भोपाल। मप्र में खंडवा लोकसभा उपचुनाव के लिए तैयारियां जोर पकड़ने लगी हैं। जहां कांग्रेस अपना प्रत्याशी तय कर मैदान संभाल लिया है, वहीं भाजपा फिलहाल प्रत्याशी को लेकर असमंजित है। इधर आरएसएस ने भी अपने सियासी मोहरे बैठाना शुरू कर दिए हैं। ये स्थिति भाजपा और संघ की आपसी जोर आजमाइश के नए संकेत दे रही है।
भाजपा के पूर्व सांसद नंदकुमार सिंह चौहान के निधन से खाली हुई खंडवा लोकसभा सीट उपचुनाव के मुहाने पर तैयार है दिखाई दे रही है। कांग्रेस ने अपने पिछले प्रत्याशी पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव को अघोषित हरी झंडी दे दी है। जिसके बाद से वे पिछले कई दिनों से अपने चुनाव क्षेत्र में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। कोरोना काल में दिवंगत हुए लोगों के परिवारों को सांत्वना देने जाने का उनका सिलसिला करीब दो माह से अधिक समय से चल रहा है। इस दौरान हजार से ज्यादा परिवारों से वे मुलाकात करने उनके घरों पर पहुंचे हैं। इन मुलाकातों में इस बात का ये खास ख्याल रखा जा रहा है कि पार्टी पदाधिकारी, कार्यकर्ता, वोटर या कांग्रेस समर्थक कोई व्यक्ति मुलाकात से न छूटे। लेकिन सांत्वना मुलाकात में इस बात पर भी जोर दिया जा रहा है कि विपक्षी दल का कोई ऐसा व्यक्ति भी बाकी न रहे, जिसके परिवार में किसी व्यक्ति का निधन हुआ है। कांग्रेस के इस मुलाकाती मिशन के जवाब में भाजपा ने खंडवा लोकसभा के विभिन्न गांवों में शिलान्यास अभियान छेड़ दिया है। लगातार शिलान्यास कार्यक्रम के जरिए भाजपा क्षेत्र विकास के सुनहरे सपने लोगों को दिखा रही है। हालांकि भाजपा अपने अधिकृत प्रत्याशी को लेकर फिलहाल किसी नतीजे पर नहीं है, यही वजह है कि इस चुनाव किस्मत आजमाने वाले सभी संभावित चेहरे मैदान पकड़े हुए दिखाई दे रहे हैं।

 

भाजपा के दावेदार अनेक
लंबे समय तक ये चर्चा गर्म रही कि बंगाल से अपनी जिम्मेदारी समेट चुके भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को यहां मैदान दिया जा सकता है। लेकिन पिछले दिनों कैलाश द्वारा इस बात को लेकर स्पष्टीकरण दे दिया गया है कि वे खंडवा जाकर चुनाव लड़ने में कोई रुचि नहीं रखते हैं। पिछले चुनाव एक निर्दलीय से शिकस्त खा चुकीं पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस ने भी इस चुनाव के लिए अपनी रुचि जाहिर कर दी है। जिसको लेकर उन्होंने वंशागत टिकट दिए जाने का विरोध किया था। उनका इशारा उन अटकलों को लेकर था, जो नंदकुमार सिंह चौहान के बेटे को टिकट दिए जाने को लेकर चल रही हैं। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी महज सद्भावना को आधार मानकर चौहान के बेटे को टिकट देती है तो यह भाजपा के लिए नुकसान और कांग्रेस के लिए आसान जीत का जरिया बन सकती है। वजह नंद के बेटे का गैर सियासी होना और उनका अपने क्षेत्र से पूरी तरह अलग थलग होना बताई जाती है।

इधर संघ की जमावट
सूत्रों का कहना है कि खंडवा लोकसभा चुनाव के जरिए संघ प्रदेश में अपना दबदबा कायम रखने की कोशिशों में लगी दिख रही है। यही वजह है संघ ने अपने खास सिपहसालार मंत्री मोहन यादव, ऊषा ठाकुर, प्रेम सिंह पटेल, इंदर सिंह प्रजापत को अलग अलग क्षेत्रों में सक्रिय कर दिया है।

कौन कहां सक्रिय :
मोहन यादव खरगोन
इंदर सिंह प्रजापत बागली
ऊषा ठाकुर खंडवा
प्रेम सिंह पटेल पंधाना

निगम की अटकलों से बढ़ी सरगर्मी
इधर सितंबर अक्टूबर में निकाय चुनावों की अटकलों के साथ उपचुनाव क्षेत्र में सरगर्मी बढ़ी है। इन चुनावों में टिकट दावेदारों ने पार्टी की झंडाबरदारी शुरू कर दी है। हालांकि अधिकृत तौर पर किसी पार्टी का प्रत्याशी घोषित नहीं किया गया है, लेकिन टिकट चाहने वालों ने फिलहाल पार्टी के लिए खुद की योग्यता और उपयोगिता जताना शुरू कर दिया है।

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