dogsसीतापुर में कुत्तों के हमले में एक दर्जन से अधिक बच्चों के मारे जाने के बाद सरकार को यह होश आया है कि राजधानी लखनऊ समेत प्रदेश के तकरीबन सारे शहर कुत्तों से परेशान हैं. आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए नियुक्त नगर निगम के कर्मचारी कुत्ता-प्रेमियों से परेशान हैं. कुत्तों के आतंक की शिकायत मिलने पर वे जहां भी जाते हैं, वहां कुत्ता-प्रेमी खड़े हो जाते हैं और उन्हें आवारा कुत्तों को ले जाने से रोकते हैं. इन कुत्ता प्रेमियों में बड़े अफसर, जज, नेता, पत्रकार और कई समाजसेवी होने का दावा करने वाले हैं, जो कुत्तों का शिकार होने वाले लोगों के प्रति कभी संजीदा नहीं रहते, पर कुत्तों के लिए परेशान जरूर रहते हैं. प्रदेश में कुत्तों का आतंक इतना गहरा गया कि मुख्यमंत्री तक को हस्तक्षेप करना पड़ा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिला प्रशासन, खास कर सीतापुर जिला प्रशासन को खौफनाक कुत्तों को शीघ्र काबू में करने का आदेश दिया.

उत्तर प्रदेश के सीतापुर शहर में मानवभक्षी कुत्तों को लेकर लोग दहशत में हैं. शासन-प्रशासन की कोशिशों के बावजूद कुत्तों का आतंक कम नहीं हो रहा है. कुत्ते आबादी के अंदर तक लोगों को निशाना बना रहे हैं. इनमें बच्चों की तो जान पर बन आई है. सीतापुर में ही आधिकारिक तौर पर अब तक 12 बच्चे कुत्तों का शिकार होकर अपनी जान गंवा चुके हैं. कुत्ता-प्रेमी कहते हैं कि कुत्तों की यह आक्रामकता उन्हें भोजन नहीं मिलने के कारण है. वहीं पशु विशेषज्ञों का कहना है कि गली-गली में खुले बूचड़खानों की वजह से आवारा कुत्तों को ताजा मांस के टुकड़ों, हडि्‌डयों और कटे हुए जानवर के उच्छिष्ठ खाने की आदत लग गई है. इस वजह से आवारा कुत्ते लगातार हिंसक होते चले जा रहे हैं. दूसरी तरफ अनाज बचाने की जागरूकता के कारण कूड़े में अनाज कम फेंका जाता है, जिससे कुत्तों को खाना नहीं मिल पा रहा है. कुत्ते जब घर का बचा खाना खाते थे, तो वे हिंसक नहीं होते थे.

सीतापुर की जिलाधिकारी शीतल वर्मा ने यह आधिकारिक तौर पर माना है कि जिले में कुल 12 बच्चों को आदमखोर कुत्ते अपना शिकार बना चुके हैं. साथ ही छह अन्य बच्चे कुत्तों के हमले में गम्भीर रूप से घायल हुए हैं. हालांकि स्थानीय लोग कुत्तों के हमले में मरने वाले बच्चों की तादाद 15 बताते हैं. बहरहाल, खौफनाक कुत्तों को पकड़ने के लिए लखनऊ और दिल्ली नगर निगमों से भी मदद मांगी गई है. आदमखोर कुत्ते ग्रामीण क्षेत्रों और सुदूर इलाकों में भी बच्चों को अकेला पाकर उन पर हमले कर रहे हैं. कुत्तों की संख्या अत्यधिक होने और उनका कोई निश्चित ठिकाना न होने के कारण दिक्कत आ रही है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुत्तों के हमले की घटनाओं को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और प्रशासन को सख्त निर्देश दिया कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए. योगी ने कहा कि खूंखार आवारा कुत्तों से निपटने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं और सम्बन्धित विभाग आपसी समन्वय स्थापित कर इन घटनाओं पर तत्काल नियंत्रण सुनिश्चित करें. इसके लिए जिला प्रशासन के अधिकारी, पुलिस विभाग, वन विभाग, पशु चिकित्सा विभाग, नगर पालिका और नगर पंचायत के अधिकारियों और कर्मचारियों की संयुक्त टीम बनाकर कारगर कार्रवाई करने का निर्देश जारी किया गया. लखनऊ और बरेली से विशेषज्ञों की टीम बनाकर इस काम पर लगाया गया है. स्कूली बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग और स्कूल प्रबन्धकों से सतर्कता बरतने और एहतियाती व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है. सभी निजी स्कूलों के प्रबन्धकों और प्राचार्यों को भी स्थिति से निपटने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा गया है.

51 अधिकारियों को नोटिस, अब ड्रोन रखेंगे निगरानी

आवारा कुत्तों के हमलों का मामला कानूनी शक्ल भी ले रहा है. इस पर न्यायिक कार्रवाई भी शुरू हो गई है. पांच मई को सीतापुर के अपर जिला मजिस्ट्रेट विनय पाठक ने जिले के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, 37 पशु चिकित्साधिकारियों, एक डीएफओ, एक एसडीओ और सभी 11 नगर पंचायतों और नगर पालिका के अधिशासी अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया. न्यायिक अधिकारी ने कहा है कि तहसीलदार सदर की जांच रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट हो चुका है कि कुत्तों के लगातार हो रहे हमलों के कारण समाज में अराजकता उत्पन्न हो गई है.

ऐसे आदमखोर कुत्ते मानव जीवन के लिए संकट बन गए हैं, इसलिए धारा 133 के तहत आवारा हिंसक कुत्तों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है. एडीएम ने इन सभी अधिकारियों से कहा है कि 15 दिन के अंदर कुत्तों की समस्या दूर करें. समस्या का समाधान नहीं होने पर सम्बन्धित अधिकारियों-कर्मचारियों पर कर्तव्य में लापरवाही और अनुशासनहीनता बरतने को लेकर विभागीय कार्रवाई की जाएगी. कुत्तों के हमले के प्रति सतर्कता दिखाते हुए प्रशासन अब नाइट-विजन कैमरों से लैस ड्रोन से कुत्तों पर निगरानी करने का भरोसा दिला रहे हैं. लखनऊ जोन के आईजी सुजीत पांडेय ने खैराबाद का दौरा करने के दौरान यह बात कही और अधिकारियों को इस बारे में आवश्यक निर्देश दिए.

उल्लेखनीय है कि सीतापुर जिले में खैराबाद थाना क्षेत्र के दर्जनों गांव आदमखोर कुत्तों का अड्‌डा बने हैं. एक दर्जन से अधिक बच्चों के मारे जाने के पहले भी कई ग्रामीण कुत्तों का शिकार हो चुके हैं. अभी जिन बच्चों की मौत हुई, उनमें से महज छह बच्चों का ही पोस्टमार्टम कराया गया. कुत्तों के हमले को पहले तो प्रशासन नजरअंदाज करता रहा, अखबारों की सुर्खियां बनने के बाद प्रशासन जागा. प्रशासन ने कुत्ते पकड़ने के लिए मथुरा, बरेली और लखनऊ से टीमें बुलवाईं. 22 आवारा कुत्तों को पकड़ने का दावा किया गया, जिन्हें लखनऊ के कान्हा उपवन में रखा गया है. नसबंदी करने के बाद कुत्तों को वापस छोड़ दिया जाएगा. ग्रामीणों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि गांव में रहने वाले कुत्ते मारे जा रहे हैं, जबकि आदमखोर कुत्ते आज भी बच्चों पर हमला कर रहे हैं. आदमखोर कुत्तों से प्रभावित गांव बद्रीखेड़ा, कुलिया, गुरपलिया, महेशपुर, टिकरिया, भगौतीपुर के लोगों का कहना है कि बीते कई महीनों से बच्चे और पालतू जानवर आदमखोर कुत्तों का शिकार बन रहे हैं, लेकिन प्रशासन तंत्र न हिंसक कुत्तों को पकड़ सका और न पीड़ित परिवारों की मदद कर सका.

प्रशासन और वन विभाग के अधिकारी  सजग होते तो आक्रामक कुत्तों को पहले ही पकड़ लिया गया होता. प्रशासनिक अधिकारियों को घूसखोरी और वन विभाग के अधिकारियों को कीमती पेड़ कटवाने से फुर्सत कहां है. पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री रामलाल राही तो पालतू कुत्ते पकड़े जाने का विरोध कर रहे हैं और पीड़ित परिवारों के साथ अनशन करने की धमकी भी दे रहे हैं. कुत्ता-प्रकरण में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी कूद पड़े हैं. वे विधायक और एमएलसी को प्रभावित गांवों में भेजकर जांच करवा रहे हैं. पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद योगी सरकार के मंत्रियों पर रात्रि चौपाल में पिकनिक मनाने का आरोप लगाने में लगे हैं. वहीं आम लोगों के बच्चे कुत्तों का शिकार बन रहे हैं.

कुत्तों के शिकार हुए ये बच्चे

सीतापुर की डीएम शीतल वर्मा ने कुत्तों के शिकार हुए बच्चों के नाम सार्वजनिक किए हैं. उनके मुताबिक अलग-अलग तारीखों में कुत्तों के हमले में मरने वाले बच्चों में हिमांशी पुत्री महेश ग्राम मलुही सरैंया, सोनम पुत्री कैलाश ग्राम गोविंद सराय खैराबाद, रहीम पुत्र मोबीन ग्राम गुरपलिया खैराबाद, सगुन पुत्री सिद्धार्थ ग्राम खुरहेटा खैराबाद, अरबाज पुत्र माशूक अली ग्राम बद्रीखेड़ा खैराबाद, सानिया पुत्री रशीद ग्राम नेवादा खैराबाद, सावनी चौधरी पुत्री कैलाशनाथ ग्राम टिकरिया खैराबाद, खालिद पुत्र आबिद अली ग्राम गुरपलिया खैराबाद, कोमल पुत्री रघुनंदन ग्राम कुर्का इमलिया सुल्तानपुर, गीता पुत्री सुशील ग्राम मसूमपुर खैराबाद, धीरेंद्र पुत्र राजेंद्र निवासी बुरहानपुर शहर कोतवाली, कासिम पुत्र जाबिर ग्राम भगौतीपुर तालगांव के नाम शामिल हैं.

आम के बागों में घटना को अंजाम दे रहे हैं कुत्ते

आदमखोर कुत्ते खास तौर पर आम के उन बागों में बच्चों  को शिकार बना रहे हैं, जहां लोगों ने पॉल्ट्री फार्म बना रखे हैं. वहां बाग में कच्चे आम बीनने वाले छोटे बच्चों पर कुत्ते हमला कर देते हैं और वहां उन्हें कोई बचाने नहीं आता. खैराबाद थाने के फिरोजपुर गांव में आम के बाग में खेल रहे सात साल के अमन पर कुत्तों ने हमला कर दिया. कुत्तों ने अमन को बुरी तरह नोच डाला. गनीमत यह रही कि अन्य बच्चों का शोर सुनकर फेरी लगाने वाले बबलू ने डंडा लेकर बड़ी मशक्कत से बच्चे को बचाया. हिंसक कुत्ते बबलू पर भी पिल पड़े, लेकिन तब तक गांव वालों के जुट जाने के कारण कुत्ते भाग गए. खैराबाद में चारों तरफ अवैध बूचड़खाने भरे पड़े हैं. मीट, मुर्गे काटने वाले कसाई जानवरों के बचे हुए हिस्से फेंक देते हैं, जिसे खाकर कुत्ते हिंसक होते जा रहे हैं. योगी सरकार ने आदेश दिया था कि खुलेआम मांस की बिक्री नहीं होगी, लेकिन मुख्यमंत्री का आदेश मानता कौन है! खैराबाद अस्पताल के निकट सड़क पर दोनों तरफ मांस काटने का खुला धंधा प्रशासन और पुलिस की आमदनी का जरिया बन गया है.

यूपी को अपराधियों से अधिक कुत्तों से खतरा है’- अंकित गोयल

सीतापुर अकेला नहीं है. उत्तर प्रदेश के कई अन्य शहरों में भी हिंसक कुत्तों का आतंक है. इन शहरों में राजधानी लखनऊ भी शामिल है. राजधानी के पॉश इलाकों में आवारा हिंसक कुत्तों की भरमार लगी है. इसकी वजह यह है कि पॉश कॉलोनियों में रहने वाले बड़े लोगों पर पशु-प्रेम का फैशन छाया है. वे कुत्ता-प्रेम में इतने अंधे हैं कि उन्हें आम बच्चों की जिंदगियों का कोई ख्याल नहीं. शिकायत मिलने पर नगर निगम के कर्मचारी जब आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए आते हैं तो वे उन्हें भगा देते हैं. बड़े अफसरों की कॉलोनियों में तो हाल और बुरा है. उनका कुत्ता-प्रेम और प्रशासनिक रौब समाज का कुछ अधिक ही नुकसान कर रहा है. लोगों का कहना है कि बड़े अफसर और उनके बच्चे गाड़ियों से निकलते हैं, लेकिन भुगतना आम लोगों को पड़ता है. कुत्तों का शिकार होते हैं स्कूटर, साइकिल या पैदल चलने वाले आम लोग और उनके बच्चेे.

शाम ढलते ही लखनऊ की सड़कों पर आवारा कुत्तों का राज हो जाता है. इनका झुंड राहगीरों के लिए आतंक का सबब बन गया है. इन कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. नगर निगम वाले कहते हैं कि साहब लोग कुत्तों की नसबंदी करने का भी विरोध करते हैं. कहते हैं कि यह अमानवीय है. घूस लेकर जनता के साथ अन्याय करने वाले साहबों का कुत्तों के प्रति मानवीय रुख समाज में हास्य और घृणा दोनों का कारण बनता जा रहा है. विडंबना यह है कि अमौसी के पास करीब डेढ़ सौ एकड़ में बने कान्हा उपवन में अलग से आवारा कुत्तों के लिए भैरव चरण श्वानालय बना है, लेकिन सड़क पर आवारा घूम रहे कुत्तों को वहां पहुंचाए कौन! उनके रहनुमा तो बड़े-बड़े साहब और सामर्थ्यवान कुत्ता-प्रेमी हैं, जो समाज को शुद्ध और सुरक्षित रखने में आड़े आते हैं.

लखनऊ की राजभवन कॉलोनी, बटलर पैलेस कॉलोनी, दिलकुशा कॉलोनी, गुलिस्तां कॉलोनी, डालीबाग कॉलोनी जैसी तमाम पॉश कॉलोनियों में आवारा कुत्तों की भरमार दिखती है. आए दिन कुत्तों के हमले का शिकार होकर लोग सिविल अस्पताल और अन्य अस्पतालों में भीड़ लगाए रहते हैं, लेकिन कुत्ता-प्रेमियों को मानव की यह पीड़ा नहीं दिखाई देती. लखनऊ के नरही, कैसरबाग, ठाकुरगंज, चौपटिया, कैम्पवेल रोड, कैसरबाग, चौक, चारबाग, ऐशबाग, बालागंज, पत्रकारपुरम, लालकुआं, नेहरू इन्क्लेव, मॉडल हाउस, बटलर पैलेस कॉलोनी, डीजीपी ऑफिस के पास, उजरियांव समेत अन्य सभी जगहों पर आवारा कुत्तों के झुंड के झुंड दिखाई देते हैं. हाल में डालीगंज क्रॉसिंग के पास कुत्तों के झुंड ने 10 साल के मोहम्मद चांद को बुरी तरह नोच-खसोट डाला. कुत्ते इतने हिंसक थे कि राहगीरों के ईंट-पत्थर भी काम नहीं आए. आखिरकार बच्चे की मौत हो गई. स्थानीय लोगों ने स्पष्ट कहा कि डालीगंज क्रॉसिंग के आसपास गोश्त की अवैध दुकानों की कतार लगी है. इसके कारण कुत्तों की तादाद बढ़ गई है. मांस के फेंके हुए टुकड़े खाकर कुत्ते इतने खूंखार हो चुके हैं कि बच्चों को भी अपना निवाला समझने लगे हैं. यह गाड़ी वाले साहबों और कुत्ता-प्रेमियों को नहीं दिखता.

कुत्तों का आतंक अकेले सीतापुर जिले में नहीं है. अभी डेढ़ महीने पहले आजमगढ़ के गंभीरपुर बाजार के पास आवारा कुत्तों ने एक बच्चे को नोच-नोच कर मार डाला. यह घटना सरेआम हुई, लेकिन लोग खूंखार कुत्तों से बच्चे को बचा नहीं पाए. वाराणसी, गोरखपुर, बलिया, देवरिया, आजमगढ़, संभल, खुर्जा, बुलंदशहर, मेरठ, कानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बरेली समेत प्रदेश के करीब-करीब सभी जिले कुत्तों से त्रस्त हैं. एक बुजुर्ग सज्जन ने कहा, ‘यूपी के लोगों को अपराधियों से अधिक कुत्तों से खतरा है’.

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