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नई दिल्ली : हाल ही में जनता की अपेक्षाओं को लेकर उत्तर प्रदेश में एक सर्वे हुआ जिसमें प्रदेश के करीब 25 हजार लोगों के विचार शामिल किए गए थे. अधिकांश लोगों ने बताया है कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवा का ढांचा पूरी तरह टूट चुका है. प्रदेश की बदहाल कानून व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं पर योगी आदित्यनाथ लगातार सवाल उठाते रहे हैं.

गोरखपुर और पूर्वांचल में अनजानी बीमारी (कथित तौर पर मैनेन्जाइटिस) से लगातार हो रही बच्चों की मौत का मसला योगी के कारण ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मसला बन सका. आखिरकार केंद्र सरकार ने गोरखपुर में एम्स बनाने की मंजूरी दी. सर्वे में 82 प्रतिशत लोगों ने सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जाहिर कीहै. उनका कहना है कि पुख्ता कानून व्यवस्था नई सरकार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए.

भ्रष्टाचार को लेकर भी लोग काफी चिंतित हैं. लोगों का कहना है कि विधायी और नौकरशाही के गठजोड़ से फल-फूल रहा भ्रष्टाचार सारी बीमारियों की जड़ है, जिसे खत्म किया जाना चाहिए. लोगों ने राज्य में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे में पूर्ण सुधार की जरूरत को रेखांकित किया है. 73 प्रतिशत से अधिक नागरिकों ने इच्छा जाहिर कीहै कि नई सरकार लालफीताशाही और भ्रष्टाचार को खत्म करे. योगी को इन चुनौतियों से दो-दो हाथ करना होगा.

योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बन कर मुख्यमंत्री की रेस में लगे तमाम दिग्गजों को पछाड़ दिया. जाहिर है, मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ ने फौरन ही अपने स्वर बदले. राज्यपाल राम नाईक द्वारा प्रदेश में सरकार गठन का आमंत्रण मिलते ही योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अभियान ‘सबका साथ – सबका विकास’ की भावना के साथ वे खड़े हैं और उत्तर प्रदेश में उसे शत प्रतिशत लागू कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं. सही है कि योगी के सामने तमाम चुनौतियां खड़ी होंगी. योगी के रेस जीत लेने से कई सियासी लोगों को काफी परेशानी हो रही होगी. इसका मुकाबला करते हुए योगी को विकास के रास्ते पर चलना होगा.

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