हरियाणा: भूख बड़ी ज़ालिम होती है अगर पेट की आग लग जाए तो बिना भरे मिटती भी नहीं। लेकिन हरियाणा के यमुनागर में एक नौकर की भूख ने उसे क़ातिल बना दिया। आरोप है कि घर के नौकर ने दो रोटी के लिए अपनी ही मालकिन की चाकू से गला रेतकर हत्या कर दी। गिरफ्तार नौकर से जब पुलिस ने पूछताछ की तो उसने बताया की उसे सात रोटी की भूख होती थी, लेकिन मालकिन पांच रोटी ही देती थी, जिससे वह भूखा रह जाता था। इस वजह से उसने अपने मालकिन की गला रेतकर हत्या कर दी। और इसके लिए उसे कोई पछतावा भी नहीं है।

पहले तो नौकर राजेश पासवान उर्फ़ राजू ने ही सभी को खबर भी दी। उसने सबको बताया की घर में मालिकिन की खून से लथपत लाश पड़ी है।घटना को अंजाम देने के बाद नौकर ने खुद ही मालिक को फोन किया और रिश्तेदारों को भी लेकर घर पहुंचा। मौत की सूचना पाकर जो लोग घर पर आए उन्हें नौकर पानी भी पिलाता रहा। लेकिन पुलिस को उसकी बातों पर थोड़ा शक हुआ और उससे जब सख्ती से पूछताछ की गई तो नौकर राजेश ने अपना गुनाह क़ुबुल कर लिया ।

मामले की तफ्तीश कर रहे डीएसपी प्रदीप राणा ने बताया, “नौकर राजेश पासवान ने अपनी 26 साल की मालकिन रोज़ी की की हत्या कर दी। रोज़ी के पति दीपांशु स्टोन क्रशर चलाते हैं। पुलिस को शक है की आरोपी ने मालकिन के साथ हत्या से पहले रेप भी किया था। फिलहाल पोस्टमाॅर्टम रिपोर्ट का इंतज़ार है।

आरोपी का कुबूलनामा
आरोपी नौकर राजेश पासवान ने बताया कि, ‘मालिक दीपांशु की शादी से पहले मैं ही खाना बनाता था। तब जो चाहे खाता था। पिछले साल शादी के बाद मालकिन ने मुझसे खाना बनवाना बंद कर दिया। वह साफ-सफाई और कपड़े धोने का काम कराने लगी। मुझे 7-8 रोटी की भूख लगती थी, लेकिन मालकिन 5 रोटी से ज्यादा नहीं देती थी। मैंने कई बार उनसे कहा भी कि मेरी भूख नहीं मिटती। मार्च में मेरे पिता का देहांत हो गया। मैं घर बिहार गया था। वहां से आया तो अपने हिस्से से एक रोटी कुत्ते को भी देनी होती थी।

उस रोज़ मुझे ज़ोर की भूख लगी थी। मैंने मालकिन से खाना माँगा लेकिन मालकिन ने कहा- दीपांशु के आने पर ही खाना बनेगा। बस मालकिन की यही बात मुझे बर्दाश्त नहीं हुई और मैंने किचेन से चाक़ू लाया और उनके बिस्तर पर ही उनका गला रेत दिया। मालकिन ने बचने की कोशिश भी की। मालकिन ने मेरे हाथ को दांत से काटा, लेकिन मैंने छुड़ा लिया। मैं करीब 5 मिनट तक गर्दन पर चाकू चलाता रहा।”

“हत्या के बाद चाकू को किचन में धोकर छिपा दिया। कमरे पर जाने लगा। गेट नहीं खुला तो छोटे गेट से कूदकर बाहर गया। वहां पर जाकर खून से लगे कपड़ों को धोया। करीब पौने दो बजे मालिक के मोबाइल फोन कर कहानी बनाई कि मालकिन गेट नहीं खोल रहीं। मैं डर गया था, लेकिन पता था कि कहीं भागा तो कहीं न कहीं से पकड़ा जाऊंगा। घर पर ही रहूंगा तो शायद कोई शक नहीं करेगा, यही सोचकर नहीं भागा।”

“जब पिता की मौत पर मैं घर गया था तो मालिक को फोन कर 30 हजार रुपए खाते में डलवाने को कहा था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया था। उस वक्त भी मुझे गुस्सा आया था।”