20-AUG-2014-JHARKHAND_DESK_आगामी नवंबर में होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक जोड़-तोड़ और गठजोड़ का एक नया दौर शुरू हो गया है. राज्य के स्थापना काल से लेकर अब तक हुए विभिन्न राजनीतिक घटनाक्रमों को पीछे छोड़ते हुए इस बार रिकॉर्ड जोड़-तोड़ की राजनीति हुई. कई छोटे राजनीतिक दलों का बड़े राजनीतिक दल में विलय हो गया. राज्य के सभी दलों के नेताओं को ख़तरा स़िर्फ भाजपा से है. ऐसे में नेताओं की पहली पसंद भाजपा बन चुकी है. झामुमो से लेकर झाविमो तक के नेता भाजपा में सीधे तौर पर प्रवेश कर रहे हैं. 81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा के चुनाव में प्रदेश के क्षेत्रीय दलों के अध्यक्ष संभावनाएं तलाश कर रहे हैं. किस दल से गठबंधन उनके हित में होगा, इसके लिए मंथन का दौर जारी है.
बिहार की तर्ज पर झारखंड में भी महा-गठबंधन का राजनीतिक प्रयोग शुरू हो चुका है. विधानसभा चुनाव से पहले एक नया गठबंधन सामने आया है, जिसका नाम झारखंड प्रगतिशील गठबंधन (जेपीए) रखा गया है. जय भारत समानता पार्टी के अध्यक्ष मधु कोड़ा, टीएमसी के प्रदेश अध्यक्ष बंधु तिर्की एवं झारखंड पार्टी होरो के अध्यक्ष एनोस एक्का ने यह नया गठबंधन बनाया है. मधु कोड़ा ने कहा कि जनता राज्य में परिवर्तन चाहती है, हम विकल्प देंगे. अन्य दल जुड़ने का प्रस्ताव देते हैं, तो हम विचार करेंगे. जेपीए राज्य की सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगा. सीटों के बंटवारे के संबंध में घोषणा रांची में होने वाले महा-सम्मेलन में की जाएगी. कोड़ा ने कहा कि झारखंड की जनता यूपीए और एनडीए से तंग आ चुकी है. हम भाजपा और कांग्रेस छोड़कर अन्य विचारधारा वाले दलों के साथ शर्तों पर समझौता करने के लिए तैयार हैं. पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उनके कार्यकाल में जितने कार्य हुए, उतने किसी अन्य मुख्यमंत्री के कार्यकाल में नहीं हुए. विधायक बंधु तिर्की ने कहा कि मधु कोड़ा उनके सर्वमान्य नेता होंगे और जेपीए का नेतृत्व करेंगे.
झारखंड दिशोम पार्टी (झादिपा) का भाजपा में विलय हो गया. साकची गरम नाला स्थित रामगढ़िया सभागार में आयोजित एक समारोह में झादिपा नेता सालखन मुर्मू एवं उनके समर्थकों ने भाजपा की सदस्यता ली. मुर्मू ने कहा कि आदिवासी मतदाताओं के बिकाऊ चरित्र, ईसाई आदिवासियों के असहयोग और संसाधनों के अभाव ने चुनावी दंगल में पीछे धकेल दिया. आदिवासियों के हित में हमें रणनीति बदलनी पड़ी और भाजपा में विलय का निर्णय लेना पड़ा. समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, पूर्व विधायक सरयू राय, दिनेशानंद गोस्वामी, अमरप्रीत सिंह काले आदि मौजूद थे.
लिट्टीपाड़ा के झामुमो विधायक साइमन मरांडी, तमाड़ के जदयू विधायक गोपाल कृष्ण पातर उर्फ राजा पीटर, पूर्व विधायक एवं झाविमो नेता दुलाल भुइयां, रांची के पूर्व विधायक गुलशन लाल अजमानी और झाविमो छोड़ चुके रांची के पूर्व डिप्टी मेयर अजय नाथ शाहदेव समेत कई नेता अपने समर्थकों के साथ भाजपा में शामिल हो गए. झारखंड विकास मोर्चा के विधायक समरेश सिंह, जयप्रकाश सिंह, चंद्रिका महथा एवं निर्भय शाहबादी ने दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात की और हरी झंडी मिलने के बाद भाजपा में शामिल हो गए. कांग्रेस किसी गठबंधन में शामिल होने की बजाय अकेले चुनाव लड़ना चाहती है. नेताओं एवं कार्यकर्ताओं का मानना है कि लोकसभा चुनाव में गठबंधन का लाभ कांग्रेस को नहीं मिला और पार्टी की करारी हार हुई. गठबंधन में शामिल होने से पार्टी को न केवल नुक़सान उठाना पड़ेगा, बल्कि संगठन भी कमजोर होगा. प्रदेश अध्यक्ष सुखदेव भगत का कहना है कि गठबंधन के साथ पार्टी दो चुनाव लड़ी, लेकिन नतीजे अपेक्षित नहीं रहे. ऐसे में संगठन खड़ा करने और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए अकेले चुनाव लड़ना हितकर है. उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं की इस भावना से आलाकमान को अवगत कराया जाएगा, क्योंकि गठबंधन पर अंतिम निर्णय आलाकमान को लेना है. बैठक में सह-प्रभारी ताराचंद भगोरा, प्रदेश अध्यक्ष सुखदेव भगत, विधायक दल के नेता राजेंद्र प्रसाद सिंह, जिलाध्यक्ष विशन सिंह बेदी, देबू चटर्जी एवं दीपिका पांडेय समेत राज्य भर के जिलाध्यक्ष मौजूद थे.
कुल मिलाकर यह साफ़ हो चुका है कि सबका मुकाबला भाजपा से होगा. प्रदेश में सबसे अधिक नुक़सान झारखंड विकास मोर्चा को हुआ है. इस पार्टी में भगोड़े नेताओं की संख्या सबसे अधिक रही. सुदेश महतो की पार्टी आजसू अस्तित्व रक्षा की लड़ाई अपने दम पर लड़ रही है, इस दल के नेताओं ने कहीं और जाना मुनासिब नहीं समझा.

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