गौतम शांतिलाल अदानी जन्म 24 जून 1962 हुआ है ! माँ शांताबेन, उनके सात भाई – बहन है ! उनके माता-पिता गुजरात के उत्तरी भाग के धराद शहर से आए थे ! उनके पिता एक छोटे कपडा व्यापारी थे ! गौतम अदानी की शिक्षा अपने पिता के व्यवसाय में ध्यान देने की वजह से, वाणिज्य स्नातक के दुसरे वर्ष के बीच में ही छोडनी पडी है ! और 1978 में महेंद्र ब्रदर्स के लिए हीरा सॉर्टर के रूप में काम करने के लिए मुंबई चले गए थे !


1981 में उनके बड़े भाई महासुखभाई अदानी ने, अहमदाबाद में एक प्लास्टिक इकाई खरीदने के बाद, उसके संचालन और प्रबंधन के लिए, गौतम अदानी को आमंत्रित किया ! यह उद्यम पॉलिविनाइल क्लोराइड (पीवीसी) आयात के माध्यम से, वैश्विक व्यापार के लिए अदानी का प्रवेशद्वार बन गया ! 1985 में उन्होंने लघु उद्योगों के लिए प्राथमिक पॉलिमर का आयात करना शुरू किया ! 1988 में अदानी ने अदानी एक्सपोर्ट की स्थापना की, जिसे अब अदानी एंटरप्राइजेज के नाम से जाना जाता है ! जो अदानी समुह की होल्डिंग कंपनी है ! मूल रूप से कंपनी कृषि और बिजली वस्तुओं का कारोबार करती थी !
1991 में आर्थिक उदारीकरण की नीति लागू होने के बाद, उनकी कंपनी के लिए, बहुत ही माकूल साबित हुई है ! और उन्होंने धातु, कपड़ा, और कृषि उत्पादों के व्यापार में अपने कारोबार का विस्तार करना शुरू कर दिया ! 1994 में गुजरात सरकारने मुंद्रा पोर्ट की प्रबंधकीय आउटसोर्सिंग की घोषणा की ! और 1995 में अदानी को उसका ठेका मिल गया ! 1995 में उन्होंने पहली जेट्टी स्थापित की. मुल रुप से मुंद्रा पोर्ट एंड स्पेशल इकॉनमिक झोन के द्वारा संचालित, परिचालन को अदानी पोर्ट्स एंड एसईजेड में स्थानांतरित कर दिया गया ! आज कंपनी सबसे बडी निजी मल्टी- पोर्ट ऑपरेटर है ! मुंद्रा बंदरगाह भारत में निजी क्षेत्र का सब से बड़ा बंदरगाह है, जिसकी प्रतिवर्ष करीब 210 मिलियन टन कार्गो संभालने की क्षमता है !


लेकिन इस बंदरगाह को अदानी समुह ने अपने कब्जे में लेने के बाद, हमारे देश के समुद्री क्षेत्र के लिए बनाए गए, पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन करते हुए, विश्व धरोहर’ मॅंग्रोव्ह’ को बंदरगाह के विस्तार हेतु, नष्ट करने की वजह से ! ग्रीन ट्रायबुनल ने 200 करोड़ का जुर्माना भरने का आदेश दिया था ! लेकिन अभितक वह जुर्माने की रकम भरना तो दूर की बात है, उल्टा बाद में जावडेकर नाम के एक मंत्री महोदय पर्यावरण मंत्री पदपर रहते हुए, बोले कि ग्रिनट्राब्युनल को ही बर्खास्त कर देते हैं ! न रहेगा बांस और न ही बजेगी बासुरी !
मतलब अदानी समुह का विकास जितना सिधा दिखाई दे रहा है ! वैसा है नही, उन्होंने हमारे देश के कानून तथा नियमों का उल्लंघन करते हुए ही, आज का मुकाम हासिल किया है ! और सरकारों ने उसे खुब उदार मन से, और मुख्य रूप से नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के बाद तो, अदानी समुह का अश्व चारो और दौड रहा है ! उस दौरान ही मुंद्रा पोर्ट पर 300 किलोग्राम नशिले पदार्थों का उतरने का मामला आया, और गया भी ! जबकि शाहरुख खान के बेटे के कुछ मिलिग्राम की मात्रा मे नशिले पदार्थ के आरोप में क्या कारवाई हुई है ? यह पूरे देश को मालूम है ! और उपर से वह भी झूठ निकला, सो अलग बात है ! लेकिन अदानी के कब्जे के मुंद्रा पोर्ट में इतनी बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थो का मिलने को लेकर कोई भी कार्यवाही नहीं हुई है ! और भारत की रक्षा को देखते हुए, इस तरह हमारे पोर्ट, तथा हवाई अड्डे, किसी प्रायवेट क्षेत्र को देना, हमारे देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने की बात है ! और राष्ट्रवाद तथा देशभक्ति का राग वर्तमान सत्ताधारी संस्था और उसका मातृसंघटन गाहे-बगाहे अलापने का काम करते रहते हैं ! हिटलर भी जर्मनी में यही करता था ! लेकिन हिटलर की जर्मन निष्ठा पर कोई उंगली नही उठा सकता ! यहां तो पुलवामा से लेकर, हमारी जमीन दखल करने के सवाल पर, चीन के बारे में चुप्पी साधने वाले लोगों के मुंह से राष्ट्रीयता या देशभक्ति की बात पाखंड लगता है !


उर्जा प्रकल्पों मे, आज भारत का सबसे बड़ा निजी क्षेत्र का उर्जा प्रकल्प बना है ! उसमें भी पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन करते हुए ! अदानी समुह की बीजली शाखा, अदानी पॉवर की स्थापना की गई ! और अदानी पॉवर के पास 4620 MW की क्षमता वाले थर्मल पॉवर प्लांट है, जो देश के सबसे बड़े निजी थर्मल पॉवर उत्पादों में शुमार होता है !छत्तीसगढ़ के एक मजदूर नेता ने हमारे साथ एक ऑनलाइन परामर्श में बताई गई बात है कि “छत्तीसगढ़ में एक थर्मल पॉवर प्लांट, बगैर राज्य सरकार के जानकारी से सिधा शुरू करने के पहले, एक अफसर ने अदानी को कहा कि ” आप मुख्यमंत्री से बात कर लिजिए ! ” तो अदानी ने कहा कि उसकी कोई आवश्यकता नहीं है !” इसका मतलब मुख्यमंत्री अदानी समुह के लिए कोई मायने नहीं रखता है ! कोई उससे बड़ी शख्सियत का वरदहस्त है ! तभी तो एक चुन कर आये हुए मुख्यमंत्री को अदानी कुछ नहीं समझते हैं !


इसपर से लगता है कि हमारे देश के सबसे बड़े सभागार जिसे लोकसभा बोला जाता है ! उस सभागृहमे अगर कोई सदस्य के द्वारा अदानी समुह को लेकर सवाल करने वाले सदस्यों की क्या गत होती है ? यह राहुल गांधी और वर्तमान में महुआ मोइत्रा के, संसद से सदस्यता से ही वंचित करने की कार्रवाई, भारत की संसदीय राजनीति में की सबसे संगिन घटना है ! पिछले साल ही मधू लिमये की शताब्दी समाप्त हुई है ! मधू लिमयेने अपने संसदीय कार्यकाल में भारत के कितने उद्योगपतियों और व्यापारिक घरानों के बारे में सवाल पुछने का रेकॉर्ड मौजूद हैं !
और जिस जवाहरलाल नेहरू को उठते – बैठते कोसने वाले लोगों को मालूम होना चाहिए कि ” मुंदड़ा प्रकरण में, तत्कालीन सत्ताधारी दल के ही सदस्य और तत्कालीन प्रधानमंत्री के दामाद, फिरोज गांधी के द्वारा पुछे गए सवाल पर, संबंधित कृष्णमाचारी को अपने मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था ! और यहां तो सवाल करने वाले सदस्यों की सदस्यता छीनने का काम हो रहा है !
पिछले दस सालों से संसद को वर्तमान सत्ताधारी दल की पंचायत जैसे बनाने के उदाहरण, राहुल गांधी और महुआ मोइत्रा के उपर की गई कार्रवाइयों के बाद लगता है ! कि नब्बे साल पहले के जर्मनी की संसद में तब्दील कर दिया जा रहा है ! हिटलर भी जर्मनी की संसद में 30 जनवरी 1930 में चांसलर के रूप में शपथ लेकर प्रवेश किया था ! और उसका भी जर्मन राष्ट्रवाद की आड़ में विरोधियों को इसी तरह से निपटने का इतिहास मौजूद हैं !


भारत के सबसे बड़े उद्योगपति बन चुके अदानी के कुछ काले कारनामे, 2002 में एम एस शूज के एक शीर्ष अधिकारी द्वारा धोकाधडी की शिकायत के बाद, गैर – जमानती वॉरंट के निष्पादन में दिल्ली पुलिस ने अदानी को गिरफ्तार किया था !
यह 61 साल का बंदा इस वक्त के प्रधानमंत्री 2001 में जब गुजरात के मुख्यमंत्री पदपर आसिन हुए थे, तबसे अबतक के बाईस सालों के सफर में नरेंद्र मोदी के सबसे चहेते उद्योगपतियों में इनका नाम नंबर एक पर है ! और वैसे भी गौतम अदानी ही है, जिन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान नरेंद्र मोदी को अपना प्रायवेट जेट विमान पांचसौ से अधिक संपूर्ण भारत में चुनावी सभाओं के लिए दे रखा था ! वैसे ही उन्होंने नरेंद्र मोदी और उनकी सत्ताधारी पार्टी भाजपा के लिए भारत के मुख्यधारा का मिडिया के शेयरों की खरीद फरोख्त करके उसे चीनी या रशियन मिडिया की तर्ज पर सिर्फ सरकारी मिडिया बनाकर रखने में अहं भूमिका निभाई है !
नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनने के बाद अदानी समुह ने , भारत और विदेशों में कई उर्जा और बुनियादी ढांचे के अनुबंध जितने में कामयाबी हासिल की है ! जनवरी 2023 मे, अमेरिका की शॉर्ट सेलिंग एक्टिविस्ट फर्म हिंडेनबर्ग रिसर्च द्वारा स्टॉक हेरफेर और धोकाधडी के आरोपों के बाद, अदानी और उनके परिवार की संपत्ति 50% से अधिक गिर गई है ! अक्तुबर 2023 तक अनुमानित यूएस डॉलर 54. 2 बिलियन जबकि फोर्ब्स रियल टाइम बिलिनियर्स सूची में 23 वे स्थान पर आ गया है ! टाइम्स मॅगझिन ने उन्हें 2022 में दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों में शामिल किया है !
2012 में गंभीर धोकाधडी जांच कार्यालय ( एसएफआई ) ने शेयरों की खरीद और बिक्री से संबंधित धोकाधडी और अपराधीक साजिश के लिए, अदानी सहित बारह आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था ! एसएफआई के अनुसार अदानी एग्रो ने कथित तौर पर अवैध गतिविधियां चलाने के लिए धन और शेयर उपलब्ध कराएं !


सितंबर 2020 में अदानी ने दिल्ली के बाद भारत के सबसे व्यस्त मुंबई आंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे में 74 %हिस्सेदारी कर ली है !
अगस्त 2022 में अदानी समुह की एक इकाई एएमजी मिडिया नेटवर्क्स लिमिटेड ( एएमएनएल ) ने घोषणा की कि, उसने राष्ट्रीय समाचार प्रसारक, एन डी टी वी के शेयरों में से 29. 18 % के मालिक आर आर पी आर होल्डिंग को खरीदने की योजना बनाई है, और अतिरिक्त 26% शेयरों को खरीदने के लिए खुली पेशकश की है ! एक बयान में एनडीटीवी ने कहा कि अदानी ने कंपनी के संस्थापकों, पूर्व पत्रकार राधिका रॉय और उनके अर्थशास्त्री पति प्रणय रॉय को सुचित किए बिना, किसी तिसरे पक्ष के माध्यम से उनकी हिस्सेदारी हासिल कर ली ! और यह सौदा बिना चर्चा, सहमति या नोटिस के बीना किया गया था ! इस बोली ने भारत में संपादकीय स्वतंत्रता को लेकर भी चिंता बढा दी, क्योंकि अदानी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके सत्ताधारी दल भाजपा के करीब माना जाता है ! दिसंबर 2022 तक अदानी को एनडीटीवी में सबसे बडी शेयरधारिता को नियंत्रित करने वाला बताया गया है ! द इकॉनॉमिस्ट ने कहा कि “अदानी द्वारा एनडीटीवी को खरीदने से पहले, समाचार चैनल सरकार का आलोचक रहा है ! लेकिन अब लापरवाह हो गया है ! ”
धोकाधडी के आरोप !


जनवरी 2023 में अदानी और उनके कंपनियों पर न्यूयॉर्क स्थित निवेश फर्म हिंडेनबर्ग रिसर्च द्वारा “अदानी ग्रुप: हाउ द वर्ल्डस थर्ड रिचेस्ट मैन इज पुलिंग द लार्जे स्ट कॉन इन कॉर्पोरेट हिस्ट्री” शिर्षक वाली एक रिपोर्ट में स्टॉक हेरफेर का आरोप लगाया था ! इसके बाद अदानी समुह के शेयरों में 45 अरब डॉलर की गिरावट आई ! घाटे के परिणामस्वरूप अदानी फोर्ब्स के अरबपति ट्रेकर पर दुनिया के तीसरे सबसे अमीर व्यक्ति से गिरकर 22 वे स्थान पर आ गए ! रिपोर्ट में समुह पर पर्याप्त कर्ज होने और अनिश्चित वित्तीय संकट होने का आरोप लगाया गया ! जिससे सात सूचीबद्ध अदानी कंपनियों के शेयरों में 3-7%की गिरावट आई ! यह रिपोर्ट अदानी एंटरप्राइजेज की अनुवर्ती सार्वजनिक पेचकश से पहले जारी की गई थी, जो शुक्रवार 27 जनवरी 2023 को खुली थी !

ओसीसीआरपी रिपोर्ट !
संगठित अपराध और भ्रष्टाचार रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (ओसीसीआरपी ) ने अगस्त 2023 में रिपोर्ट दी थी कि उनके पास ऐसे दस्तावेज है, जो साबित कर सकते हैं, कि कैसे अदानी समुह ने अदानी स्टॉक खरीदने और बेचने के लिए व्यक्तियों और प्रमुख कंपनियों का इस्तेमाल किया ? और इस प्रकार भारतीय प्रतिभूति कानूनों को दरकिनार कर दिया, जो शेयर मुल्यो में हेरफेर को रोकने की कोशिश करते हैं ! OCCRP ने दो व्यक्तियों – नासिर अलि शाबान अहली और चुंग – लिंग को अदानी समुह के शेयरों में और उनकी ओर से करोड़ों डॉलर के स्टॉक ट्रेडिंग के लिए जिम्मेदार बताया है !


अदानी अपने निजी जीवन से मिडिया को दूर रखना पसंद करते हैं ! लेकिन उन्हें भारत के प्रधानमंत्री श्री. नरेंद्र मोदी और उनकी सत्ताधारी पार्टी भाजपा के बहुत ही करीबी होने के लिए व्यापक रूप से माना जाता है ! इससे भाई-भतीजावाद के आरोप लगाए गए ! क्योंकि उनकी कंपनीयोने सबसे ज्यादा भारत के उर्जा प्रोजेक्ट और बुनियादी ढांचे के सरकारी अनुबंध जितने में कामयाबी हासिल की है ! 2012 में भारत सरकार के एक ऑडिटर ने मोदी पर गुजरात की सरकारी गॅस कंपनी से अदानी को कम किमत पर इंधन देने का आरोप लगाया है ! और प्रांजलगुहा ठाकुरता ने तो ‘गॅसवॉर’ शिर्षक से पांचसौ पन्ने की किताब लिखी है ! जिस कारण उन्हें भारत की सबसे प्रतिष्ठित पत्रिका ईपीड्ब्लू (इकॉनमिक एंड पोलिटिकल विकली ) के संपादक पद से इस्तीफा तक देने के लिए मजबूर किया गया है !
हम, 1973-74 के बिहार के भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू किए गए आंदोलन के दौरान, साथ-साथ महाराष्ट्र में भी चलाया गया आंदोलन से निकले हुए लोगों में से एक है ! उस समय के भ्रष्टाचार के आंकड़े और अभी के आंकड़ों को देखकर सर चकरा जा रहा है ! और सबसे हैरानी की बात, वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उसी समय गुजरात में चल रहे नवनिर्माण आंदोलन में शामिल होने की भी बात है ! और इस आदमी ने प्रधानमंत्री बनने के पहले “न खाऊँगा और न ही खाने दुंगा” जैसे जुमले बोलते हुए, वर्तमान मुकाम तक, पहुंच ने की जद्दोजहद की हैं ! और भ्रष्टाचार के नाम पर, सिर्फ विरोधी दलों के लोगों को ब्लॅकमेल करते हुए, अपने दल में शामिल करना, मतलब कितना बड़ा पाखंड कर रहे हैं ? और अदानी समुह के साथ इनका क्या रिश्ता है ? यह समस्त भारत की जनता को मालूम होना चाहिए ! सिर्फ किसी ने मोदी नाम लिया, या अदानी – अदानी बोलने पर उनकी भारतीय संसद की सदस्यता खत्म करना, भारतीय संसदीय जनतंत्र का गला घोटना है ! और यह बिल्कुल भी नहीं होने देंगे, लाख विधानसभा के चुनाव तीस चालिस प्रतिशत मतदाताओं को भ्रमित कर के जितने को हम जित नही मानते हैं ! और दिन-प्रतिदिन भारत की संसदीय राजनीति का गला घोटने का काम नही होने देंगे !

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