झारखंड की राजधानी रांची से सटे खूंटी जिले में एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) की पांच महिला कार्यकर्ताओं का अपहरण कर सामूहिक दुष्कर्म के मामले के मुख्य आरोपी फादर अल्फांसो को दोषी करार देते हुए बाकी 6 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनायी गयी है। खूंटी जिला अदालत ने शुक्रवार को सभी आरोपियों जुनास मुंडा, बाजी समद उर्फ टकला, अयूब सांडी पूर्ति, जॉन जुनास तिड़ू, बलराम समद और फादर अल्फोंसो आइंद को सजा सुनायी।

इससे पहले, मंगलवार 14 मई, 2019 को इनके खिलाफ अंतिम सुनवाई हुई थी, जिसमें अदालत ने इन्हें दोषी करार दिया था। कोर्ट ने सजा के एलान के लिए शुक्रवार की तिथि तय की थी। जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम राजेश कुमार की कोर्ट ने दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद फादर अल्फोंसो आइंद समेत सभी छह आरोपियों को दोषी पाया था। आरोपियों के वकील ने अपने मुवक्किल को न्यूनतम सजा देने की अपील कोर्ट से की थी।

कोर्ट ने फादर अल्फांसो आइंद को षड्यंत्र रचने का दोषी पाया, तो पत्थलगड़ी के नेता जॉन जुनास तिड़ू और बलराम समद को उत्प्रेरक माना। जुनास मुंडा, बाजी समद और अयूब सांडी पूर्ति को अपहरण और गैंगरेप का दोषी करार दिया गया।

पिछले साल खूंटी जिले के कोचांग गांव में सामूहिक रेप की इस घटना ने पूरे राज्य में दहशत फैला दी थी। पिछले साल खूंटी जिले में मानव तस्करी के खिलाफ जागरुकता फैलाने का काम करने वाली 5 नाबालिग लड़कियों को 21 जून को कोचांग गांव में बंधक बनाकर उनके साथ गैंगरेप किया गया था। घटना के एक महीने बाद पुलिस जुलाई में गैंगरेप के मास्टरमाइंड को पश्चिम सिंघभूम जिले से गिरफ्तार कर सकी थी। गैंगरेप की घटना में आठ लोग शामिल थे, जिसमें से एक नोवेल सांडी पूर्ति अभी भी फरार है़। वह नक्सली संगठन पीएलएफआइ का सदस्य है। एक आरोपी, जिसका नाम आशीष लोंगा है, नाबालिग है। उसे जुबेनाइल जस्टिस बोर्ड को सौंप दिया गया है।