अमात्य सेन को शांतिनिकेतन के घर को छोड़कर जाने की नोटिस !


यह उपर की खबर कल शाम को मुझे व्हाट्सअप पर प्राप्त हुई ! लेकिन अन्य लेख जो मधू लिमये की लखनऊ के जन्मशताब्दी के उपलक्ष्य में कार्यक्रम में एक भाषण लिखने की व्यस्तता में भी ! तुरंत सिर्फ पढकर मधूजी पर लिखना शुरू रखा ! लेकिन रात के एक बजे के बाद ! सोने के लिए बेडपर लेटा ! और अमात्य सेन को शांतिनिकेतन के घर छोडने की नोटिस बार – बार मन में आ रही थी ! और खुद को खुब अपमानित महसूस करने लगा तो ! आखिर निंद न आने की वजह से तुरंत बैठ कर यह लिखना शुरू किया ! आखिर मै भी इस देश को बेहतर बनाने के लिए ! आज सत्तर साल की उम्र में ! कम-से-कम पचास साल से भी अधिक समय से ! बगैर किसी के भी पेरोलपर न रहते हुए ! अपनी रिटायर पत्नी के पेंशन की दाल-रोटी खाते हुए ! जीवन जी रहा हूँ ! और हमारे ही देश की ऋषियों – मुनियों के जैसा ! संपूर्ण जीवन को एक साधना के जैसा व्यतीत करने वाले ! व्यक्ति को भारत में सम्मान की जगह ! अपमान से मन बहुत खराब होने के बाद यह मुक्तचिंतन लिखने बैठा हूँ !


भारत का सबसे बड़ा पुरस्कार भारत – रत्न और विश्व का सबसे बड़ा पुरूस्कार नोबेल से सम्मानित और अपने उम्र की शताब्दी को जल्द ही पूरी करने वाली शख्सियत अमात्य सेन को ! वर्तमान समय की भारत सरकार , सिर्फ़ उनके स्वतंत्र विचार व्यक्त करने के कारण बदले की भावना से कारवाई की जा रही है ! यही वर्तमान सरकार के तारीफ कीए होते तो शायद भारत के राष्ट्रपति पद पर बैठे होते ! पर दुनिया में कुछ लोगों की उंचाई किसी भी पदसे बढती – घटती नहीं उनमे अमात्य सेन का नाम है ! हमारे देश को गर्व है कि ऐसे भी लोग अभी भी है !


वैसे भी वर्तमान समय की केंद्र सरकार के मातृसंस्था ने आजसे सौ साल पहले इटली के बेनिटो मूसोलिनी और जर्मनी के अडॉल्फ हिटलर के फासीस्ट विचारों से प्रभावित होकर ही ! अपने संघठन की स्थापना की है ! ( 1925 ) और इटली के समस्त स्वतंत्र विचार के नागरिकों जिनमें मुख्य रूप से वैज्ञानिक, लेखक-पत्रकार, कवी और बुद्धिजीवी वर्ग लोगों को ठिकाने लगाने के इतिहास के रेकॉर्ड मौजूद हैं ! और वही काम जर्मनी में हिटलर ने भी दोहराया था ! तो हिटलर – मुसोलीनी की कार्यशैली का अनुकरण संघ की राजनीतिक ईकाई भारत में भी करेंगे तो कोई अचरज की बात नहीं है ! संघ परिवार इन्सानों को बौद्धिक रुप से बोनसाई के रूप में तैयार करने का कारखाना है ! इसलिए उन्हें प्रतिभा संपन्न लोगों से नफरत होती है ! इतनी नफरत की उनकी हत्या तक कर देते है ! उन्हे किसी गुंडों से ज्यादा प्रतिभाशाली लोगों से नफरत होती है ! हीटलर का भी ऐसा ही था ! परमतसहिष्णुता के उल्टा असहिष्णुता यही उनकी फितरत होती है ! महात्मा गाँधी जी के हत्या के पिछे एकमात्र कारण वह बीसवीं सदी के परमतसहिष्णुता को लेकर जिझस ख्रिस्त, गौतम बुद्ध के साथ उनकी तुलना होने लगी थी ! और सबसे पीड़ित दिन दलितों तथा महिलाओं के मुक्ति की शुरुआत उन्होंने की और इन्ही सब कारणों से चिढकर उनकी हत्या कर दी ! 55 करोड़ रुपये और बटवारे की बात झुठी है ! गांधी जी का पर्वत के समान व्यक्तित्व के कारण बोनसाई की खेती करने वाले संघ परिवार कुंठा में जाने के कारण ही उन्होेंने हत्या कर दी है !


सबसे पहले 2014 में सत्ता में बीजेपी सत्ता में आने के पहले की सरकारों ने अमात्य सेन को नालंदा विश्वविद्यालय के ढाई-तीन हजार वर्ष पहले की तरह ! आंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी ! जिससे उन्हें संघ और उसकी राजनीतिक ईकाई बीजेपी ने 2014 में सत्ता में आने के बाद अविलंब निकाल बाहर किया गया ! क्योंकि उन्होंने भारत के बारे में अपनी भूमिका धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र तथा रविंद्रनाथ टागौर और महात्मा गांधी की विरासत के रूप में होनी चाहिए ! यह भूमिका रखने के वजह से वर्तमान सत्ताधारी दल ने ! गोलवलकर के एक चालकानुवर्त हिंदू राष्ट्र बनाने के रास्ते के रोडे अमात्य सेन लगने लगे तो नालंदा विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी से हटाने का काम किया !

लेकिन सौ वर्ष पहले उनके नाना क्षितिमोहन सेन रविंद्रनाथ टागौर के समकालीन ! जिन्होंने रविंद्रनाथ टागौर के साथ शांतिनिकेतन की शुरुआत की ! और उसी समय अपने खुद के पैसों से यह जमीन खरीदने के बाद इस घर को बनाया है ! जहाँ पर अमात्य सेन ने इस दुनिया में कदम रखा है ! मतलब उनका जन्मस्थान की जगह को लेकर बार – बार विवाद खड़ा करना कम-से-कम भारत जैसे देश को शोभा नहीं देता है !


आंतराष्ट्रीय स्तर के विद्वानों का अपमान इतिहास में युरोपीय देशों में सौ सालों पहले होने का इतिहास मौजूद हैं ! और उन्हीं असंस्कृत कारगुजारियों के कारण एक को मिलान शहर के चौराहे पर एक पेड़ पर लोगों ने उल्टा टांगने और उसके शव पर हर कोई आकर थूकता था!यह देख कर घबराकर 30 अप्रैल 1945 को हिटलर ने को खुद ही अपनी पिस्तौल से अपनी कनपटी पर गोली चलाकर आत्महत्या करने के लिए मजबूर होना पड़ा है ! और उसके बाद अपने शव की मुसोलीनी की जैसी स्थिति नहीं हो ! इसलिए खुद मरने के पहले ही पर्याप्त मात्रा में ज्वलनशील पदार्थ जमा कर के पूरे इंतजाम करने के बाद ही ! आत्महत्या और अपने शरीर को तुरंत नष्ट करने की व्यवस्था करनी पड़ी थी !


और आज उन्हीं देशों में इसतरह के मानवता विरोधी विचार के संघठन बनाने के खिलाफ कडे कानून बनाने पडे है ! इसलिए मेरी संघ परिवार और उसकी राजनीतिक ईकाई बीजेपी को चेतावनी है कि इतिहास को दोहराव मत ! भारत की सभी संविधानिक संस्थाओं को अपने मनमर्जी से व्यवहार करने के लिए मजबूर कर दिया है ! रही संसद उसे खुद गृहमंत्री ने कहा कि हम चलने नही देंगे ! हिटलर ने जर्मनी की संसद को आग लगा दी थी ! यह यहां पर बगैर आग लगाए उसके ऐवज में अपनी मनमर्जी से दूसरी ही संसद बनाने का काम कर रहे हैं ! भारत जैसे आर्थिक रूप से गरीब देश के पचास प्रतिशत जनसंख्या के हिस्से में पिने का शुद्ध पानी नसीब नहीं होता है ! और हजारों करोड़ रुपये खर्च कर के नई संसद बनाने की कृती को क्या कहेंगे ?
भारत में ज्ञानी, पंडित या पुरानी भाषा में ऋषि – मूनीयो के सम्मान करने की परंपरा रही है ! और सम्राट राजा महाराजाओं ने उनके साथ सम्मान जनक व्यवहार किये हैं ! संघ के लोग एक तरफ अपनी पुरानी परंपरा का बखान करते रहते हैं ! और ऋषि – मूनीयो के और गुरुकुल की चर्चा करते रहते है ! तो आज 2023 में आपको कौन सा गुरुकुल ? और कौन ऋषि – मूनीयो में दिखाई देता है ? अरे बावलो आज की तारीख में उम्र, ज्ञान की साधना और वह भी विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त ! शताब्दी के तरफ अग्रसर होनेवाली विश्वप्रसिद्ध शख्सियत को ! इस तरह की हरकतों से जो मानसिक और शारीरिक कष्ट दे रहे हो ! तो आपकी मान्यता के अनुसार ! अगर कोई ऋषि क्रोधित होकर शाप दे तो बेडा गर्क हो जायेगा इतना पक्का !


आज के तारिख में अमात्य सेन की हैसियत वाली शख्सियत को विश्व का कोई भी देश ससम्मान अपने देश में रखना चाहते है ! और एक आप लोग हो कि गत नौ सालों से लगातार उनके अपमान के नए – नए हथकंडे निकाल कर सुरजपर थुंकने का काम कर रहे हो ! जो वापस आपकेही मूंहपर गिरेगा ! छोडो टुच्ची बातें और अमात्य सेन के बचे-खुचे दिन सम्मान से जीने दो ! अन्यथा इतिहास में हमेशा – हमेशा के लिए कायम हो जायेगा ! “कि शांतिनिकेतन की भूमि पर पैदा हुए ! रविंद्रनाथ टागौर ने खुद अमात्य नाम दिया ! और आज भारत के सबसे बड़े सम्मान भारत रत्न ! और विश्व के सबसे बड़े सम्मान नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया ! 98 साल के उम्र के ऋषि तुल्ल व्यक्ति को !

अपमानित करने के लिए विशेष रूप से ! विश्वभारती प्रशासन और उसके पीछे पडकर यह सब घिनौना काम करने वाले ! तथाकथित सांस्कृतिक संघठन का दावा करने वाले फैसिस्ट संघ! की पडदे के पिछे की कार्रवाई के कारण अमात्य सेन की बची – खुची जिंदगी को नर्क बनाने की कोशिश कर रहे हैं ! लेकिन भारत इतना भी कमजोर हुआ नहीं है कि सिर्फ एक तिहाई मतों के आधार पर आऐ हुए सांप्रदायिक, भारतीय फासीवाद की प्रतिनिधि संस्था की मनमानी नही चलने देंगे नही चलने देंगे ! मैं बंगला सांस्कृतिक मंच के द्वारा घोषणा करता हूँ कि अमात्य सेन के घर को छूकर देखो इसके क्या परिणाम होंगे ? क्योंकि हमने ऐसे ही फासीस्ट ताकतों के साथ मुकाबला करने के लिए विशेष रूप से एस संघठन की स्थापना की है ! हमारे समस्त विश्व के सन्माननीय अमात्य सेन को तो छोडीए उनके घर को भी कोई हाथ नहीं लगा सकता है ! वह घर उनका है और वहां से उन्हें कोई भी तानाशाह उन्हें हिला नही सकता यह घोषणा हम लोग कर रहे हैं !


डॉ सुरेश खैरनार 20 मार्च 2023, नागपुर सुबह के 4-28 !

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