आज सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. सेवानिवृत्त जज पुत्तासामी सहित 31 लोगों ने आधार की वैधानिकता को लेकर कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आज बड़ा फैसला सुनाया है.

आपको बता दें कि आधार कार्ड को लेकर सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में 17 जनवरी से शुरु हुई थी और इस पर कोर्ट ने 10 मई को फैसला सुरक्षित रख लिया था और आज बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने आधार को लेकर बड़ा फैसला सुनाते हुए इसकी अनिवार्यता को बरकरार रखा है.

बता दें कि केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले आने से पहले कहा था कि जिनके पास आधार कार्ड नहीं है उन्हें किसी भी प्रकार के सरकारी लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता है.

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आधार की अनिवार्यता बरकरार रहेगी और आधार को पैन कार्ड से जोड़ने का फैसला भी बरकरार रहेगा और कोर्ट अधार को बैंक से जोड़ने की अनिवार्यता को खारिज कर दिया.


इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कुछ शर्तों के साथ आधार की वैधानिकता बरकरार रहेगी.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आधार को मोबाइल से लिंक कराना जरूरी नहीं है.

बैंक से आधार को लिंक कराने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने किया रद्द.

आधार से निजता हनन के सबूत नहीं मिले हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अवैध प्रवासियों को आधार न दिया जाए.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्कूलों में आधार जरूरी नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला पढ़ते वक्त कहा कि आधार से बड़े वर्ग को फायदा हुआ है.

यूजीसी और निफ्टी जैसी संस्थाए आधार नहीं मांग सकती है.

कोर्ट ने कहा कि प्राइवेट पार्टी भी डेटा नहीं देख सकती है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा बायोमेट्रीक डेटा कि नकल नहीं की जा सकती है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अधार आम आदमी की पहचान है.

जस्टीस सिकरी फैसला पढ रहे हैं.

वहीं अधार कार्ड के फैसले को लेकर महाअधिवक्ता मुकूल रोहतगी ने अधार      कार्ड के फैसले को लेकर कहा कि मुझे उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला अधार के पक्ष में आएगा, क्योंकि कोर्ट का ये फैसला काफी दुरागामी होने जा रहा है.

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