cmसेना की ज़मीनें अतिक्रमण का शिकार हो रही हैं, लेकिन उन ज़मीनों को अवैध कब्जों से मुक्त कराने की कोई कोशिश नहीं हो रही. थल सेना की मध्य कमान उत्तर प्रदेश के विकास के काम में बाधा डालने और बेमानी राजनीतिक पचड़े खड़ा करने में सक्रिय रहती है, लेकिन ज़रूरी मसलों पर उसका ध्यान नहीं रहता. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर को इस सिलसिले में पत्र लिखा है. ट्रांस गोमती फायरिंग रेंज एवं कुकरैल फायरिंग रेंज की बात कहकर सेना ने कुकरैल बंधे पर सड़क और फ्लाईओवर बनाने के काम पर रोक लगा दी है. जबकि ट्रांस गोमती फायरिंग रेंज एवं कुकरैल फायरिंग रेंज का आज कोई अस्तित्व ही नहीं बचा है. उनके अधिकांश हिस्सों पर लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रक्षा मंत्री को पत्र लिखकर उनसे आग्रह किया है कि सड़क और फ्लाईओवर बनाने की वर्किंग परमिशन शीघ्र दी जाए. मुख्यमंत्री ने इसे जनहित से जुड़ा मसला बताते हुए कहा है कि लखनऊ के कुकरैल बंधे पर निर्माणाधीन छह लेन मार्ग/उपरिगामी सेतु के पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को पूर्ण करने के लिए सेना शीघ्र वर्किंग परमिशन जारी करे. लखनऊ महानगर में कुकरैल बंधे के ऊपर छह लेन चौड़ी सड़क निर्माणाधीन है, जिसकी लंबाई 4.180 किलोमीटर है. सड़क के अतिरिक्त 1,020 मीटर लंबाई में फ्लाईओवर भी निर्माणाधीन है. इस सड़क के 2.55 किलोमीटर लंबाई में निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, बाकी का काम सेना द्वारा आपत्ति किए जाने के कारण रुका पड़ा है.
मुख्यमंत्री ने रक्षा मंत्री को लिखा है कि इस मार्ग के निर्माण से लखनऊ महानगर की कई महत्वपूर्ण कालोनियों मसलन, खुर्रमनगर, विकास नगर, इंदिरा नगर की जनता को रेलवे स्टेशन एवं एयरपोर्ट जाने के लिए सुगम और सीधा मार्ग उपलब्ध हो जाएगा तथा शहर के ट्रैफिक जाम की समस्या से उन्हें मुक्ति मिल सकेगी. इस संबंध में मुख्यमंत्री ने अपने पूर्व के पत्र का हवाला भी दिया है, जिसके माध्यम से उन्होंने रक्षा मंत्री से लखनऊ शहर की यातायात समस्या के निराकरण के लिए सेना से अनापत्ति दिलाने का अनुरोध किया था. मुख्यमंत्री अखिलेश ने रक्षा मंत्री को अवगत कराया है कि सेना द्वारा अवशेष 1.630 किलोमीटर लंबाई में मार्ग निर्माण में यह आपत्ति जताई गई है कि इस भाग में ट्रांस गोमती फायरिंग रेंज एवं कुकरैल फायरिंग रेंज का हिस्सा आता है. इसी प्रकार फ्लाईओवर में भी सेना द्वारा ट्रांस गोमती फायरिंग रेंज का हिस्सा आने की बात कहकर आपत्ति दर्ज की गई है. जबकि इन दोनों ही फायरिंग रेंज के आसपास घनी आबादी है और वर्षों से फायरिंग रेंज ऑपरेशनल नहीं है. लोक निर्माण विभाग द्वारा 12 जून, 2013 को निर्माण कार्य की वर्किंग परमिशन के तीन प्रस्ताव लखनऊ स्थित कमांड हेडक्वॉर्टर को भेजते हुए अनुरोध किया गया था कि भूमि का स्वामित्व अपरिवर्तित रखते हुए केवल निर्माण की अनुमति प्रदान की जाए. पांच अगस्त, 2013 को सेना से एनओसी प्राप्त करने के लिए लोक निर्माण विभाग एवं सेतु निगम के अधिकारियों की एक बैठक दिल्ली में हुई थी. इस बैठक में भी यही अनुरोध दोहराया गया था कि बिना भूमि हस्तांतरण किए निर्माण की ऑपरेशनल अनुमति प्रदान कर दी जाए. लेकिन, सेना ने प्रदेश सरकार के इस औपचारिक आग्रह पर कोई ध्यान ही नहीं दिया.

मुख्यमंत्री ने रक्षा मंत्री को इन सारी स्थितियों से अवगत कराते हुए कहा है कि सड़क या फ्लाईओवर बनाने के लिए अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता भी नहीं है. सिंचाई विभाग द्वारा निर्मित बंधे के ऊपर ही सड़क का निर्माण किया जाएगा. बाकी 330 मीटर लंबाई में फ्लाईओवर का निर्माण बंधे के बगल में नाले की ओर किया जाएगा, जिसमें सेना की अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता नहीं होगी.

इसी क्रम में लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव ने रक्षा मंत्रालय के सचिव एवं अपर सचिव को पत्र लिखकर ऑपरेशनल अनुमति के लिए औपचारिक अनुरोध किया था. प्रदेश के मुख्य सचिव आलोक रंजन भी मध्य कमान के जनरल अफसर कमांडिंग इन चीफ (जीओसी-इन-सी) को पत्र लिखकर निर्माण की वर्किंग परमिशन के लिए अनुरोध कर चुके हैं. मुख्यमंत्री ने रक्षा मंत्री को इन सारी स्थितियों से अवगत कराते हुए कहा है कि सड़क या फ्लाईओवर बनाने के लिए अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता भी नहीं है. सिंचाई विभाग द्वारा निर्मित बंधे के ऊपर ही सड़क का निर्माण किया जाएगा. बाकी 330 मीटर लंबाई में फ्लाईओवर का निर्माण बंधे के बगल में नाले की ओर किया जाएगा, जिसमें सेना की अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता नहीं होगी. लेकिन, सेना ने इस मसले को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना रखा है. विकास के काम में अड़चन डाले बैठी सेना को अपने कमान मुख्यालय क्षेत्र में चल रही आपत्तिजनक गतिविधियां, अवैध कब्जे, कोठियों की
खरीद-बिक्री और कब्जेदारी का ग़ैर-क़ानूनी कारोबार नहीं दिखता. सेना का इंटेलिजेंस (खुफिया) महकमा इतना इंटेलिजेंट है कि उसे सड़क बनती हुई दिखती है, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की कैंट स्थित आलीशान कोठी बिकती हुई नहीं दिखती और रातोंरात ट्रकों के काफिले पर घर का माल लदकर जाता भी नहीं दिखता. सेना क्षेत्र बाहरी अवांछित तत्वों का अड्डा बन गया है. सेना के लोगों ने ही बाहरी तत्वों को बसाने का धंधा चला रखा है. इन लोगों ने मध्य कमान की अचल संपत्ति का कबाड़ा कर दिया है.
मध्य कमान मुख्यालय के पास 13 कैम्पिंग ग्राउंड थे. अब केवल सात कैम्पिंग ग्राउंड रह गए हैं, बाकी छह कैम्पिंग ग्राउंड लापता हो गए. जहां देखें, सेना की ज़मीन पर अवैध कब्जा दिखेगा. केवल लखनऊ ही नहीं, कानपुर, गोरखपुर, मेरठ, वाराणसी, फैजाबाद एवं इलाहाबाद यानी हर तऱफ सेना की ज़मीनों पर नेता, माफिया, दलाल और धनपशु काबिज हैं. सेना की ज़मीन पर बिल्डिंग्स और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स खड़े हैं. सेना के अंदरूनी क्षेत्र में कोठियों की लूट मची हुई है. लखनऊ में सेना के पास ट्रांस गोमती फायरिंग रेंज में 195 एकड़, अमौसी सेना क्षेत्र में 185 एकड़, कुकरैल फायरिंग रेंज में सौ एकड़, बख्शी का तालाब में 40 एकड़ और मोहनलालगंज क्षेत्र में 22 एकड़ ज़मीन है, लेकिन यह आंकड़ा केवल सेना के दस्तावेज़ों तक ही सीमित है. ज़मीनी असलियत भयावह है. इनमें से अधिकांश ज़मीनों पर अवैध कब्जा है. सेना कहती है कि कब्जा है, जबकि यह सेना का भ्रष्टाचार है.
लखनऊ में सुल्तानपुर रोड पर सेना की फायरिंग रेंज के बड़े हिस्से की प्लॉटिंग हो गई और ज़मीनें बिक गईं. आवास विकास परिषद ने गोसाईंगंज थाने में प्रॉपर्टी डीलरों के ़िखला़फ म़ुकदमा भी दर्ज कराया था, लेकिन दुस्साहस यह कि ज़मीन से आवास विकास परिषद के उस बोर्ड को उखाड़ फेंका गया, जिस पर लिखा था कि यह सेना की फायरिंग रेंज की ज़मीन है. ट्रांस गोमती फायरिंग रेंज की 90 एकड़ और अमौसी में पांच एकड़ ज़मीन पर भू-माफियाओं का कब्जा है. कुकरैल में तो सेना की 23 एकड़ ज़मीन पर बाकायदा बड़ी इमारतें और दुकानें बन चुकी हैं. उसी अतिक्रमित ट्रांस गोमती फायरिंग रेंज और कुकरैल फायरिंग रेंज का बहाना बनाकर सेना ने विकास के काम पर रोक लगा रखी है. छावनी से बाहर सेना की क़रीब छह सौ एकड़ ज़मीन प्रदेश सरकार से विवाद में फंसी हुई है. कहीं पर आवास विकास परिषद से लफड़ा है, तो कहीं सीधे सरकार से क़ानूनी भिड़ंत चल रही है. कानपुर में सेना की ज़मीन पर अलग-अलग इलाकों में छह बस्तियां बसी हुई हैं. कानपुर शहर के वार्ड नंबर एक में भज्जीपुरवा, लालकुर्ती, गोलाघाट, पचई का पुरवा जैसी कई बस्तियां बसी हुई हैं. बंगला नंबर 16 और बंगला नंबर 17 की ओर जाने वाले दो इलाकों में अवैध बस्तियां बसी हुई हैं, लेकिन उन्हें हटाने की किसी को फुर्सत नहीं है. कानपुर छावनी क्षेत्र में बना आलीशान स्टेटस क्लब सैन्य संपत्ति की अनियमितताओं का गवाह है. स्टेटस क्लब का स्टेटस भव्य होटल की तरह है. पंच सितारा सुविधाओं वाले दर्जनों कमरों, विशाल वातानुकूलित हॉल और क्लब के मालिक की इससे हो रही अंधाधुंध कमाई किसके बूते पर हो रही है? सैन्य क्षेत्र में यह क्लब कैसे अस्तित्व में आया और इस एवज में किसने क्या-क्या पाया, इसका जवाब कौन देगा?
गोरखपुर में गगहा बाज़ार स्थित सेना के कैम्पिंग ग्राउंड की 33 एकड़ ज़मीन में से क़रीब दस एकड़ ज़मीन पर कब्जा हो चुका है. गोरखपुर के ही सहजनवा, महराजगंज ज़िले के पास रनियापुर और नौतनवां में सेना की ज़मीनों पर अवैध कब्जे हैं. इलाहाबाद शहर में सेना के परेड ग्राउंड की क़रीब 50 एकड़ ज़मीन पर अवैध कब्जे हैं, यहां अवैध बस्तियां आबाद हैं. 32 चैथम लाइंस, 6 चैथम लाइंस और न्यू कैंट में भी सेना की ज़मीन पर अवैध कब्जा है. मेरठ छावनी क्षेत्र तो मॉल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स एवं सिविल कॉलोनी में तब्दील हो चुका है.
हक़ीक़त यह है कि मध्य कमान मुख्यालय सो रहा है. अफसर अराजक होकर अनापेक्षित काम में लगे हैं, घरों में झांक रहे हैं और आपराधिक अभित्रास (क्रिमिनल ट्रेसपास) जैसे कृत्यों में लगे हैं. दूसरी तऱफ, सेना के मध्य कमान की ज़मीनें हड़पी जा रही हैं, ग़ायब हो रही हैं. मध्य कमान मुख्यालय का सैन्य क्षेत्र नेताओं, दलालों और संदेहास्पद किस्म के बाहरी लोगों को दे दिए जाने के बावजूद हर तऱफ चुप्पी सधी है. सैन्य क्षेत्र में मॉल बन चुके हैं और असैनिक इमारतें बन रही हैं. सैन्य क्षेत्र की प्लॉटिंग कर उसे आम लोगों के हाथों बेचा जा रहा है. शहीद स्थल तक को ध्वस्त करके वहां कॉलोनी बना दी गई. बीएन लहरी मार्ग स्थित सेना की ज़मीन पर शहीद स्थल बना था. शहीद सैनिकों की स्मृति में यहां स्तंभ बन चुका था, शिलालेख वगैरह भी लग गए थे. सौंदर्यीकरण का कुछ काम बाक़ी था, लेकिन अचानक काम थम गया. लोग यहां शहीदों को श्रद्धांजलि देने की बाट ही जोहते रह गए. अचानक एक दिन शहीद स्तंभ ध्वस्त कर दिया गया, शिलालेख वग़ैरह ग़ायब कर दिए गए और सेना की इस ज़मीन पर कॉलोनी शक्ल लेने लगी. फिर कुछ दिनों के बाद गेट पर गोमती एनक्लेव का बोर्ड लग गया, फ्लैट्स बन गए और लोगों को एलॉट भी हो गए. यह भारतीय सेना की मध्य कमान का गौरवपूर्ण दृश्य है!

  • सेना ने कुकरैल बंधे पर सड़क और फ्लाईओवर बनाने के काम पर रोक लगा दी है.
  • कहा, इस भाग में ट्रांस गोमती फायरिंग रेंज एवं कुकरैल फायरिंग रेंज का हिस्सा आता है.
  • इन फायरिंग रेंज के आसपास घनी आबादी है और वर्षों से फायरिंग रेंज ऑपरेशनल नहीं है.
  • लोक निर्माण विभाग ने वर्किंग परमिशन के तीन प्रस्ताव लखनऊ कमांड हेडक्वॉर्टर को भेजे.
  • भूमि का स्वामित्व अपरिवर्तित रखते हुए केवल निर्माण की अनुमति मांगी.

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