साथियों नमस्कार, आज से तेरह साल पहले अंधश्रध्दा निर्मूलन समितीके नेता और मेरे अजिज दोस्त डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की हत्या पुणे में सुबह के मार्निंग वाक के दौरान 20 अगस्त 2013 के दिन, तथाकथित सनातनियों के द्वारा की गई है. लेकिन तेरह सालों के पश्चात भी उनके हत्या की जांच जिस तरह से चल रही है. वह देख-कर तो लगता है, कि मालेगाँव, नांदेड, समझौता एक्सप्रेस के बाॅम्बब्लास्ट के जैसे ही इस हत्या के आपराधीयों को बचाने का ही काम वर्तमान हिंदुत्ववादी सरकारे और उसके कब्जे में चल रही सभी जांच एजेंसियों से लेकर हमारी ज्यूडिशियल सिस्टम भी करते हूऐ दिखाई दे रही है.
हालांकि जिस सतातन संस्था का नाम इस घटना के पिछे पहले दिन से ही लिया जा रहा है. उसके गोवां स्थित रामनाथी नामके मुख्यालय में. मै 2013 के ही जुलै महिने में उसके द्वारा किया गया ठाणे के गडकरी रंगायतन नाटय़मंदिर तथा पनवेल के सिनेमा हाॅल मे जोधा-अकबर सिनेमा के प्रसारण के दौरान. और उसके बाद मडगाँव शहर के बीचोंबीच के रस्ते पर एक स्कूटर की डिक्की मे रखे हुए, बाॅम्बब्लास्ट की घटनाओं की जांच के लिए, मुझे गोंवा के आल इंडिया सेक्युलर फोरम ने बहुत ही आग्रह करते हूऐ जांच करने के लिए बुलाया था. और आयोजको ने मुझे मडगाँव के वैशाली नाम के होटल में ठहराया था. उसके सामने वाले रस्ते पर ही वह स्कूटर के डिक्की में रखा हुआ बाॅम्बब्लास्ट हुआ था . इस मौके पर सनातन संस्था के दो लोगों की मौत हो गई थी. इस जगह को देखकर मैनें सिधा रामनाथी मे सनातन संस्था के मुख्यालय में जाने का फैसला किया. गोंवा के मशहूर मंगेशी मंदिर के करीब के घने जंगल के अंदर चार एकड का कॅम्प है. जिसमें सनातन संस्थाका मुख्यालय खड़ा किया हुआ है. जो पहले पनवेल मे था. लेकिन ठाणे और पनवेल के बाॅम्बब्लास्ट की घटनाओं के बाद, सनातन संस्थाने इस जगह पर आने का फैसला किया है. मै सुबह के चायनाश्ते के बाद ही वैशाली होटल के सामने से एक टॅक्सी लेकर अधा घंटे के भीतर रामनाथी सनातन संस्था के हेडक्वार्टर के परिसर मे पहुंच गया था. लेकिन उनके स्वागत कक्ष में मुझे और आधा घंटा इंतज़ार करना पडा. उस दौरान घुसतेही मुझे स्वागत कक्ष के काऊंटर पर के रजिस्ट्रेशन की बही मे अपना नाम, पता, टेलीफ़ोन नंबर ईमेल एड्रेस, और वहां पर आने का उद्देश्य क्या है ? यह सब जानकारी लिखनी पडी. और चारपांचसौ स्केअरफिट के हाॅलनूमा स्वागतकक्ष मे बैठने के लिए कहां गया. और स्वागत कक्ष के काऊंटर के बाहर एक 30 – 40 साल की उम्र का आदमी लाल आंखेंवाला खडे – खडे मुझे गौर से घूरते हूऐ देखें जा रहा था. एक तो वह नशे में चूर होने की संभावना थी . या रातभर सोया नहीं होगा. यह उसका हूलिया देख-कर लग रहा था. मैने उस आधा घंटे से अधिक समय तक के इंतज़ार के दौरान स्वागतकक्ष मे सनातन संस्था के साहित्य का स्टाॅल पर की सभी पुस्तिकाओं को उठा-उठाकर, उलट-पलट कर देख कर हैरान हुआ. की लगभग हर पुस्तिका में महिलाओं को कौन से धातुओं के गहने पहनने से मानसिक रूप से क्या – क्या लाभ होता है ? तथा पुरुषों को कौन-सी वेशभूषा करने से क्या लाभ होता है ? से लेकर कुछ और भी पारंपरिक प्रथाओं का उदाहरण के लिए पूजा-पाठ तथा यज्ञयाग करने से हमारे त्योहारों को कैसे मनाने से क्या लाभ होता है ? जैसे गुरु पूर्णिमा इत्यादि का मानसिक दृष्टिकोण के अनुसार इन सभी विषयों का महिमामंडन करने का साहित्य की भरमार लगीं हुईं थीं ? मैनें उन्हें खरिदने की कोशिश की, तो मुझे कहां गया की यह सिर्फ डिस्प्ले के लिए है. बेचने के लिए नहीं है. सनातन संस्था के संस्थापक डाॅ. आठवले खुद प्रैक्टिसिंग मानसोपचारतज्ज्ञ रह चुके हैं. और उनकी विशेष रूप से संमोहन की कला से प्रभावित होकर ही जिस आदमी का मैनें स्वागत कक्ष में लाल आँखें वाले का उल्लेख किया है. उसने ही उन्हें यह रामनाथी की चार एकड की जमीन देकर, उन्हें गोंवा मे आग्रहपूर्वक लाने का काम किया है. यह सब कुछ मुझे पृथ्वीराज हजारे ने, मेरे आधे दिन से अधिक समय तक की उनके साथ की बातचीत मे बोला है. वैसे ही उनका सनातन प्रभात नाम का चार पन्नों का मराठी अखबार स्वागतकक्ष के टिपाॅय पर पडा था. तो उसे मैनें उठाकर लगभग पूरा ही पढ कर देखा. तो उसमे बारिश या देश- दुनिया की खबरो रोजमर्रा की खबरों की जगह पर, सिर्फ मेलघाट मे दो मुस्लीम लडकों ने एक हिंदू लडकी का अपहरण कर के उसके साथ अत्याचार किया. और उसी शिर्षक के सामने संपादकीय टिप्पणि बोल्डटाइप में लिखी हुई थी की “हिंदूओं को यह सब देख कर उनका खून क्यों गर्म होता है ? कबतक मुसलमानों के अत्याचारों को सहते रहेंगे ?” इसितरह की अलग- अलग जगहों पर के नामों के साथ वहाँ के मंदिर या उत्सवों के दौरान मुसलमानों के अत्याचारों के मसाला लगाकर लिखे हूऐ समाचारों से चारों पन्ने भरे हुए थे.और वही टिपिकल संपादकीय टिप्पणियाँ की हिंदूओं को गुस्सा क्यों नहीं आ रहा है? क्या हो गया है ? हमारे सनातन धर्म के लोगों को ? जैसे उकसाने की टिप्पणियाँ देखकर मुझे जैसे ही पृथ्वीराज हजारे मिले तो मैनें उन्हें कहा कि मै मराठी, अंग्रेजी, हिंदी, बंगाली भाषा के अख़बारों को भी देखते रहता हूँ. लेकिन आपका अखबार हमारे देश के अखबारों के कोड आफ कंडक्ट का आप कोई भी पालन नहीं करते हूऐ, सनातन प्रभात अखबार को चला रहे हो. और हर समाचार का सोर्स सिर्फ सनातन प्रभात के रिपोर्टर. यह सब देखही रहा था. तो अचानक एक उंचे कद के दूबले – पतले गोरे रंग के सफेद पजामा – कुर्ता पहने हुए सज्जन अंदर से आकर मुझे बोले की मै पृथ्वीराज हजारे हूँ. तो मैने तपाकसे पुंछा कि आप ही सनातन प्रभात के संपादक हो ना ? क्योंकि मैं उसी अखबार को देख रहा था. इसलिए उसमें संपादक का नाम भी देख लिया था. तो उन्होंने कहा कि हां मै ही संपादक हूँ. और यह अखबार मराठी के अलावा गुजराती, कानडी, हिंदी भाषा में मे भी प्रकाशित होता है. उन्होंने मेरा वहाँ पर आने का कारण पुछा. तो मैने सिधाही कहां की मै आल इंडिया सेक्युलर फोरम का संयोजक हूँ. और सनातन संस्था का नाम ठाणे , पनवेल तथा मडगाँव के बाॅम्बब्लास्ट की घटनाओं मे उछलकर आया है. तो मैने सोचा की क्यों नहीं सनातन के मुख्यालय में जाकर इसके बारे में जानकारी हासिल की जाए ? क्योंकि अभीतक मैनें जितनी भी आतंकवादी घटनाओं की जांच की है. उन सभी जगहों पर जाकर ही की है. उदाहरण के लिए मालेगाँव के दोनों( 2006 – 2008) विस्फोट तथा नांदेड के भी दोनों विस्फोट (अप्रैल 2006) तथा नागपुर के आरएसएस के हेडक्वार्टर के पास हुआ (1 जून 2006) का तथाकथित फिदायीन हमले से लेकर 2006 के सितंबर के अंतिम सप्ताह में हुआ खैरलांजी दलित अत्याचार की घटनाओं से लेकर गुजरात, भागलपुर, भिवंडी, धुलिया, जलगांव, के दंगों की भी जांच करने का प्रयास मैनें अपने कुछ साथियों के साथ किया है. तो उन्होंने कहा कि हमारे पास आपके पहले सीबीआई, आईबी, तथा स्थानीय इंटेलिजेंस के भी लोग आए हैं. लेकिन उनमेसे किसिने भी नहीं कहाँ कि हम लोग जांच करने के लिए आए हैं. सभी ने यही कहा कि हम मंगेशी के मंदिर में आए थे. तो पता चला कि सनातन संस्था का भी मुख्यालय पास मे है, तो जस्ट घुमने के लिए आए हैं. लेकिन आप पहले आदमी है, जिसने बहुत ही सरलता से कह दिया कि मैं जांच करने के लिए आया हूँ. यह सुनकर मुझे बहुत अच्छा लगा. क्यों कि हमे मालूम है कि हमारे यहां कौन और किस बात के लिए आता है. इसका अंदेशा हमे तुरंत बाद ही लग जाता है. लेकिन लोग कभी भी सिधा नहीं बोलते हैं. तो मैने कहाँ कि “मेरे आदर्श महात्मा गाँधीजी होने की वजह से मै कभी भी झूठ नहीं बोलता हूँ. तो उनसे जब सिधा ही तीनों घटनाओं मे सनातन संस्था के नाम आ रहा है. और मडगाँव की घटना में तो आपके दो भक्त ही मारे गए, वह स्कूटर भी उनमे से एक के नाम पर ही थी. जिसकी डिक्की में के बमविस्फोट हुआ है. इसलिए मुझे रामनाथी के मुख्यालय में आना पडा है. और जब आप खुद सनातन प्रभात के मुख्य संपादक ही हो तो मेरे लिए भी सनातन संस्था के मुख्य प्रवक्ता के रूप में आपको मिलकर आप से सिधी बात करने का मौका मिला रहा है. तो कृपया आप ही इन तीनों घटनाओं के बारे में जानकारी दिजिए. “तो उन्होंने अपने ही अखबार की उसी समय के एक समाचार को मुझे दिखाते हूऐ कहा कि हमे गृहमंत्रालय ने क्लिनचिट दी है. मैनें कहा की यह तो खुद आपके अखबार का समाचार है. और आपके हर समाचार का सोर्स भी आपके अपने ही प्रतिनिधियों का है. तो उन्होंने कहा कि हमारे अखबार के प्रतिनिधि आपके गृहनगर नागपुर में भी है. इसलिए हमें किसी और न्यूजएजेंशिओ पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है. हमारे लोग तो 115 देशों में भी है. वगैरे- वगैरे सुनही रहा था. तो कुछ विदेशी महिलाओं को हाथों में पूजा की थाली तथा टिपिकल मराठी नौ गज की साड़ी पहन कर कुछ महिलाओं को देखा. और वैसे ही पंद्रह साल से निचे उम्र के 10- 15 छोटे बच्चे के समूह में टिपिकल मराठी लोगों के जैसे धोती पहनकर शरिर के उपर का हिस्सा खुला तथा माथे पर चंदन और गेरुआ रंग का टिका लगा हुआ, कुछ बच्चों को भी झुंड के साथ देख-कर मैनें उन्हें पुछा कि यह बच्चे कौन है? तो उन्होंने कहा कि “यह सनातनी हिंदू धर्म के पूजा-पाठ यज्ञयाग – मंत्रोच्चार के साथ करने की विधियों का प्रशिक्षण के लिए आए हैं.” तो मैने पुछा कि इनमें कौन – कौन से जातियों के बच्चे है ? तो उन्होंने कहा कि पिछड़े वर्ग के लोग गरिबी की वजह से अपने बच्चों को हमारे यहां नहीं भेजपाते है . इसलिए सभी के सभी सवर्ण समाज के ही बच्चे हैं.” तभी उन्होंने कहा कि दोपहर के भोजन का समय हो गया है. आपका भोजन हो गया है ? मैनें कहा कि मै सुबह नाश्ता कर के निकला हूँ. इसलिए अभी भोजन नहीं किया. तो उन्होंने कहा कि आपकों आपत्ति नहीं हो तो हमारे मेस में चार पांच सौ लोगों का भोजन बनता है. इसलिए आप भी मेरे साथ ही भोजन कर सकते हो. मैने कहा कि मेरी टॅक्सी का ड्रायव्हर भी शायद भोजन करेगा तो चलेगा क्या? तो उन्होंने कहा कि “बिल्कुल चलेगा आप उसे भी साथ ले लिजिये. ” मै बाहर पार्किंग में खड़ी टॅक्सी के पास जाकर ड्रायवर को भोजन के लिए बुलाया, तो उसने कहा कि “मुझे भूक लगीं थी तो, मै बाहर से खाना खा कर आया हूँ.” तो मै वापस आकर पृथ्वीराज हजारेजी के साथ डायनिंग हॉल मे जाकर देखा तो कम- से – कम सौ से अधिक संख्या में लोग खाना खा रहे थे. हम भी उन्हीं के बगल में खाली खुर्चियों मे बैठने के बाद थाली में खाना परोसा गया, शुद्ध शाकाहारी भोजन मे दो सब्जियों के साथ अंकूरित दाल दही की एक कटोरी तथा सलाद और चटनी आचार के साथ काफी स्वादिष्ट भोजन की मैनें खाते- खाते ही तारिफ की. तो वह मुझे किचन से लेकर बर्तन धोने की व्यवस्था से लेकर अनाज सब्जीयो को रखने की जगह से लेकर बीच की खुली जगह पर यज्ञवेदी की जगह इशारा करते हूऐ दिखाई. तथा कुछ और भी बिल्डिंगों मे जहा डिटिपी से लेकर कुछ काॅम्पूटर पर काम कर रहे लोगों से लेकर कुछ और भी अन्य लोगों से उन्होंने मुझे वहां पर काम करने वाले कुछ लोगों से परिचित करवाया. जिसमें कोई पोस्ट ग्रॅज्युएट से लेकर इंजिनिअरिंग की शिक्षा किऐ हूऐ भी मिले. और एक डॉ. ढवळीकर नाम की गोवा मेडिकल कालेज की मायक्रोबायालाॅजी की प्रोफेसर के पद से इस्तीफा देकर आई हुई महिला से भी परिचय करने के बाद मैनें पुछा की सुधीर ढवळीकर जो वर्तमान समय में गोंवा के मंत्रिमंडल में मंत्री है, वह आपके कौन है? तो उन्होंने कहा कि मेरे पति है. खुद पृथ्वीराज हजारे सिविल इंजीनियरिंग के अपने खुद के कन्स्ट्रक्शन के काम को छोड़कर सनातन संस्था मे शामिल हुए है .
मेरी इस यात्रा के बाद नागपुर में वापस आने के बाद ही मुझे डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की मराठी किताब ‘तेजातून तिमिराकडे’ के राजहंस प्रकाशन से फोन आया था कि “इस किताब का नागपुर में प्रकाशन के कार्यक्रम में आपको इस किताब पर बोलने के लिए डॉ. नरेंद्र दाभोलकर ने आपका नाम दिया है. तो क्या आप इस कार्यक्रम में आ सकते हो ? “तो मैने कहा कि “मुझे किताब को पढ़ने के के बाद ही बोलना आता है. इसलिए अगर कार्यक्रम के पहले किताब मिली, तो मै अवश्य उसे पढ़कर बोलने के लिए आ सकता हूँ”. तो मै कार्यक्रम में उपस्थित हुआ, तो सामने ही नरेंद्र ने आकर बहुत ही गर्मजोशी से मिलते हुए पुंछा कि” सुरेश अभी कहाँ का दौरा कर के आ रहे हो? “तो मैने कहा कि” गोंवा” तो उन्होंने कहा कि” मान्सून की बारिश देखने के लिए गऐ थे क्या ?” मैनें कहा कि” नहीं रे भाई गोवा में मै सिर्फ सनातन संस्था के मुख्यालय रामनाथी मे उनके आतंकवादी गतिविधियों को लेकर जांच करने के लिए मै गया था. “तो नरेंद्र बोला की “आई कांट बिलिव्ह “मैनें कहा कि” यू शुल्ड.” क्योंकि वापस आने के दौरान मुंबई में तिस्ता सेटलवाड और जावेद आनंद ने मुझे एक दिन अपने घर पर ठहराकर मेरा इस विषय पर इंटरव्ह्यू आडियो- विडियो और कम्यूनॅलिझम काॅमबात के आनेवाले इश्यू मे हिंदू तालिबान के शिर्षक से छपकर आ रहा है. तो नरेंद्र ने कहा कि “अरे यार मेरे खिलाफ सनातन संस्था ने तो काफी कोर्ट केस दर्ज कीए है. “
साथियों हमारी इस बातचीत के तुरंत बाद ही आज के दिन तेरह साल पहले डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की हत्या कर दी गई है. और उसी के बाद के सनातन प्रभात के 14 अगस्त 2013 के अंक में प्रकाशित खबर मे डॉ. नरेंद्र दाभोलकर के नाम के आगे लाल क्राॅस देकर उसके हत्याकी खबर प्रकाशित करने के बाद, सनातन संस्था ने कोर्ट में लिखित रूप में मांग की थी, कि हमने डॉ. नरेंद्र दाभोलकर के खिलाफ जितनी भी केसेस दर्ज की है. वह अब उनकी पत्नी तथा दोनों बच्चों के उपर वर्ग करने का प्रयास किया है. आप सभी को क्या लगता है ? मेरे पचास साल पुराने दोस्त की हत्या को आज तेरह सालों के पश्चात भी कोई ढंग की जांच नहीं होकर. हत्या करने वाले लोगों का मनोबल बढ़ाने की वजह से ही कर्नाटक के लिंगायत तत्वज्ञान के प्रोफेसर एम. एस. कलबुर्गि, बंगलोर की पत्रकार गौरी लंकेश और कोल्हापूर के एडवोकेट गोविंद पानसरे को हमने खोया है. महात्मा गाँधी जी की हत्या के बाद साठ सालो के भितर की यह चारों की हत्याओं से पता चल रहा है कि हिंदुत्ववादी ताकतों का मनोबल गुजरात से लेकर भागलपुर, मेरठ, मलियाना तथा देश के और भी हिस्सौ में अख्लाक, जूनैद जैसे माॅबलिंचिग तक तब्दील हो गई है. नरेंद्र दाभोलकर को सही श्रध्दांजली इन सभी घटनाओं को लेकर चिंतन करते हूऐ, इन हत्यारों की सही पहचान करते हूऐ, उन्हें सजा दिलाने का काम होना चाहिए. डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की स्मृति को क्रांतिकारी अभिवादन. के साथ.
डॉ. सुरेश खैरनार, 20 अगस्त 2026, नागपुर.
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