nirbhayaदिल्ली में निर्भया मामले में दोषी नाबालिग अपराधी को रिहा कर दिया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने भी कानून का हवाला देते हुए जुवेनाइल की रिहाई पर रोक लगाने से इंकार कर दिया. दिल्ली महिला आयोग ने उच्च न्यायालय में निर्भया मामले में दोषी नाबालिग अपराधी की रिहाई पर रोक लगाने की मांग की थी. क्या 16-18 साल के किशोर अपराधियों पर व्यस्क कानून के तहत मुकदमा चलना चाहिए या परीक्षण की उम्र कम की जानी चाहिए, इस मुद्दे पर देश और संसद में भी बहस छिड़ी. पहले ही लोकसभा में पास हो चुके इस जुवेनाइल बिल को अब जाकर राज्यसभा में भी पास कर दिया गया.

इस बिल के तहत जघन्य अपराधों का दोषी साबित होने पर अब नाबालिग को सजा देने की उम्र 18 से घटाकर 16 कर दी गई है. इस बिल के पास होने के बाद अब नाबालिग पर भी बालिग की तरह ही केस चलेगा. लेकिन इसके बाद भी एक सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या इस कानून के आ जाने से नाबालिगों के अपराधों में कमी आएगी?

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, भारतीय दंड संहिता आईपीसी के तहत पंजीकृत किशोर अपराधों में 47 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. 2010 में जहां नाबालिग द्वारा की गई अपराधों की संख्या 22740 थी, वहीं 2014 में ये मामले बढ़कर 33526 हो गए. किशोर अपराधों के ये आंकड़े अपने पीछे ढेर सारे सवाल खड़े करते हैं. हालांकि किशोर अपराध में 47 फीसद की वृद्धि हुई है, लेकिन पिछले पांच वर्षों में कुल अपराधों में किशोरों द्वारा किए गए अपराधों की संख्या 1 प्रतिशत से 1.2 के बीच है. अगर देखें तो पिछले पांच वर्षों में नाबालिग दोषियों में मुजरिम या दोबारा अपराध करने वालों की संख्या में गिरावट आई है. जहां 2010 में यह आंकड़े 12.1 प्रतिशत थे, वहीं 2014 में यह 5.4 प्रतिशत दर्ज की गई. 

18 वर्ष तक बच्चों के दिमाग पर एक शोध किया गया, जिससे पता चलता है कि उनके लिए अपने आवेगों को नियंत्रित करना एवं साथियों के दबाव को झेल पाना कठिन होता है. उनके दिमाग के विकास में भी सुधार किया जाना संभव है. इसलिए सरकार को चाहिए कि किशोर न्याय प्रणाली को ठीक से लागू करते हुए वह अपराधियों को अच्छे नागरिक के रूप में बदलने के लिए संसाधन विकसित करे.

स्थिति की गंभीरता को समझते हुए कुछ आंकड़ों पर नजर डालते हैं. 2010 से 2014 तक 16-18 वर्ष आयु वर्ग के किशोरों पर 844 हत्या(सभी हत्या के मामलों में 1.2 प्रतिशत) एवं 1488 दुष्कर्म( सभी दुष्कर्म के मामलों में 3.8 प्रतिशत) के मामले दर्ज किए गए. इन बच्चों में 56 प्रतिशत नाबालिग ऐसे परिवार से हैं, जिनकी वार्षिक आय 25000 रुपये है, जबकि 53 प्रतिशत नाबालिग या तो अनपढ़ या प्राथमिक विद्यालय तक शिक्षित हैं.

नाबालिगों द्वारा किए गए अपराध के आंकड़े

नाबालिगों को पहली नजर में देखने पर यह समझना मुश्किल है कि उनका अपराध से दूर-दूर तक कोई नाता भी है, लेकिन आंकड़ों पर नजर डालें तो इसे समझना कहीं से भी मुश्किल नहीं लगता. आंकड़ों में नाबालिगों पर पांच साल में अपराध के दर्ज और पंजीकृत मामले इस प्रकार हैं. 2010 में 22,740, 2011 में 25,125, 2012 में 27,936, 2013 में 31,725 2014 में 33,526 आपराधिक मामले दर्ज हुए हैं.

ये आंकड़े देश में नाबालिगों द्वारा किए गए अपराध की भयावह तस्वीर पेश करते हैं. ये आंकड़े तब हैं, जब इनमें से कई अपराध और उस अपराध को अंजाम देने वाले नाबालिग अपराधी का पता ही नहीं चलता और वो पुलिसिया रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं होते. जो कुल आपराधिक मामले पंजीकृत हुए हैं, वो इस प्रकार हैं. 2010 में 2,224,831, 2011 में 2,325,575, 2012 में 2,387,188, 2013 में 2,647, 722 2014 में 2,851,563 आपराधिक मामले पंजीकृत हुए हैं.

कुल अपराधों में किशोरों के अपराधों को देखें, तो एक राहत की खबर यह है कि ये अपराध पिछले पांच सालों में घटे हैं. 2010 लेकर 2014 तक क्रमश: कुल अपराध में उनकी संख्या 12.5, 11.4, 11.20, 9.5, 5.4 प्रतिशत है, लेकिन हम कुल आंकड़ों से न मिलाकर केवल किशोरों के अपराध को अलग से देखें, तो उनकी संख्या बढ़ी है, जो 2010 से लेकर 2014 तक क्रमश: इस प्रकार है 1, 1.1, 1.20, 1.20, 1.20 प्रतिशत है.

अगर हम हत्या और दुष्कर्म 2010 से लेकर 2014 तक आए कुल मामलों में किशोरों की संख्या देंखे, तो वो इस प्रकार हैं. हत्या के 69, 320 में किशोरों की संख्या 844 है और दुष्कर्म के 48143 में किशोरों की कुल संख्या 1488 है. इन सबके बीच यह सवाल पैदा होता है कि क्या कानून बना देना ही काफी है या समाज में उन अपराधों को पनपने देने के कारणों पर भी विचार करना चाहिए और इसके लिए समाज को आगे आना चाहिए, क्योंकि अपराध तो किसी के भी नाबालिग कर सकते हैं

आपराधिक किशोरों की शैक्षिणक योग्यता

शिक्षा का स्तर          किशोरों की संख्या

अशिक्षित              9,735

प्राथमिक                     14,188

मिडिल                             16,648

हाईस्कूल और उसके ऊपर        4,896

 कुल संख्या                  45,467

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