पुलिस एवं सेना ने बताया कि कामतापुरी आंदोलनकारियों की रीढ़ तोड़ दी गई है, पर केएलओ के आठवें प्रशिक्षण शिविर की तैयारी की ख़बर ने प्रशासन की परेशानी बढ़ा दी है.
तेलंगाना विवाद के बाद इसके कॉडरों में एक नया उत्साह पैदा हुआ है. केपीपी के मुखिया अतुल राय ने चौथी दुनिया को बताया कि 20 दिसंबर से उसके कॉडर राजमार्ग पर अवरोध कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि कामतापुरी आंदोलन को झामुमो नेता शिबू सोरेन और नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के नेता पी ए संगमा का भी समर्थन है. ख़बर है कि केएलओ ने प्रशिक्षण के लिए राजवंशी युवकों की बहाली शुरू कर दी है. इसके अलावा ग्रेटर कूच बिहार डेमोक्रेटिक पार्टी भी अलग कूच बिहार राज्य के लिए आंदोलन करती रही है. सितंबर 2005 में आंदोलनकारियों के हमले में एक एसपी एवं दो पुलिसकर्मियों सहित पांच लोगों की मौत हो गई थी.

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