भोपाल। मुट्ठी भर तनख्वाह और उसके लिए भी सरकारी अनुदान की तरफ नजरें उठाए रखने की मजबूरी। पांच वक्त नमाज पढ़ाने और मस्जिद की देखरेख की जिम्मेदारी निभाने वाले ईमाम मुअज्जिन के आर्थिक हालात सुधारने की तरफ कोशिशें शुरू हो गई हैं। जमीयत उलेमा हिंद की मप्र इकाई ने इसके लिए पहल की है। इन्हें नमाज से बचे हुए वक्त में रोजगार से जोड़ने के लिए तकनीकी शिक्षा भी दी जाएगी।
जमीअत उलमा मध्यप्रदेश की टीम ने शहर की मस्जिदों में 24 घंटे सेवा देने वाले ईमाम मुअज्जिन को स्वरोजगार से जोड़ने की योजना बनाई है।
जिससे उनकी आमदनी में बढ़ोतरी हो सके।

ये हो रहे प्रयास
जमीयत उलेमा हिंद के प्रेस सचिव हाजी इमरान हारून ने बताया कि ईमाम मुअज्जिन की आय में बढ़ोतरी करने के लिए उन्हें विभिन्न तरह के प्रशिक्षण और स्वरोजगार से जोड़ने की योजना है। इसके तहत इन्फर्मेशन टेक्नोलॉजी केंद्र उर्दू, अरबी, हिंदी, इंगलिश भाषा मे शुरू किए जाएंगे। जिसमे ईमाम मुअज्जिन को कम्प्यूटर टाइपिंग आदि का प्रशिक्षण दिया जायेगा। इसके अलावा उन्हें उर्दू अदीब माहिर के कोर्स भी कराए जाएंगे। ये सभी प्रशिक्षण जमीअत उलमा मध्यप्रदेश द्वारा स्थापित केन्द्रों पर निःशुल्क दिए जाएंगे। ये केंद्र शहर में चार जगह खोले जाएंगे। हाजी इमरान ने कहा कि इसके अलावा मस्जिदों के ईमाम को छोटे कारोबार जैसे दीनी किताबों की बिक्री, टोपी, जानमाज, इत्र आदि की बिक्री भी कर सकते हैं।

ये है तैयारी
हाजी इमरान ने बताया कि
केंद्रों के लिए 30 कम्प्यूटर सिस्टम और 5 ट्रेनर प्रोजेक्टर ट्रेनर आदि का प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। जिससे कि ईमाम मुअज्जिन को ट्रेनिंग दी जा सके। ये केंद्र जल्द प्राम्भ किए जाएंगे।

Adv from Sponsors