8 दिसंबर के प्रस्तावित बंद के आह्वान के साथ खड़े होने का ऐलान

भोपाल। केंद्र सरकार जो बात एक्ट में नहीं लिख रही है उसका ही वादा बाहर कर रही है। सरकार अपने ऑफिशियल बयान में एमएसपी जारी रखने और मंडियां बंद न होने का वादा कर रही है, पार्टी फोरम पर भी यही कह रही है, लेकिन यही बात एक्ट में नहीं लिख रही। सरकार का कोई भी बयान एग्रीकल्चर एक्ट में एमएसपी की गारंटी देने की बराबरी नहीं कर सकता क्योंकि एक्ट की वादाखिलाफी पर सरकार को अदालत में खड़ा किया जा सकता है, जबकि पार्टी फोरम और बयानों का कोई कानूनी आधार नहीं है। अपनी शंका-कुशंकाओं को लेकर दिल्ली की सीमाओं से चली असंतोष की आग अब प्रदेश तक भी आने लगी है। अन्नदाताओं की इस मुश्किल घड़ी में हमारा फर्ज है कि उनके साथ खड़े हों और उनके हाथ मजबूत करें।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता मुनव्वर कौसर ने कहा कि वे खेती-किसानी की पृष्ठभूमि से जुड़े हुए हैं और किसानों का दर्द बेहतर समझ सकते हैं। इसलिए वे दिल्ली सीमाओं पर जारी आंदोलन को भी समर्थन करते हैं और प्रदेश में जारी गतिविधियों को भी सहयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि मैं किसान पुत्र हूं और खेतों में बोई हुई मेहनत के नतीजे में आने वाली फसल पर किसी दूसरे के कब्जे को बर्दाश्त नहीं कर सकता। मुनव्वर कौसर ने कहा कि इस बिल से ‘वन कंट्री टू मार्केट वाली नौबत पैदा होती नजर रही है। न्यूनतम समर्थन मूल्य खत्म होने का डर भी बना हुआ है। सरकार ने बिल में मंडियों को खत्म करने की बात कहीं पर भी नहीं लिखी है, लेकिन उसका इंपैक्ट मंडियों को तबाह कर सकता है। इसका अंदाजा लगाकर किसान डरा हुआ है। कौसर ने आंदोलन को उचित बताते हुए कहा कि एक बिल कांट्रैक्ट फार्मिंग से संबंधित है। इसमें किसानों के अदालत जाने का हक छीन लिया गया है। कंपनियों और किसानों के बीच विवाद होने की सूरत में एसडीएम फैसला करेगा। उसकी अपील डीएम के यहां होगी न कि कोर्ट में। उन्होंने कहा कि डीएम और एसडीएम जैसे पदों पर बैठे लोग सरकार की कठपुतली की तरह होते हैं, वे कभी किसानों के हित की बात नहीं कर सकते।

मुनव्वर कौसर ने 8 दिसंबर को देशभर में किए जाने वाले बंद के समर्थन में प्रदेश की गतिविधियों को उचित ठहराया है। उन्होंने कहा कि वे इस बंद के आह्वान का समर्थन करते हैं ओर बतौर किसान वे इसके सहभागी भी बनेंगे। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई महज किसानों की नहीं है, इसके प्रभाव में देश का हर नागरिक आने वाला है, इसलिए किसानों के इस मुश्किल वक्त में सबको साथ खड़े होने की जरूरत है।


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