8बात ज़्यादा पुरानी नहीं है. जब सुप्रीम कोर्ट नेे देश की राजनीति को अपराध मुक्त बनाने के लिए एक अहम फैसला दिया था, तब एक बार तो ऐसा लगा, मानों अब बहुत हुआ, भविष्य में राजनीति से अपराध की छाया मिट नहीं, तो सिमट ज़रूर जाएगी. तमाम दलों के बड़े नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का तहेदिल से स्वागत किया, दो सांसदों लालू यादव और रशीद मसूद की सदस्यता भी चली गई, लेकिन हत्या, लूट, बलवा जैसे तमाम गंभीर आपराधिक मामलों से घिरे कई बाहुबली एक बार फिर लोकसभा चुनाव के समर में दस्तक देने की तैयारी में है. सिद्धांतों की बात करने वाले विभिन्न दल उन्हें अपने पाले में खींचने को बेताब हैं. सबकी नज़र सीटें बढ़ाने की जुगत पर है. वहीं कई बाहुबली ऐसे भी हैं, जो बड़े दलों से मा़ैका न मिलने पर क्षेत्रीय दलों के सहारे संसद में फिर दस्तक देना चाहते हैं.
वाराणसी में बाहुबली मुख्तार अंसारी के चुनाव लड़ने की चर्चा है, तो नेपाल की सीमा से सटे तराई की श्रावस्ती लोकसभा सीट से दो बाहुबली एक-दूसरे के ख़िलाफ़ ताल ठोंकने को तैयार हैं. इलाहाबाद की फूलपुर सीट से संसद का सफर कर चुके बाहुबली अतीक अहमद बसपा राज में भागे-भागे घूम रहे थे, लेकिन जैसे ही सपा राज आया, वह ताल ठोंकने लगे. सपा ने अतीक को अंतत: श्रावस्ती से मैदान में उतार दिया. उधर, बलरामपुर से सांसद रहे रिजवान जहीर को गोंडा से बसपा का टिकट नहीं मिला, तो वह पाला बदल कर पीस पार्टी में चले गए और श्रावस्ती से अतीक के ख़िलाफ़ ताल ठोंकने लगे. सपा और बसपा में रह चुके रिजवान का नया ठिकाना पीस पार्टी है. राम मंदिर आंदोलन से सुर्खियां बटोरने वाले बाहुबली बृजभूषण शरण सिंह आजकल अपने पुराने घर भाजपा में ताल ठोंक रहे हैं. सपा से होते हुए फिर भाजपा में आए बृजभूषण के लिए उनकी पुरानी पार्टी ने न तो दरवाजे खोलने में देरी की और न टिकट देने में संकोच किया. सपा का टिकट ठुकरा कर भाजपा में आए बृजभूषण को राजनाथ का विश्‍वास हासिल है. वह क्षत्रिय लॉबी को मजबूत करने के लिए बृज को भाजपा में लाए थे. बृजभूषण शरण सिंह माफिया होना अपनी शान समझते हैं और यहां तक कह चुके हैं कि मैं माफिया हूं, गांधी कैसे हो सकता हूं? मेरे ख़िलाफ़ चालीस केस दर्ज हैं. वह बलरामपुर संसदीय क्षेत्र से चुनाव मैदान में हैं. हत्या व लूटपाट जैसे तमाम गंभीर आरोपों में जेल यात्रा कर चुके और क्षमायाचना पर जेल से बाहर आए दबंग सपा नेता मित्रसेन यादव फैजाबाद लोकसभा सीट से अपनी ताकत का इजहार कर रहे हैं. वह सपा की साइकिल के सहारे संसद पहुंचना चाहते हैं. मित्रसेन यादव बसपा में भी रह चुके हैं.
कांटे से कांटा निकालने की तर्ज पर बसपा ने मित्रसेन के विरुद्ध कांग्रेस की तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी का घर जलाने के आरोपी एवं पूर्व एमएलसी जितेंद्र सिंह उर्फ बब्लू को उतारा है. बब्लू पर आरोप है कि उन्होंने बसपा राज में अपने साथियों के साथ रीता बहुगुणा जोशी के लखनऊ आवास पर आगजनी और लूटपाट की थी. बब्लू ने मायावती के ख़िलाफ़ रीता के एक बयान से नाराज़ होकर तांडव किया था.पूर्वांचल की सियासत माफियाओं को खूब रास आती है. पूर्व भाजपा विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड सहित तमाम मामलों के आरोपी विधायक मुख्तार अंसारी मऊ से, तो उनके भाई अफजाल अंसारी बलिया से ताल ठोंक रहे हैं. मुख्तार ने भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ वाराणसी से भी ताल ठोंकने का ऐलान कर रखा है. जेल से चुनाव मैदान में उतरने जा रहे मुख्तार ने फिलहाल वाराणसी से अपनी बीवी अफशा अंसारी का नाम घोषित कर रखा है.
बाहुबली डीपी यादव, उनकी पत्नी, बसपा से निकाले गए धनंजय सिंह एवं लखनऊ के अरुण शुक्ला उर्फ अन्ना भी सफेदपोश होने की चाहत रखते हैं. मुख्तार से लेकर डीपी यादव तक कौमी एकता दल वाले गठबंधन के जरिये संसद में अपनी आवाज़ बुलंद करना चाहते हैं. लंबे समय से जेल में बंद मुख्तार कई दलों का दामन थाम चुके हैं. पिछला चुनाव वह वाराणसी से बसपा के टिकट से लड़े थे, लेकिन जीत नहीं पाए. बाद में मुख्तार को बसपा ने बाहर का रास्ता दिखा दिया. कहीं जुगाड़ न हो पाने के कारण मुख्तार ने अपनी राजनीतिक पार्टी खड़ी कर ली. वह कौमी एकता दल के संस्थापक बनकर स्वयं तो चुनाव लड़ते ही हैं, अन्य नेताओं को भी टिकट बांटते हैं. पूर्वांचल के बाहुबली मुन्ना बजरंगी जौनपुर से, तो बृजेश सिंह चंदौली से बतौर निर्दलीय उम्मीदवार भाग्य आजमाने की तैयारी में हैं. बृजेश की पत्नी एवं बसपा एमएलसी अन्नपूर्णा सिंह और भतीजा सुशील सिंह भी संसद की सीढ़िया चढ़ने को बेताब हैं. अन्नपूर्णा बसपा, तो सुशील भाजपा से टिकट की जुगत भिड़ा रहे थे, लेकिन सफल नहीं हो पाए. कहा जा रहा है कि ये तीनों ही लोकसभा चुनाव की जंग चंदौली से जीतने की क्षमता रखते हैं.
बसपा ने सुल्तानपुर से दबंग पवन पांडेय को मैदान में उतार कर भाजपा के वरुण गांधी को चुनौती का रास्ता प्रशस्त किया है. आजमगढ़ का दंगल भी काफी रोचक है. यहां से सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के मैदान में कूदने के बाद हालात काफी बदल गए हैं. यहां के मौजूदा बाहुबली सांसद रमाकांत को मुलायम के कारण दिन में तारे दिखने लगे हैं. दबंग छवि के रमाकांत यादव भाजपा के सांसद हैं. सपा और भाजपा से वह कई बार लोकसभा पहुंच चुके हैं. इस बार फिर वह अपने बाहुबल का एहसास कराने को तैयार हैं, लेकिन मुलायम से मुकाबला आसान नहीं लग रहा है.

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