khananसरकार के लाख प्रयासों के बावजूद, पश्चिम चम्पारण में अवैध खनन और नेपाल से होने वाली पत्थरों की तस्करी पर अंकुश नहीं लग पा रहा है. पत्थर और बालू की कीमतों में निरंतर आ रही उछाल ने माफियाओं को एक बार फिर से सक्रिय कर दिया है. पुलिस व वन विभाग के अधिकारियों की नाक के नीचे से खनन माफियाओं के वाहन निकल रहे हैं, बावजूद इसके, सब मुकदर्शक बने हुए हैं. ट्रैक्टर-ट्रॉली पर नेपाल से लादकर लाए जा रहे पत्थर धड़ल्ले से जिले के विभिन्न हिस्सों में पहुंच रहे हैं. सीमा पर बसे गांव इनरवा, बसंतपुर, वभनौली, मानपुर, भेड़िहरवा, पुरूषोत्तमपुर के कतिपय तस्करों ने अपना एक नेटवर्क बना रखा है.

दरअसल, सड़क निर्माण के पहले लेअर में मिस्कट यानि बालू मिश्रित पत्थर का प्रयोग होता है. जिले के बाहर से अगर इसे मंगाया जाता है, तो इसकी कीमत काफी बढ़ जाती है, जबकि तस्कर यहां 7 से 8 हजार रुपए प्रति 100 सीएफटी की दर पर यह उपलब्ध कराते हैं. हाल में बालू व पत्थर की किल्लत के दौरान अवैध धंधेबाजों की चांदी है. मकान बनाने वालों की मांग पर भी तस्कर रात के अंधेरे में ही बालू, मिस्कट और पत्थर तक पहुंचा देते हैं. जिले की ही मुख्य सड़कों पर सुबह चार-पांच बजे के दौरान बालू और पत्थर लदे ट्रैक्टर दौड़ते देखे जा सकते हैं.

सहोदरा व गौनाहा पुलिस कभी-कभार पत्थर व मिस्कट लदे ट्रैक्टर-ट्रेलर की जब्ती और अवैध कारोबारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करती है, लेकिन इसका कोई खास प्रभाव नहीं पड़ता है. यह प्रति महीने का करोड़ों का खेल है, जिसमें बहुत बड़ा सिंडिकेट शामिल है. नरकटियागंज-भिखनाठोरी मुख्यपथ में स्थित मोर बेलवा गांव में जंगल व पहाड़ी नदियों से बड़े पैमाने पर पत्थरों की तस्करी कर भंडारण किया गया है. पर्यावरण के नियमों के अनुसार 1 जुलाई से 30 सितम्बर तक घाटों से बालू निकासी पर प्रतिबंध रहता है. लेकिन रोक के दौरान भी बालू व मिस्कट का कारोबार व्यापक स्तर पर जारी है.

इस कारोबार में शामिल तस्कर इन दिनों वाल्मीकि टाईगर रिजर्व क्षेत्र को भी अपने अवैध खनन की जद में ले चुके हैं. जंगल व पहाड़ी नदियों के किनारे खासकर मानपुर व सहोदरा थाना क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर खनन कार्य चल रहा है. हालांकि वाल्मीकि टाईगर रिजर्व क्षेत्र में हो रहे खनन को लेकर वन विभाग गंभीर है. इस सेंसेटिव जोन में जारी खनन पर रोक लगाने के लिए विभाग ने अभियान चलाया है. वन प्रमंडल एक के डीएफओ गौरव ओझा ने इस बाबत जिलाधिकारी को एक पत्र भेजा है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि टाईगर रिजर्व के सेंसेटिव जोन में खनन विभाग के चालान की आड़ में बालू व मिस्कट का खनन होने की सूचना है.

जिसकी जांच कराई जा रही है. वहीं वाल्मीकिनगर, गोनौली, हरनाटांड़, चिउटाहां क्षेत्र के सेंसेटिव जोन में 0 से 3 किलोमीटर के दायरे में बालू व मिस्कट का खनन हो रहा है. इस अवैध खनन की शिकायत भारतीय थारू कल्याण महासंघ के अध्यक्ष दीप नारायण प्रसाद ने भी बगहा के एसडीएम घनश्याम मीणा से की है. बगहा एसडीएम श्री मीणा ने भी इसे गंभीर मामला बताते हुए कार्रवाई का आश्वासन दिया है.

नरकटियागंज के अनुमंडल पदाधिकारी चंदन चौहान ने अवैध खनन को लेकर जिलाधिकारी को एक प्रतिवेदन भेजा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि सहोदरा थाना के बनबैरिया घाट एवं लौकर फार्म तथा मानपुर थाना के परसौनी गांव में बहुत बड़े क्षेत्र में मिस्कट व बालू का अवैध उत्खनन किया जा रहा है. यहां बंदोबस्त घाटों पर सरकारी अनुमति का कोई बोर्ड भी नहीं लगाया गया है. बालू ठेकादार बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों के जरिए भी धड़ल्ले से तस्करी कर रहे हैं. नंबर की जगह पर ए और एफ लिखी गाड़ियों को भी चालान निर्गत किया जा रहा है. अंचलाधिकारी व थानाध्यक्षों को भी इन खनन क्षेत्रों की वास्तविक बंदोबस्ती की जानकारी नहीं है.

बीते 24 जून को भारत नेपाल सीमा पर तैनात इनरवा बीओपी के एसएसबी जवानों ने नेपाल से तस्करी कर लाए जा रहे एक ट्रैक्टर-टॉली नेपाली पत्थर को गश्ती के दौरान पकड़ा था, जिसमें इनरवा निवासी ट्रैक्टर चालक तबरेज अंसारी को गिरफ्तार किया गया था. 47 वीं वाहिनी एसएसबी के असिंसटेंट कंमांडेट संदीप प्रसाद ने बताया कि गिरफ्तार तबरेज के बयान पर इस धंधें में लिप्त सीमा क्षेत्र के एक दर्जन गांवों के धंधेंबाजों की शिनाख्त की गई है और कार्रवाई की जा रही है. पश्चिम चम्पारण के खनिज विकास पदाधिकारी मोहम्मद रेयाजुद्दीन का कहना है कि भारत-नेपाल की सीमा खुली है और तस्कर इसी का लाभ उठा रहे हैं.

जिले में तो वर्षों से पत्थर खनन पर रोक लगा है, लेकिन वास्तविकता यह है कि जिले के भंगहा व इनरवा थाना क्षेत्र के जरिए नेपाल से पत्थरों की तस्करी जारी है. उन्होंने यह भी बताया कि 6 करोड़ 10 लाख में बालू निकासी का ठेका दिया गया है, जिसके लिए 36 जगहों से निकासी होती है.  इसके अलावा कहीं से भी अवैध रूप से निकासी होती है, तो कार्रवाई की जाएगी और प्रतिबंधित तीन माह में कही से भी निकासी नहीं करने दी जाएगी. चंपारण रेंज के डीआईजी ललन मोहन प्रसाद ने भी सभी थानाध्यक्षों से अवैध खनन पर रोक लगाने को कहा है. अब देखना यह है कि इसबार पुलिस-प्रशासन की मुस्तैदी रंग दिखाती है या नहीं.

अवैध खनन में वर्चस्व को लेकर खूनी खेल 

वाल्मीकि टाईगर रिजर्व के मंगुराहा क्षेत्र के जंगलों की भू-संपदा यानि अवैध बालू के खनन में वर्चस्व को लेकर खूनी खेल भी होता रहा है. चम्पारण में ‘वीरपन्न’ के नाम से कुख्यात शेख मुस्तफा की इसी सााल इसके विरोधियों ने गोली मारकर हत्या कर दी. लगभग दो दशक से इस क्षेत्र में इसका दबदबा चलता आ रहा था. जंगल से लेकर इसके बीच बहने वाली पहाड़ी नदियों पंडई, दोहरम, बिरहा, हड़बोड़ा आदि के पत्थर व बालू की अवैध निकासी के धंधे पर इसका एकाधिकार था.

2006 में तो इसने अपनी ईमानदारी व कर्मठता के लिए चर्चित रहे डीएफओ बीपी सिंह पर गोली चला दी थी. संयोग से वे बच गए, लेकिन इस घटना में दो वनकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए थे. इसके बाद तो मुस्तफा का भय और अवैध कारोबार सिर चढ़ बोलने लगा. इस कारोबार में इसके विरोधी भी उपजे और विरोधियों के हाथों ही इसका साम्राज्य समाप्त हो गया. लेकिन 30 जनवरी 2018 की संध्या इसकी हत्या इसी के परसौनी गांव में नमाज पढ़कर घर लौटते समय गोली मार कर कर दी गई.

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