शिफा अस्पताल संचालकों ने हाफिज को बेरहमी से पीटा

 

भोपाल। राजधानी भोपाल के पुराने इलाके में एक अस्पताल संचालक की गुंडागर्दी ने लोगों को गुस्से से भर दिया है। संचालक ने अपने साथियों के साथ मिलकर पहले बेदर्दी से पिटाई की और बाद में इस पीड़ित व्यक्ति (जो हाफिज है) की दाढ़ी काट दी। मामले को लेकर हनुमानगंज थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। जानकारी के मुताबिक न्यू कबाड़खाना स्थित शिफा अस्पताल में ये घटना दो दिन पुरानी बताई जा रही है। यहां वेन ड्राइवर हाफिज मोहम्मद अतीक के साथ ये मामला हुआ है। अस्पताल संचालकों ने हाफिज अतीक पर मरीजों से अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया। जिसके बाद संचालक मोहसिन खान और उनके दो साथियों मुदस्सिर एवम शहरोज के साथ मिलकर ऑपरेशन थियेटर में बंद कर जमकर पिटाई की। इसके बाद उन्होंने हाफिज अतीक की दाढ़ी भी काट दी। मामले की शिकायत थाना हनुमानगंज में की गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। फिलहाल किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।

हाफिज अतीक की जुबानी पूरा मामला
हाफिज अतीक का कहना है कि वे अस्पताल में भर्ती एक मरीज की खिदमत में लगे हुए थे। वे कोमा में पहुंच चुके इस पेशेंट के बिस्तर, तकिया आदि को दुरुस्त कर रहे थे। इसी दौरान अस्पताल के कर्मचारी ने उनका वीडियो बनाकर प्रबंधन को ये बताया कि वे मरीजों से अभद्र तरीके से पेश आ रहे थे। जिसको लेकर मोहसिन और उसके साथियों ने रात डेढ़ बजे ओटी में बंद कर पीटा और दाढ़ी काट दी।

किस्सा ये भी उछल रहा
सूत्रों का कहना है कि हाफिज अतीक ने अस्पताल संचालक को किसी महिला के साथ आपत्तिजनक हालत में देख लिया था। इसको लेकर उन्होंने एतराज जताया और अस्पताल में इस तरह की गतिविधि को गलत करार दिया। इधर अस्पताल प्रबंधन की तरफ से भी एक आरोप उछल रहा है कि हाफिज अतीक किसी महिला के साथ गलत व्यवहार कर रहे थे, जिसकी सजा के तौर पर उनकी दाढ़ी काटी गई है।

नाराज शहर का सवाल
मामले में हाफिज अतीक दोषी हैं या अस्पताल प्रबंधन, इसका फैसला जांच के बाद होगा। लेकिन किसी मामले को लेकर अस्पताल प्रबंधन द्वारा किसी व्यक्ति को खुद सजा देना गैर कानूनी है। शहर का कहना है कि अगर हाफिज अतीक किसी तरह दोषी थे तो उन्हें नौकरी से निकाले जाने या एफआईआर करने की कार्यवाही की जाना चाहिए थी। किसी व्यक्ति को खुद सजा देने का अधिकार अस्पताल प्रबंधन को किसने दिया।

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वक्फ बोर्ड के अधीन है अस्पताल
शिफा अस्पताल मप्र वक्फ बोर्ड की जायदाद पर बनाया गया है और इसका संचालन सोसायटी द्वारा किया जाता है। तत्कालीन बोर्ड अध्यक्ष मरहूम गुफरान ए आजम ने इसकी नींव रखी थी। पिछली कमेटी को बदलकर करीब दो तीन माह पहले बोर्ड ने इसका संचालन डॉ आसिम की अध्यक्षता वाली कमेटी को सौंपा है। हालांकि डॉ आसिम का नाम इस कमेटी में महज फिलर की तरह इस्तेमाल किया गया है। नई व्यवस्था शुरू होने के बाद से कभी उन्होंने अस्पताल का विजिट तक नहीं किया। यहां की पूरी कमान मोहसिन खान नामक एक बिल्डर ने सम्हाल रखी है। जिन्हें अस्पताल प्रबंधन या संचालन का कोई ज्ञान नहीं है। इस अवधि में शिफा अस्पताल में विशेषज्ञ और अनुभवी स्टॉफ या डॉक्टर्स का इंतजाम भी नहीं हो पाया है। यही वजह है कि पिछले दिनों यहां एक हार्ट पेशेंट का इलाज एक अनुभवहीन डेंटिस्ट से करवा दिया गया था और इसमें मरीज की जान चली गई थी। हाफिज अतीक वाला ताजा मामला सामने आने के बाद अब बोर्ड प्रबंधन कमेटी में बदलाव की कवायद में जुट गया है। सीईओ जमील खान का कहना है वे पूरे मामले की स्टडी कर जल्दी ही इस पर फैसला लेंगे।

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