चौधरी महबूब अली कैसर खगड़िया से नवनिर्वाचित सांसद हैं. उन्होंने राजग गठबंधन के तहत लोक जनशक्ति पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा. कैसर न स़िर्फ इस गठबंधन में देश के इकलौते मुस्लिम सांसद हैं, बल्कि खगड़िया संसदीय क्षेत्र से चुनाव जीतने वाले पहले मुस्लिम सांसद भी हैं. ग़ौरतलब है कि सोलहवीं लोकसभा में इस बार महज तेईस मुस्लिम सांसद जीतकर आए हैं. संसदीय इतिहास में यह दूसरा मौक़ा है, जब लोकसभा में मुसलमानों की भागीदारी इतनी कम रही है. खगड़िया बिहार के पिछड़े ज़िलों में शुमार होता है. क्षेत्र के विकास में स्थानीय सांसद की क्या प्राथमिकताएं होंगी, इसी मसले पर चौथी दुनिया संवाददाता अभिषेक रंजन सिंह ने उनसे बातचीत की, प्रस्तुत हैं उसके मुख्य अंश…
mehboob-Ali-Kaiser-(1)आप काफ़ी समय तक कांग्रेस में रहे और पार्टी में आपने कई महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारियां भी निभाईं. आख़िर ऐसी क्या वजह थी कि आप कांग्रेस से वर्षों पुराना नाता तोड़कर लोक जनशक्ति पार्टी में शामिल हो गए?
मैंने अपने सियासी करियर की शुरुआत कांग्रेस से की. सिमरी बख्तियारपुर से मैं तीन बार विधायक रहा और राजद-कांग्रेस गठबंधन सरकार में मंत्री भी बना. इसके अलावा, मैं बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष भी रहा. मेरे पिता जी भी पुराने कांग्रेसी नेता थे और उन्होंने भी कई वर्षों तक सिमरी बख्तियारपुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया. मैंने कांग्रेस की ग़लत नीतियों की वजह से पार्टी छोड़ी और लोक जनशक्ति पार्टी में शामिल हुआ. राजनीति में मेरे लिए आदर्शों के काफ़ी मायने हैं और यह संस्कार मैंने अपने पिता जी और दादा जी से हासिल किया है.
खगड़िया से पहली बार कोई मुस्लिम सांसद निर्वाचित हुआ है, लेकिन इस बार लोकसभा में मुस्लिम सांसदों की संख्या पहले के मुक़ाबले काफ़ी कम है. इस बारे में आपका क्या कहना है?
सबसे पहले मैं अपने संसदीय क्षेत्र की समस्त जनता का शुक्रगुज़ार हूं कि उसने लोजपा-भाजपा गठबंधन के प्रत्याशी के रूप में मुझे सेवा करने का अवसर प्रदान किया. वाकई यह हर्ष का विषय है कि पहली बार खगड़िया से कोई मुस्लिम सांसद निर्वाचित हुआ है, लेकिन मेरा मानना है कि जनप्रतिनिधि किसी जाति या संप्रदाय का हो, इससे कोई फ़़र्क नहीं पड़ता. एक सांसद के रूप में मेरे ऊपर काफ़ी बड़ी ज़िम्मेदारी है. अपने संसदीय क्षेत्र के लोगों की अपेक्षाओं को पूरा करना मेरा प्राथमिक लक्ष्य है. हालांकि, यह आश्‍चर्यजनक है कि इस बार लोकसभा में मुस्लिम सांसदों की भागीदारी अपेक्षाकृत कम है.
आप राजग गठबंधन में एकमात्र मुस्लिम सांसद हैं, लिहाज़ा मंत्रिमंडल के गठन से पहले मीडिया में आपके नाम की चर्चाएं भी जोरों पर थीं. मंत्री न बनने का कोई मलाल है आपको?
देखिए, मंत्रिमंडल में शामिल होने की यह कोई योग्यता नहीं है. मीडिया की बातें, तो मीडिया के लोग ही बता सकते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राजग सरकार से लोगों को काफी अपेक्षाएं हैं. इसलिए बतौर सांसद मेरे लिए सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी है कि मैं जनता की उम्मीदों को पूरा करूं. मंत्रिमंडल में शामिल होने या न होने का ़फैसला हमारी पार्टी के अध्यक्ष रामविलास पासवान जी और प्रधानमंत्री को लेना है. फ़िलहाल एक सांसद के रूप में अपने क्षेत्र का विकास करना मेरा पहला दायित्व है. अगर भविष्य में मुझे मंत्री बनाया जाता है, तो यह ज़िम्मेदारी भी मैं बखूबी निभाऊंगा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ समेत सार्क देशों के तमाम शीर्ष नेताओं ने शिरकत की. पड़ोसी देशों के साथ बेहतर संबंध बनाने में इस पहल के क्या मायने हैं?
भारत के राजनीतिक इतिहास में यह पहली घटना है, जब किसी प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में एक साथ इतने विदेशी राष्ट्राध्यक्षों ने हिस्सा लिया. यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की क़ाबिलियत और दूरदर्शिता है, जिसकी सराहना दुनिया भर के देशों में हुई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विकास के प्रति समर्पित हैं और यह विकास तभी संभव है, जब पड़ोसी मुल्क़ों से हमारे ताल्लुक़ात अच्छे होंगे. नरेंद्र मोदी ने इसकी शुरुआत कर दी है. उम्मीद है कि पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश समेत बाकी देश भी इस दिशा में आगे बढ़ेंगे.
लोकसभा चुनाव में जिस तरह राजग गठबंधन ने बड़ी जीत हासिल की, ख़ासकर भाजपा ने पहली बार स्पष्ट बहुमत हासिल किया. क्या यह माना जाए कि मुसलमानों ने इस बार नरेंद्र मोदी के प्रति विश्‍वास ज़ाहिर किया?
लोकसभा चुनाव में राजग गठबंधन को मिली ऐतिहासिक जीत यह बताने के लिए काफ़ी है कि सभी जातियों और धर्मों के लोगों ने हमारे गठबंधन में शामिल पार्टियों पर यकीन किया है. निश्‍चित रूप से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों को भी मुसलमानों का समर्थन मिला है. लखनऊ में भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह और वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मुसलमानों ने काफ़ी वोट दिया. सांप्रदायिकता के नाम पर वर्षों से मुसलमानों को भ्रमित करने की कोशिशें तथाकथित धर्मनिरपेक्ष पार्टियां करती रही हैं. इस बार लोकसभा चुनाव के नतीज़ों ने यह साबित कर दिया कि मुसलमान अब किसी के बहकावे में नहीं आएंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शख्सियत से सभी वाकिफ़ हैं. निश्‍चित रूप से उनकी अगुवाई वाली राजग सरकार मुसलमानों की बेहतरी के लिए प्रशंसनीय कार्य करेगी.
खगड़िया के विकास के लिए मुख्य प्राथमिकताएं क्या होंगी?
राष्ट्रीय स्तर पर खगड़िया की कोई पहचान नहीं है. दिल्ली जैसे महानगरों में इस ज़िले को कोई नहीं जानता. जिन लोगों का यहां से रिश्ता है, उनके लिए यह तकलीफ़देह है. इसकी मुख्य वजह है, यहां का पिछड़ापन. आज़ादी के साढ़े छह दशकों के बाद भी खगड़िया में न तो अच्छी सड़कें हैं और न ही लोगों को शुद्ध पानी और बिजली नसीब है. यहां कोई उद्योग-धंधे नहीं हैं. उच्च शिक्षण संस्थानों की यहां काफ़ी कमी है. नतीजतन, यहां के छात्रों को शिक्षा के लिए दूसरे शहरों की ओर रुख करना पड़ता है. बतौर सांसद मैं अपने संसदीय क्षेत्र के पिछड़ेपन को दूर करने की पूरी कोशिश करूंगा. मक्का उत्पादन में खगड़िया देश के अग्रणी ज़िलों में शामिल है, लेकिन अफ़सोस यहां मक्का आधारित उद्योगों की स्थापना नहीं हो सकी है. मैं इस मामले में सरकार का ध्यान आकृष्ट कराना चाहूंगा. खगड़िया कई नदियों से घिरा हुआ है, इस वजह से यहां हर साल बाढ़ आती है. बाढ़ के कारण जान-माल और फ़सलों की क्षति होती है. बेशक, यह प्राकृतिक आपदा है, लेकिन नेपाल से बातचीत करके जल प्रबंधन की दिशा में काम किए जा सकते हैं.
खगड़िया में भूमि विवाद एक बड़ी समस्या है. कई बार यह विवाद खूनी संघर्ष में भी तब्दील हो चुका है. क्या इस समस्या का कोई समाधान है?
खगड़िया ज़िले में कई दियारे हैं. हज़ारों हेक्टेयर में फैली इन ज़मीनों पर क़ब्ज़ा करने के लिए स्थानीय आपराधिक गिरोहों में वर्चस्व की लड़ाई छिड़ जाती है. ज़मीन संबंधी मामला हालांकि राज्य का विषय है, लेकिन मेरा मानना है कि शासनिक और प्रशासनिक स्तर पर प्रयास करने से ऐसे मामलों में कमी लाई जा सकती है. बिहार में होने वाली हत्याओं का वर्षवार ब्योरा देखें, तो उनकी जड़ में कहीं न कहीं भूमि विवाद ही रहे हैं. प

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