यह साल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के और कम्युनिस्ट पार्टी के स्थापना का साल है ! लेकिन 96 साल का सफर देखने के बाद घोर सांम्प्रदायिक आधार पर भारत में संघ आज सबसे बड़ा संघटन है यह बात माननी पड़ेगी !
और सर्वहारा वर्ग की बात करने वाली और दुनिया के मजदूरों एक होने का नारा बुलंद करने वाले कम्युनिस्ट कहा है ? ठीक है आजादी के आंदोलन मे संघ परिवार एक नीतिगत निर्णय लेकर शामिल नहीं था पर कम्युनिस्ट पार्टी के लोगों ने समय-समय पर भाग लिया है और आंदोलन से भागे भी है ! सबकुछ रशियाके इशारों पर करने के कारण !

मै बंगाल मे 1982 से 1997 तक पंद्रह साल के अपने व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर यह विवेचन लिख रहा हूँ !
1990 के चुनाव के समय मेरे जेपी आंदोलन के पुराने मित्र जो 1977 के बाद एक्सप्रेस ग्रुप में पत्रकारिता कर रहे थे !और मुंबई से बंगाल चुनाव को कवर करने हेतु विशेष रूप से कलकत्ता में मेरे साथ ही ठहरे थे ! तो वह रोज अपनी रिपोर्ट मुंबई फॅक्स करने के पहले पढने के लिए देते थे ! तो मैंने देखा कि जिस बंगाल मे बीजेपी की राजनीतिक हैसियत कुछ भी नहीं है तो भी मेरे मित्र अपनी रिपोर्ट में बीजेपी की हैसियत लिख कर भेज रहे थे !

तो मैंने कहा कि आप झूठ-मूठ क्यो लिख कर भेज रहे हो अरे भाई बडाबजार जैसे मिनी राजस्थान जैसे एरिया सेभी बीजेपी कलकत्ता कार्पोरेशन मे प्रवेश नहीं कर पा रहे हैं ! और एकसे डेढ प्रतिशत भी वोट नहीं मिलनी वाले दल को आप रायझिंग फोर्स क्यो बता रहे हो ? तो उन्होंने कहा कि हमारे मालिक रामनाथ गोयनका की दिली ख्वाहिश है कि बंगाल मे बीजेपी की राजनीति हैसियत बननी चाहिए ! मैंने कहा कि उनकी लाख इच्छा हो लेकिन बंगाल की जनता की इच्छा फिलहाल बिल्कुल भी नहीं है ! और वह लेफ्ट और कांग्रेस के अलावा तीसरी किसी भी दल को नही चाहते हैं 1967 से नक्सली अपनी जान जोखिम में डाल कर लगे हुए है ! लेकिन उनके संतोष राना एक बार रायगंज से विधानसभा में गये थे लेकिन दोबारा नहीं जा सके !

वही हाल शिवदास घोष के दल एस यू सी आई का है ! सोशलिस्ट पार्टी के बोर्ड जरूर है लेकिन उनका भी राजनीतिक दल के रूप में बंगाल मे अस्तित्व नहीं के बराबर है ! 1990 के चुनाव के परिणाम मे बीजेपी को डेढ़ से दो प्रतिशत वोट मिले थे ! उसके बाद 1996 के चुनाव में आठ से नौ प्रतिशत वोट मिले थे ! तो मैंने लेफ्ट के मित्रों को चेतावनी दी थी कि यह आने वाले समय के लिए आप लोगों के लिए चेतावनी है ! तो उन्होंने कहा कि अरे भाई किछु होबे ना आपनी फाल्तू चिंता कोरबेना ! और 2006-7 मे नंदीग्राम-सिंगुर आंदोलन के बाद लेफ्ट सरकार की मोहलत आधी यानी ढाई साल बची थी और मै 6 दिसंबर 2007 के दिन नंदीग्राम में एक हप्ता पहले से घुम रहा था तो मेरे तीन पीढ़ियों से सीपीएम् दल के मित्र ने मुझे बाबरी मस्जिद ध्वंस की पंद्रह साल के उपलक्ष्य में एक सभा मौलाली युवा केंद्र कलकत्ता में रखी थी तो मुझे भी एक वक्ता के तौर पर आग्रह कर के बुलाया था ! और मैं नंदीग्राम की एक हप्ते की इन्क्वायरी कर के सिधा मौलाली युवा केंद्र के स्टेजपर थोडा देरी से पहुँचा ! तो देखा कि लेफ्ट फ्रंट की तत्कालीन सरकार के आधा दर्जन मिनिस्टर मंच पर बैठे हैं !

जब मुझे भाषण के लिए बुलाया गया तो मैंने कहा कि आप यहाँ बाबरी मस्जिद के विध्वंस के मातमपुर्सी करने बैठे हो ! यह जो मेरे मैले कपड़ों की धुल आप देख रहे हो यह साठ प्रतिशत मुसलमान रहते हैं ऐसे नंदीग्राम की है ! वहा का विधायक और लोकसभा सदस्य दोनो लेफ्ट पार्टी के ही है ! और वह वोटर मुसलमान मुझे रोरोकर बता रहे थे कि दादा आमी तो सीपीएम् पार्टीर सपोर्टर किंतु की कोरबो यदि आमादेर जमिन शिल्पयने चोले जाबे तो आमी आमादेर परिवार मारा जाबो !(दादा हम सीपीएम् के ही लोग है लेकिन औद्योगिक क्षेत्र के लिए हमारे जमीन जाने के बाद हम और हमारा परिवार मर ही जायेगा! क्योंकी ऑपरेशन बर्गा यानी जमीन के ज्योतने वाले को जमीन किसी प्रोजेक्ट में जाने से मुल मालिक को मुआवजे की रकम मिलेगी हम तो कहीं के न रहेंगे !)

तो मैंने कहा कि आप पंद्रह साल के बाबरी मस्जिद के विध्वंस के मातमपुर्सी करने बैठे हो और आपके राज्य के मुसलमानों के जीने के संसाधनों को जोर-जबरदस्ती से लेकर क्या मेसेज देना चाहते ? अब बाबरी मस्जिद के विध्वंस की पंद्रह साल के उपलक्ष्य में एक सभा खाना पुरी करने के बजाय आज भारत की सबसे बड़ी मुसलमान आबादी 26% सच्चर कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार सबसे बड़ी संख्या में बंगालमे रहते है ! सरकारी नौकरी में मुसलमान दो प्रतिशत भी नहीं है ! तो उनकी जीवन-यापन की बात को गौर करें अभी भी आपको अगले चुनावों में आधा समय यानी ढाई साल का समय है ! आप जोर-जबरदस्ती से औद्योगिक विकास मत करो !(और आश्चर्य की बात है कि यही बात पूर्व मुख्यमंत्री ज्योती बसु ने भी तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य को कही थी !

लेकिन मैं नंदीग्राम से इस सभा के लिए निकल रहा था ! और एक जगह पर भुईया नाम के सीपीएम् के किसान नेता शिल्पयने तो होते ही होबे की बात जोर-शोर से कर रहे थे ! और मौलाली युवा केंद्र कलकत्ता के मेरे भाषण पर आधा दर्जन मिनिस्टर मंच पर बैठे हुए अनदेखी करते हुए निकल गए ! आज मैंने बंगाल चुनाव के मतोका प्रतिशत देखने के बाद यह पोस्ट लिखने की प्रेरणा हुईं ! जब मैं 1997 मे बंगाल छोड़ रहा था तब बीजेपी के वोट साडे आठ से नौ प्रतिशत वोट मिले थे ! बिल्कुल दो अभी मई के नतीजों मे लेफ्ट पार्टीयोको उतना ही प्रतिशत वोट मिले हैं ! और एक भी प्रतिनिधित्व नहीं लेफ्ट और नहीं एक सौ छत्तीस साल की कांग्रेस पार्टी का !

पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी के तीन विधायक थे ! आज 77 ! और इनके ज्यादातर विधायक कांग्रेस और सीपीएम् के जगह से आये हैं ! यानी लेफ्ट टू सेंटर की शिफ्ट होने की बात भविष्य के लिए बहुत ही खतरनाक होगी !
वैसे भी नंदीग्राम की लडाई के बाद ममता बनर्जी ने सत्ता सम्हाली तो लेफ्ट के ज्यादातर लोगों ने बीजेपी का दामन थाम लिया था ! और कुछ मौकापरस्त ममता बनर्जी के पार्टी के साथ हो लिये थे ! लेकिन लेफ्ट पार्टी के नेताओकी आँखे नहीं खुली ! और इस चुनाव से पहले दिपंकर भट्टाचार्य ने (माले के महासचिव)बिहार चुनाव के बाद स्टेटमेंट दिया था ! कि लेफ्ट और कांग्रेस को मेरा नम्र निवेदन है कि बीजेपी के खिलाफ जाने वाले वोटोका बटवारे करने की गलती मत कीजिए ममता बनर्जी के साथ गठबंधन कीजिए ! और मैंने तुरंत दिपंकर भट्टाचार्य के स्टेटमेंट का समर्थन किया है !

आज क्या नतीजा निकला ? अब पस्चिम बंगाल विधानसभा के इतिहास मे बगैर लेफ्ट और कांग्रेस सिर्फ ममता और बीजेपी का रहने की बात भविष्य के लिए बहुत ही खतरनाक होगी तीन से 77 तक प्रगति करने वाले बीजेपी के लिए अब लेफ्ट और कांग्रेस यह रोडा खत्म हो कर सिर्फ ममता विरूद्घ बीजेपी लडाई ज्यादा आसान है ! और वैसे भी पंजाब के बाद पस्चिम बंगाल के बटवारे के जख्म हरे करने का काम संघ सौ साल से कर रहा है और 1950 का जनसंघ और 1980 के बाद बीजेपी बंगाल मे पिछ्ले कुछ वर्षों से दस्तक देने की कोशिश कर रहे हैं और अभी ममता बनर्जी की जित तत्कालिक जीत है ! क्योंकि ममता बनर्जी के पार्टी शुध्द वन वुमन पार्टी है ! अगर खुदा न खास्ता ममता बनर्जी का कुछ कम ज्यादा हो जाये तो दुसरे किसी भी नेता का नाम नहीं है !

लोग क्षेत्रीय दलों की वकालत करते थक नहीं रहे हैं ! पर सभी क्षेत्रीय दलों को देखकर एक भी दल नहीं है कि उसके कैडर है ! लगभग सभी दल वन मॅन वन वुमन वाले दल है ! और जनतंत्र के लिए यह स्वस्थ लक्षण नहीं है !
बीजेपी एकमात्र दल है कि जो केडर बेस है ! कम्यूनिस्ट पार्टी के बारे मे कुछ कहा जाता है तो वह केरल तक सीमित होकर रह गये ! बंगाल मे पैतीस सालों तक राज करने वाले दल का वर्तमान बंगाल विधानसभा में एक भी सदस्य नहीं पहुँचने की बात बहुत ही चिंता जनक है ! इसलिए कम्युनिस्ट पार्टी के लोगों से विनम्र प्रार्थना है कि आप के दल की यह स्थिति होने के कारणों को लेकर मंथन होने की आवश्यकता है !

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