sadarनीतीश सरकार विकास एवं महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में नायाब कार्यों को अमलीजामा पहनाने के साथ-साथ पूर्ण शराबबंदी सख्ती के साथ लागू कर सुर्खियां बटोर रही है. लेकिन घपले-घोटालों और कानून व्यवस्था को लेकर बिहार अक्सर कलंकित होता जा रहा है. बढ़ती आपराधिक घटनाएं कभी सरकार के माथे का कलंक बन जाती हैं, तो कभी घोटालों को लेकर नीतीश सरकार कटघरे में खड़ी नजर आती है. पत्रकार राजदेव रंजन की निर्मम हत्या के बाद से खराब कानून व्यवस्था को लेकर नीतीश सरकार सवालों के घेरे में है, तो बिहार ‘‘कोख’’(गर्भाशय का ऑपरेशन) के नाम पर हुए फर्जीवाड़े से भी दागदार हो रहा है.

हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि किसी एक जिले में ‘‘कोख’’ के नाम पर हुई लूट की कहानी ठंडी भी नहीं पड़ती है कि किसी दूसरे जिले का मामला सड़कों पर जुगाली करने लगता है. पुर्णियां, बेगूसराय, कटिहार और सहरसा के साथ-साथ कुछ अन्य जिलों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत बीपीएल परिवारों को मिलने वाली मुफ्त स्वास्थ्य योजना के नाम पर हुई लूट की जांच अभी गति भी नहीं पकड़ पाई थी कि सुपौल, समस्तीपुर एवं मधेपुरा सहित कुछ अन्य जगहों पर ‘‘कोख’’ के नाम पर सरकार को चूना लगाए जाने का मामला गरम होने लगा है. यह बात अलग है कि लगभग सभी जिले के सिविल सर्जन एसीएमओ के मत्थे दोष मढ़कर अपने दागदार दिख रहे दामन को बचाने की कोशिश में लगे हैं, जबकि एसीएमओ लेबर डिपार्टमेंट के माथे ठीकरा फोड़ने की ताक में है.

‘‘कोख’’ के नाम पर सरकार को चूना लगाए जाने के मामले में गुनहगार कौन-कौन लोग हैं, यह तो जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा. लेकिन जानकारों का कहना है कि गर्भाशय सहित अन्य तरह की सर्जरी के नाम पर हुए फर्जीवाड़े में निजी नर्सिंग होम के संचालकों के साथ-साथ अन्य नौकरशाहों की भी मिलीभगत है. धरती के भगवान कहे जाने वाले चिकित्सकों के हाथ भी गुनाहों से इसलिए सने हैं, क्योंकि प्रसव वेदना से पीड़ित महिलाओं के गर्भाशय का ऑपरेशन होना दिखाकर उनके स्मार्ट कार्ड से हजारों रुपये की राशि निकाली गई है.

स्मार्टकार्ड धारियों अथवा उनके परिजनों को इस बात की भी जानकारी नहीं है कि उन्हें बीमारी क्या थी और उनका ऑपरेशन किस चीज का हुआ अथवा नहीं! कहा तो यहां तक जा रहा है कि छोटी-मोटी बीमारी से भी पीड़ित बीपीएल परिवार के लोगों को गंभीर बीमारियों का हवाला देकर न केवल कागज पर सर्जरी की गई, बल्कि बीपीएल स्मार्ट कार्ड के जरिए करोड़ों का फर्जीवाड़ा भी कर लिया गया. यहां तक कि अपने बूते नहीं होने वाली सर्जरी का ब्यौरा दर्ज कराकर भी कई निजी अस्पताल संचालकों द्वारा स्मार्ट कार्ड के जरिए सरकार को करोड़ों का चूना लगा दिया गया. कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि गर्भाशय सहित अन्य तरह की सर्जरी के नाम पर सरकार को चूना लगाने के लिए धंधेबाजों द्वारा ऐसे-ऐसे तिकड़म आजमाए गए, जिसकी कल्पना भी लोगों ने नहीं की होगी. कई जिलों में जांच के दौरान मामला आइने की तरह साफ भी हो गया है.

लेकिन सुलगता सवाल यह है कि इस गंभीर सत्य को स्वीकराने से सरकारी हुक्मरान आखिरकार कन्नी क्यों काट रहे हैं? ‘‘कोख’’ तथा अन्य सर्जरी के नाम पर कौन-कौन से निजी अस्पतालों के द्वारा सरकार को करोड़ों का चूना लगाया गया है और गुनहगार कौन-कौन हैं? उच्च पदाधिकारियों के द्वारा बार-बार आदेश जारी किए जाने के बाद भी आखिर जांच की गति में तेजी क्यों नहीं आ रही है? गुनाहगारों की कुंडली खंगालने में नौकरशाहों के हाथ आखिर क्यों कांप रहे हैं?  सवाल तो अनगिनत हैं, लेकिन यह कहने में शायद कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी कि खगड़िया सहित कुछ अन्य जिलों में गर्भाशय तथा अन्य सर्जरी के नाम हुई लूट के मामले की जांच अभी तक शायद इसलिए नहीं पूरी हो पाई है, क्योंकि चिंहित निजी अस्पतालों में से पांच निजी अस्पताल दबंगों के हैं और वहां हाथ डालना स्वास्थ्य महकमे के अधिकारियों को शेर के मुंह में हाथ डालने के बराबर प्रतीत हो रहा है. कुछ

अस्पताल तो इतने रसूखदार लोगों के बताए जा रहे हैं जिनके अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई तो दूर अभी तक शायद किसी ने उनकी तरफ बुरी नजर से देखना तक गंवारा नहीं समझा है. जांच में यह बात सामने आई है कि वित्तीय वर्ष 2012-2013 में खगड़िया जिले के आठ नर्सिंग होम के द्वारा कुल 1836 सर्जरी की गई, लेकिन केवल 124 मामलों की जांच हुई और बाकी को ठंडे बस्ते डाल दिया गया. सुपौल में 995, मधेपुरा में 1603 तथा बेगूसराय में 2503 स्मार्ट कार्डधारियों के गर्भाशय का ऑपरेशन किया गया, लेकिन अभी तक दस फीसद मामलों की भी जांच नहीं हुई. अब सवाल यह उठता है कि खगड़िया जिले में 1836 गर्भाशय ऑपरेशन की जानकारी होने के बावजूद जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग ने केवल 124 कार्ड की ही जांच क्यों की? जबकि 1836 स्मार्ट कार्ड के जरिए गर्भाशय के ऑपरेशन के नाम पर पैसों की निकासी हुई.

जानकारों का कहना है कि वित्तीय वर्ष 2012-2013 एवं 2014-2015 में गर्भाशय ऑपरेशन के नाम पर जमकर सरकारी धन को लूटा गया है. खगड़िया के सिविल सर्जन डॉक्टर रास बिहारी सिंह तथा एसीएमओ डॉक्टर मीरा सिंह भी मानती हैं कि ‘‘कोख’’ के नाम पर विभिन्न जिलों में सरकार को करोड़ों का चूना लगाया गया है. रासबिहारी सिंह कहते हैं कि स्मार्ट कार्ड संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की वजह से सभी 1836 मामलों की जांच संभव नहीं हो सकी है. 124 मामलों की जांच संतोषजनक पाई गई है. अगर विभाग को दस्तावेज उपलब्ध कराया गया, तो पूरे मामले की जांच संभव हो सकेगी. वैसे खगड़िया, पूर्णियां, सहरसा, सुपौल और बेगूसराय जैसे जगहों पर ही ‘‘कोख’’ के नाम पर सरकार को चूना नहीं लगाया गया है. लगभग सभी जिलों में इस तरह के अपराध को अंजाम देकर धंधेबाजों ने न केवल सरकार की चूलें हिला दी हैं, बल्कि सुशासन की हवा भी निकाल दी है. विभिन्न उच्च पदाधिकारियों द्वारा जांच की बात भी कही जा रही है और जांच भी चल रही है.

लेकिन इस गोरखधंधे में संलिप्त धंधेबाजों के हाथ इतने लंबे हैं कि किसी भी तरह मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है. देखने वाली बात यह होगी कि इस मामले में आखिर कार्रवाई क्या होती है और गुनहगारों के फेहरिश्त में कौन-कौन लोग शामिल होते हैं? लेकिन यह तो सत्य है कि दबंग और रसूखदार लोगों के द्वारा संचालित निजी अस्पताल में राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ लेने के लिए बीपीएल परिवार के लोगों को गंभीर ऑपरेशन का हवाला देकर फर्जी निकासी कर ली गई. अधिकांश रोगियों के गर्भाशय का ऑपरेशन दिखाकर फर्जी निकासी की गई है. जबकि हकीकत यह है कि पैथोलॉजी, अल्ट्रासाउंड, एक्सरे, दवा दुकान, कैंटीन, एंबुलेंस सहित अन्य सुविधाओं के नाम पर तय किए गए मानक पर शायद ही कोई निजी अस्पताल खरा उतर पा रहा है.

चौबीस घंटे चिकित्सक व प्रशिक्षित नर्सों के तैनाती की कल्पना ही बेमानी है. इस योजना के तहत तीस हजार रुपये हड़पने के लिए निजी अस्पताल संचालकों द्वारा मरीजों को तरह-तरह का प्रलोभन देकर जाल में फंसा लिया जाता है और अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों को मुुफ्त भोजन के साथ-साथ अधिकतम एक वर्ष तक यात्रा व्यय के नाम पर मिलने वाले सौ रुपये थमा-थमाकर चलता कर दिया जाता है. गर्भाशय अथवा अन्य तरह की सर्जरी होने की जानकारी तक मरीजों को नहीं होती. बहरहाल, कई वर्षों से चल रहे इस गोरखधंधे का पर्दाफाश होने के बाद आम जनता की नजरें धंधे में संलिप्त गुनहगारों पर हैं.प

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