-मप्र वक्फ बोर्ड के आसपास सक्रिय हुए दलाल
-कर्मचारियों की मिलीभगत से जुटे हैं उलटफेर में

जब-जब व्यवस्थाएं बदलती हैं, तब-तब दलाल अपनी दुकानदारी को चलाने के लिए नए-नए रास्ते खोज लेते हैं। कभी कमेटी ओहदेदारों को बदलाव का खौफ दिखाकर और कभी बहाली के लिए प्रलोभन देकर इनका कामकाज चलता रहता है। नीयत के मारे कर्मचारी भी इनकी दलाली का हिस्सा बन जाते हैं और यह दलाल अपनी जेब भरो मंशा में हर दौर में कामयाब हो जाते हैं।

मामला अरबों रुपए की संपत्ति वाले मप्र वक्फ बोर्ड से जुड़े हैं। करीब दो वर्षों से ओहदेदारों से खाली पड़े इस बोर्ड में उधार के अफसरों के दम पर काम चल रहा है। इसी कड़ी में पिछले दिनों यहां की व्यवस्था में फिर बदलाव हुआ है। एडीएम और एसडीएम के हवाले हुई यहां की व्यवस्था को पटरी पर लाने के प्रयास जारी हैं। लेकिन इसी बीच यहां बरसों से सक्रिय दलालों ने अपना दामन फिर फैला लिया है।

प्रदेशभर में मौजूद करीब 1500 से ज्यादा कमेटियों के ओहदेदारों को उनका कार्यकाल खत्म होने के नाम पर डराया जा रहा है, कार्यकाल बढ़ाने के लिए प्रलोभन दिए जा रहे हैं और इन सबसे अपना भला करने की कोशिश यहां तेज हो चली है। दलालों की इस सक्रियता को बढ़ावा देने में बोर्ड में पदस्थ कर्मचारियों की बड़ी भूमिका है। जो अंदर की खबरें इन दलालों के हाथों में पहुंचाकर कमेटी ओहदेदारों पर दबाव बनवाने की कोशिश को अंजाम दे रहे हैं।

कमेटियों के पास पहुंच रहे फोन

सूत्रों का कहना है कि इंदौर, राजगढ़, ग्वालियर, रीवा, जबलपुर से लेकर गुना और राघौगढ़ जैसे कई छोटे-बड़े शहरों में इन दिनों वक्फ दलाल सक्रिय हैं। कभी व्यक्तिगत मिलकर और कभी फोन द्वारा यह दलाल कमेटी ओहदेदारों को उनकी कमेटी का कार्यकाल पूरा होने और इसके रिन्यूवल के लिए आसान रास्ता निकालने की बात कहकर दक्षिणा लेने-देने की बातें कर रहे हैं। बताया जाता है कि इन दलालों ने विभागीय मंत्री, बड़े भाजपा नेताओं से ताल्लुकात होने का दावा करते हुए भी कमेटी रिन्यूवल में अपनी भूमिका को दर्शाया है।

साथ ही वक्फ बोर्ड में अपनी भूमिका होने की बात को पुख्ता करने के लिए इन दलालों ने बोर्ड परिसर में भी अपनी मौजूदगी बरकरार रखना शुरू कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि एक इंदौर के व्यक्ति द्वारा प्रदेश के कई वक्फ कमेटी के ओहदेदारों से मिलकर कमेटी रिन्यूवल कराने और नई कमेटियां गठित कराने का दावा किया है। इस व्यक्ति ने खुद को मंत्री का खास करार देते हुए कमेटी ओहदेदारों के घरों पर दावत उड़ाने और उनसे कुछ नगद भी झटक लिए जाने के किस्से पूरे किए हैं। इधर वक्फ बोर्ड परिसर में नियमित मौजूद रहकर यहां आने वाले हर व्यक्ति को अपनी बातों में उलझाने की कोशिशों को अंजाम दे रखा है।

खुद वक्फ का दागदार, लोगों को कमेटी आश्वासन

राजधानी स्थित मप्र वक्फ बोर्ड दफ्तर के बाहर मौजूद रहने वाला एक व्यक्ति खुद को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का खास व्यक्ति करार देता है। इसपर विभिन्न मामलों में कई केस दर्ज हैं। वक्फ का दागदार होने के बावजूद यह लोगों को कमेटियां बनवाने, पूर्व कमेटियों का कार्यकाल बढ़वाने और उनके वक्फ बोर्ड से रुके विभिन्न कामों को आसानी से पूरा करवाने का आश्वासन देता नजर आ रहा है।

सैकड़ों किलोमीटर दूर अपना घर छोड़कर यहां मौजूदगी बनाए रखने वाले इस व्यक्ति के साथ वक्फ बोर्ड के कई कर्मचारियों का तालमेल भी बना हुआ है। जो इसको अंदर की खबरों से इसको आगाह करते रहते हैं। साथ ही छोटे-मोटे कामों को पूरा करवाने में इसकी मदद भी करते हैं। इसके बदले इन कर्मचारियों को दलाली में मिली रकम का माकूल हिस्सा मिलने की चर्चाएं भी गर्म हैं।

नए हैं, बुद्धू नहीं : सीइओ

मप्र वक्फ बोर्ड में नवागत सीइओ जमील खान का लंबा प्रशासनिक रिकार्ड है। राजस्व मामलों के माहिर जमील के पदस्थ होने के बाद से ही उनके आसपास वक्फ दलालों का जमावड़ा लगने लगा है। दलालों की मानसिकता और धारणा यह है कि नए अफसर को बोर्ड की व्यवस्था और परंपरा की जानकारी कम है, इसलिए समय रहते उनसे मनमाफिक काम करवा लिया जाएगा। लेकिन सीइओ जमील खान का कहना है कि बरसों का प्रशासनिक अनुभव उनके साथ है।

किसी भी नए व्यक्ति का मतलब के साथ उनके पास आना उन्हें समझ भी आता है और आने वाले की मानसिकता भी वे भांप लेते हैं। खान का कहना है कि वक्फ दलालों को चिन्हित किया जा रहा है। ऐसे लोगों और उनका साथ देने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करने की तैयारी की जा रही है।

इनका कहना

मंत्री, नेताओं, अधिकारियों से ताल्लुक होने की बात कहकर कमेटी ओहदेदारों पास पहुंचने वाले दलालों की शिकायत मिली है। ऐसे लोगों को जल्दी ही ट्रेस कर लिया जाएगा। इनके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी।

खान अशु

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