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संकट में मानपुर का वस्त्र उद्योग
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संकट में मानपुर का वस्त्र उद्योग

kapdaबिहार में पिछले ढाई दशक में कोई नए कारखाने नहीं लगे, लेकिन इतना हुआ कि पहले से जो कारखाने थे, वे किसी न किसी कारण से बंद होते चले गए. जिससे रोजगार प्राप्त लोग भी बेरोजगार होने लगे. बिहार के मगध क्षेत्र में ही आजादी के बाद कई ऐसे कारखाने लगे, लेकिन आज की तारीख में उन सभी का कोई अस्तित्व नहीं है. उदाहरण स्वरूप, गया कॉटन एण्ड जूट मिल, गुरारू चीनी मिल और वारिसलीगंज चीनी मिल, वर्षों से बंद पड़ा है. गया कॉटन एण्ड़ जूट मिल को तो कपड़ा मंत्रालय ने पूरी तरह बेच डाला. कर्मचारियों की यूनियनबाजी भी इन सबका प्रमुख कारण रही है.

कभी देश के चर्चित उधोग समूह में शामिल रहा रोहतास इंडस्ट्रीज डालमियानगर के बारे में कहा जाता था कि यहां सुई से लेकर हवाई जहाज तक के पार्ट-पुर्जे का निर्माण होता है. लेकिन कर्मचारी यूनियन की स्वार्थ भरी राजनीति ने इसके संचालकों को उधोग बंद करने को विवश कर दिया. यहां काम करने वाले हजारों परिवार के सदस्य आज बड़े ही खराब स्थिति में हैं.

स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाला गया का मानपुर का वस्त्र उधोग आज 50 हजार से अधिक लोगों को रोजगार दे रहा है. यहां चलने वाले 12 हजार से अधिक पावरलूम और सैकड़ों हस्तकरघों से प्रतिदिन लगभग 35 लाख रुपए का कपड़ा निर्माण किया जाता है. यहां उत्पादित कपड़े, बिहार के अलावा बंगाल, ओडिशा, असम, मणीपुर, उत्तर प्रदेश आदि राज्योें में जाते हैं. लेकिन कुछ महीने पूर्व बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद (बीएसपीसीबी) ने मानपुर के पावरलूम तथा रंगाई-छपाई के कारखानों के संचालकों को नोटिस दिया तो बिहार का मैनचैस्टर कहे जाने वाले मानपुर के वस्त्र उधोग में कार्यरत बुनकरों एवं अन्य लोगों में दहशत फैल गई.

इस नोटिस पर जिला प्रशासन तथा प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने कार्रवाई शुरू कर दी. आरोप यह लगाया गया कि पावरलूम तथा यहां स्थापित रंगाई-छपाई कारखानों से जो केमिकल युक्त पानी निकल रहा है, उससे आसपास के मुहल्लों तथा फल्गु नदी के प्रदूषित होने का खतरा बढ़ गया है. प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने जिला प्रशासन को यह भी कहा कि मानपुर में जो भी पावरलूम तथा वस्त्र उधोग के कारखाने चल रहे हैं, उन्होंने नियंत्रण पर्षद से एनओसी नहीं लिया है.

इसपर प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के अधिकारियों ने बिना अनुमति वाले पावरलूम को बंद करने या कराने की बात कह दी. इस बात पर मानपुर वस्त्र उधोग में हड़कंप मच गया. लाचार होकर पावरलूम संचालकों और बुनकरों ने एक सप्ताह तक अपनी विभिन्न मांगों को लेेकर काम बंद कर दिया. इसके कारण प्रतिदिन कमाने वाले मजदूरों और बुनकरों को प्लाई करने की नौबत आ गई. प्रदूषण नियंत्रण पर्षद का कहना है कि मानपुर पटवाटोली में कई दशक से सूत से कपड़ा तैयार किया जाता है. कपड़ा तैयार करने से पूर्व सूत को कई रंगों में रंगा जाता है. सूत को रंगीन करने के लिए कई करखाने चल रहे हैं. इस कारखाने से निकलने वाला रंगीन पानी फल्गु नदी के भूगर्भ में जा रहा है. इस रंगीन पानी से फल्गु नदी और आसपास के इलाके प्रदूषित हो गए हैं. इन क्षेत्रों के चापाकल से निकला पानी पीने लायक नहीं है.

इसी कारण से बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने गया के डीएम को एक महीने में मानपुर के पावरलूम को बंद कराने का निर्देश दिया. जिससे कि फल्गु नदी को प्रदूषण मुक्त बनाया जा सके और आसपास बसे लोगों को स्वच्छ जल की आपूर्ति की जा सके. मानपुर पटवा टोली में प्रतिदिन 12 हजार पावरलूम से 10 लाख मीटर कपड़े का उत्पादन किया जाता हैं. प्रतिदिन यहां से करीब 40 लाख का कारोबार होता है. लेेकिन बिहार सरकार ने बुनकरों को सुविधा देने के बजाय उनके पुस्तैनी धंधे को ही बंद कराने का निर्णय लिया है.

वस्त्र उधोग बुनकर सेवा समिति के अध्यक्ष प्रेम नारायण पटवा ने बताया कि मानपुर में 12 हजार पावरलूम हैं. जिसमें करीब 30 हजार से अधिक बुनकर एवं मजदूर काम करते हैं. पावरलूम से निकलने वाले पानी से कोई प्रदूषण नहीं होता है. इसकी जांच कराई जाए. जांच कराने के लिए बुनकर तैयार हैं. प्रदूषण पर्षद ने एकतरफा निर्णय लिया है, जिसका विरोध हमलोग कर रहे हैं. वहीं एक और बुनकर नेता का कहना है कि बिहार में बुनकरों को उत्तर प्रदेश की तरह बिजली सस्ती नहीं मिलती है.

जिससे मानपुर में तैयार वस्त्र का दाम उत्तर प्रदेश के अनुपात में ज्यादा हो जाता है. जिसके कारण यहां के बुनकर अपने माल को उत्तर प्रदेश नही भेज पाते हैं. सरकार द्वारा बुनकरों को अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अभी तक अश्‍वासन ही मिलता रहा है. मानपुर के बुनकरों की मुख्य मांग है कि पटवाटोली सहित कई मुहल्ले में गिरने वाले रंगीन पानी की जांच पुन: कराई जाए, प्रदूषित जल को रोकने के लिए फिल्डर चैंबर बने, यहां के कारखाने से निकले रंगीन पानी को रोकने के लिए भागलपुर, बिहारशरीफ की तरह नियम लागू हो. ज्ञात हो कि मानपुर के वस्त्र उधोग का पटवाटोली, पिछले एक दशक से आई.आई.टी में बड़ी संख्या में जा रहे अपने छात्रों के कारण भी चर्चा में आया है.

अबतक यहां से करीब 100 से अधिक लड़के आई.आई.टी कर चुके हैं. जिनमें से अधिकतर देश-विदेश के विभिन्न बड़ी कंपनियों में कार्यरत हैं. मानपुर पटवाटोली को पहले लोग बिहार का मैनचैस्टर कहा करते थे. लेकिन हाल के वर्षो में वस्त्र उत्पादन के साथ ही यहां का पटवाटोली आई.आई.टी उत्पन्न करने के कारण भी चर्चित हो गया है. बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने यदि यहां के पावरलूम तथा वस्त्र उधोग को बंद करा दिया तो परोक्ष और अपरोक्ष रूप से लगभग 50 लाख से अधिक लोगों को बेरोजगार होना पड़ेगा.

यहां के बुनकर तथा रंगाई-छपाई के कारखाना संचालकों ने अभी से ही दूसरे धंधे में घुसने के लिए प्रयास शुरू कर दिया है. अगर यही स्थिति रही तो आने वाले समय में बिहार का मैनचैस्टर कहे जाने वाले मानपुर का वस्त्र उधोग, अन्य बंद हो गए उधोगों की श्रेणी में आ जाएगा. पावरलूम के संचालक एवं बुनकर राज्य सरकार से अन्य राज्यों की तरह सुविधा देने तथा कारोबार को बढ़ावा देने की मांग करने में लगे हैं, जिससे कि हजारों-हजार लोगों की रोजी-रोटी बरकरार रहे.

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