शायद मेरे इस तरह की प्रतिक्रिया से कई समाजवादी साथियों तथा जार्ज साहब को आदर सम्मान करने वाले साथियों की मै सबसे पहले माफी मांगकर मेरी यह बात शुरू करता हूँ !
साथियों मै आज वर्तमान मे राष्ट्र सेवा दलके अध्यक्ष पद पर हूँ ओर मेरी उम्र के 66 साल पूरे होने के है ! मैं 15 साल पूरे होने के पहले से ही जार्ज साहब को अपने हीरो के रूप में देखना शुरू किया था मेरे तथा जार्ज साहब के बीच में लतिफ खाटीक नामके मेरे पुस्तैनी जिले धुलिया के दोस्त थे जिह्ने जार्जने मुंबई में पनाह दी थी लतिफ खाटीक एक हरफनमौला व्यक्तित्व के धनी थे ऊसने 70 दशक के शुरूआती दौर में महाराष्ट्र में दलित पैंथर के निर्माण में बहुत अहम भूमिका निभाई थी इसलिये वह जार्जके करीबियों में से एक था 6 फिट के आस पास की उसकी उँचाई ओर कद काठी से मजबूत हस्ता हुआ चेहरा बडाही प्यारा दोस्त था जो 20-25 साल पहले से इस दुनिया को छोड़ कर कबका चला गया है !
लेकिन मेरे उम्र के 15-16साल में ही जार्ज साहब को लतिफ खाटीक के कारण बहुत नजदीक से देखने मीलनेका अवसर मिला था उस समय ठाकरे फिनामिना का दूर दूर तक कोई नामों निशा नहीं था ! जार्ज साहब को मजदूर आंदोलन के मसीहा के रूप में देखा जाता था ! 70-72 की बात है मै लतिफ खाटीक ने वडाला स्थित सिद्धार्थ वसतिगृह पर कब्जा बनाया हुआ जगह पर अक्सर ठहरा करता था ! वह जगह अनधिकृत दलित पैंथर का अड्डा बना हुआ था ! और मेरे लिए रात देर रात कभिभि जाओ ठहरने की खास जगह होती हालाकि जानेके बाद लतिफ खाटीक के मेहमान नवाजी के लिए विशेष रूप से प्रेममयी गालियाँ सुनने के बाद ही वह खातिरदारी करता था ! फिर नामदेव ढसाल,रामदास आठवले तथा अन्य पैंथर भी वही अडडा जमाए रहा करते थे ! अगर मै गलत नहीं हूँ तो लतिफ उनमे उम्र तथा कद काठी से मजबूत था !


72-73की बात है नरे पार्क नामके मैंदान में जार्ज साहब की एक सभा थी लतिफ मुझे वहा पर साथमे लेकर गया सभा काफी बडी थी लेकिन इसके बावजूद जार्जने लतिफको देखने के बाद मंच पर से उतर कर आ गये ! इसपर मै समझ गया कि वे लतिफ के काफी करीबी मित्र थे ! लतिफ ने मेरी तरफ इशारा करते हुए मेरा परिचय कराया तो जवाब में जार्ज साहब ने मुझे पुछा कितने बार जेल गये हो ? इस सवाल से मैं बहुत नाराज हुआ क्यायह एक हायर सेकेंडरी स्कूल के विद्यार्थी को क्रांतिकारी हो यही बात मुझे बचकानापन लगा !


लेकिन आपातकाल में जब मुझे जेल की काल कोठरीसे पहले पुलिस हवालातमे दो हप्तेके उपर पुछ-ताछ के लिए बडौदा डायनामाइट के सिलसिले में रखा था और रात को नींद से उठाकर जवाब तलब करते थे उस समय जार्ज साहब को ही याद करता था ! सार्वजनिक जीवन में जेल की काल कोठरी से आप का वास्ता नहीं पडा तो आपकी परिक्षा नहीं होगी यही उनकी सबसे पहले मुलाकात में मुझे वह सवाल का जवाब मिला !


दुसरी मुलाकात 74 के ऐतिहासिक रेल बंद के समय दो जगह पर मीले पहली मुलाकात दादर के वनमाली हाल की 74 के रेल बंद को सफल करने के लिए एक पूर्व तैयारी बैठक थी जिसमें जार्ज साहब की सभी यूनियन के मुख्य नेताओं को विशेष रूप से बुलाया गया था और वह बैठक कमसे कम 6घंटे से भी अधिक समय चली !जिसमें हर एक व्यक्ता अपने ढंग से तबियत से बोला करते जा रहे थे लेकिन जहां तक अध्यक्ष पद पर बैठे हुए जार्ज साहब को मैंने एक बार भी किसी वक्ता को टोका टोकी करते हुए नहीं देखा ! हर वक्ता चाहे उतना बोलता था और जार्ज साहब अपने दोनो हाथोंको टेबलपर फोल्ड करके आपनी गर्दन रखकर बाकायदा सो जाते थे और सभी वक्ता जब तक आपनी बात पूरी तरह से खत्म नहीं किये तबतक ओ अपनी जगह वैसेही बने रहे !
मेरी जिंदगी की यह पहली सभा होगी जिसमें जार्ज साहब को बडे ही सबुरी से हर वक्ता चाहे उतना बोलता था और जार्ज साहब अपने दोनो हाथोंको टेबलपर फोल्ड करके आपनी गर्दन रखकर बाकायदा सो जाते थे और सभी साथियों को मन माफिक बोलने दिया ! बादमे जब अध्यक्ष के भाषण को शुरू किया तो वह भी 4 घंटे से ज्यादा ही बोले मैं तो उनका भाषण इतना ओज से ओतप्रोत था की पुरी सभा चार्ज हो गई थी मुख्य रूप से 1974 के रेल बंद को सफल करने के लिए जरूरी पडा तो तोड फोड भी करना पडा तो तोड फोड चक्का जाम यह शब्द पहली बार सुना ! जार्ज साहब ने बहुत जोर जोर से कहा कि कलका बंद को करने के लिए जरूरी पडा तो मै खुद अपने हाथमे दंडा लेकर रोड़ पर जो भी वाहन चलेगा मै खुद अपने हाथ से डंडा लेकर उसके काँच तोडुनगा पहिये की हवा निकल दूंगा लेकिन हर हाल में बंद सफल करने के लिए सभी साथियों को एकजुट होकर बंद को सफल करना है !
सभा के बाद लतिफ खाटीक के साथ किसी होटल मे चाय के लिए हम लोग बैठे तो मै अपने सेवा दलके आदर्श के अनुसार उन्हें पूछा कि आप सचमुच गाडीया तोड-फोड करेंगे ? उह्मोने तपाकसे जवाब दिया बिलकुल करेंगे ! मेरी याद दास्त ठीक है तो हम जब बात कर रहे थे वे उस समय बिहार से लोक सभा के लिए चुने गए थे तो मैने उनसे पूछा कि आप बिहार में बूथ कैप्चर करते हैं तो उह्मोने तपाकसे जवाब दिया बिलकुल करेंगे बिहार में आगर राजनीति करना है तो हमारे विरोधी अगर यह सब हथकण्डे अपनाएंगे तो हम टिक नहीं पायेगे सुरेश हम लोग राजनीतिक काम कर रहे हैं कोई अध्यात्मिक साधन सुचिता में पडेगा तो वह बिहार की राजनीति कर नहीं सकता यहा पर आपकी आदर्श और सिद्धांत के लिए फिलहाल कोई जगह नहीं है इसलिये राजनीति राजनीतिक ढंग से हीं की जाती हैं !
फिर तीसरी भेंट आपातकाल में माहीम वडाला के रूईया कोलिज के पास किसी के घरमें सुबह-सुबह 4-5 बजे से रात के 10-11 बजेतक लगभग 16-17 घंटे बडौदा डायनामाइट के षडयंत्र पर लगा-तार बहस चली उस बैठक का मै सबसे कम उम्र का सदस्य था ! राष्ट्र सेवा दलके तरफ से होने के बावजूद मैं पैंथर से लेकर तरूण शांती सेना,मागोवा इ, संघटनके साथ भी संबंध रखता था इसीलिए गुरिल्ला युद्ध मुख्य रूप से कयूबा,चिली,वियतनाम चीनी क्रांति के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी थी इसीलिए पुरी बैठक में शामिल लोगों में से एक मै ही था जिसे गुरिल्ला वार के बारे मे कुछ जानकारी थी इसलिये मै भारत जैसे विशाल देश में यह बहुत असरदार नहीं होसकता ! यह बात जोर शोर से कर रहा था क्योंकि भारत की और दूसरी क्रांति योमे जमिन आसमान का फर्क है कहिकिभी नकल करना युद्धशस्त्र के विपरित होगी मै आपात्काल के खिलाफ हूँ पर डायनामाइट की कोशिश करना शुद्ध हाराकिरी होगा यही बात मै पूरी बैठक में कीया था


इंदिरा गाँधी ने अखबार के उपर काफी पाबंदियां लगा रखी थी इस कारणवश यहा की खबर बगल के केंद्र के पास नहीं जा पाती थी अपने कारनामों से कुछ भी हंगामा हुआ ऐसा नहीं है इसलिये यह हमारी हाराकिरी के सिवा और कुछ नहीं हो सकता और मुख्य बात इतिहास बार बार दोहराया नहीं जाता 1942अभी 1976मे नकल करना हर तरह से गलत है एखाद पुलिया या पोस्ट ऑफिस उडाने से कुछ भी नहीं हो सकता है इसलिये हम लोग आपात्काल के खिलाफ कुछ और करेंगे जिससे आपकी बात जनता तक पहुंचाने के लिए विशेष रूप से गंभीर और पुख्ता प्रयास करना चाहिए
भारत बहुत बडा देश है गुरिल्ला युद्ध के मुख्य देश हमारे किसी राज्य से भी छोटे है भारतीय आर्म फोर्स कइ कमाण्ड में विभाजित किया है इसलिये हम किसी एक मेजर या कर्नल के भरोसे कू करने की कोशिश भी बेकार जायेगी हमारी सेना के पहले से ही तीन वायु सेना जल सेना और थल सेना पूरे अलग अलग इकाई में बने रहने के कारण इनके बीच मेंसे एखाद दुसरा ऑफिसर ने अपने को मदद की तॉ भी नतिजनबंगाला देश की नकल भारत में करना गलत है!!इस तरह 15-16घंटे की बात चित करके मै अमरावती वापस तो आया पर पुलिसको कुछ भनक लग गई थी इसीलिए मै जल्द ही पकडा गया पहले दो हप्ता पुलिस कस्टडी में पुछ ताछ के लिए रखा था और बाद में जेल की काल कोठरी में वह भी जेल की जेल में रखा था और आरोप लगाया कि मैंने भारत सरकार को गुप्त रूप से उखाड़ फेंकने के षडयंत्र में शामिल था और जार्ज साहब अपने पादरी के भेष में कलकत्ता अबका कोलकाता!मे पकडे गये थे !
1977 मे जनता पार्टी की सरकार बनने का नजारा नजदीक से देखने मीलनेका अवसर मिला उस समय मैं अपने एक दोस्त के साथ खास दिल्ली हप्ता दस दिन रहकर नई सरकार का निर्माण देखा ! सोशलिस्ट पार्टी के जनता पार्टी में विलय भी विठ्ठल भाई पटेल हाऊस के प्रांगण में शामिल होने का मौका आचार्य केलकर जिके साथ वैसाही प्रगति मैदान पर जनता पार्टी की स्थापना समारोह का भी साक्षी हूँ !
जार्ज साहब नये मंञिमंडल में शामिल नहीं हो रहें थे तो लोग उनका घेराओ करा कर बडी मुश्किल से वे मोरारजी देसाई के मंञिमंडल में औद्योगिक मंञी बने लेकिन 19 महीनों के भीतर जेपी की भाषा में चमन मेरा उजड गया ! चमन के समर्थन में जार्ज साहब ने लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ जबरदस्त भाषण दिया था और जार्ज साहब ने दुसरे दिन सुबह सुबह जिस पार्टी की वकालत की थी उसके खिलाफ दुसरे दिन जाकर सरकार को गिरा दिया ! यह मेरी जार्ज साहब से मोहभंग होनेकी पहली शुरुआत थी !


बिहार की राजनीति में लालू प्रसाद यादव जी का और जार्ज साहब का आपसी मतभेद के कारण उन्होनें समता पार्टी का गठन करके अलग राह पर जो चलना शुरू किया वह उनके राजनीतिक आत्म हत्या की शुरुआत हुई हैं और उत्तर भारत में संघ परिवार तथा उनकेही पेटसे निकली हुई बी जे पी के लिए लानचिग पॅड बनाने का मार्ग उह्मोने प्रशस्त किया ! और बादमे तो एन डी ए के संयोजक बने!जय्म्मा से लेकर ममताजी को मानमनौअल करने के लिए वे ही दौड धूप करते थे ! और तो और गुजरात का नरसंहार तथा ओरिसा के कंधमाल की हिँसा का समर्थन किया था !
उसी दरम्यान मॅडम खैरनार की केन्द्रीय विद्यालय फोर्ट विलियम कलकत्ता से कलकत्ता के ही बालीगंज के विद्यालय में बदली की गई थी उसका मुख्य कारण फोर्ट विलियम विद्यालय की एक बिल्डिंग के निर्माण में कुछ दोष था जीसे मॅडम खैरनार ने बिल्डर से लेने के लिए मना कर दिया बिल्डर डिफेन्स का काफी बडा रसूखदारों में से एक था और उसने अपने रसूख का इस्तेमाल किया और कलकत्ता के ही बालीगंज के विद्यालय में बदली की गई थी उसका विरोध करने हेतु मै दिल्ली के लिए मई में 1997 की बात है इन्द्र कुमार गुजराल की सरकार थी इसलिये मुझे थोड़ा आत्म विश्वास था कि एम एन राय के भक्त एस आर बोम्मइ एच आर डी मिनिस्ट्री देख रहे थे ! शायद कुछ न्याय मीलनेका अवसर है !

उस समय दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षण विभाग के डॉ अनिल सदगोपाल जी मेरे अजीज मित्र थे वे उस समय मुझे बोले अरे भई वर्तमान मंत्रिमंडलमे आपके इतने सारे मित्र है लेकिन आपके ज्यादा करीबियों मे जॉर्ज फर्नांडीजजी का शुमार होता है वे खुद जॉर्ज फर्नांडीज जी के घर पर ले गये ! उसी दिन मुम्बई के महालक्ष्मी रेसकोर्स पर बीजेपी का महाधिवेशन हो रहा था और जार्ज साहब के प्रतिनिधि के बतौर जया जेटली और नीतीश कुमार को भेजा गया था मैं मैडम खैरनार की बदलीकी बात छोडकर सीधा जया जेटली और नीतीश कुमार को आपने मुम्बई के बीजेपी के महाअधिवेशन में क्यो भेजा ? तो वे बोले यह राजनैतिक पार्टी यो में एक दूसरे के अधिवेशन के लिए जाना परंपरा है इसलिये जया को और नितीश कुमार को मैने समता पार्टी के प्रतिनिधि के रूप में भेजा है ! मैने तपाकसे कहा राजनैतिक परंपराएं तो मै आपहिसे सीखा हूँ सोशलिस्ट इन्टरनेशनल में शामिल होने सोशलिस्ट पार्टी के दूनियाँ भरके सोशलिस्ट जाते है वैसे ही कमुनिस्ट इन्टरनेशनल में शामिल होने कमुनिस्ट जाते हैं यह बीजेपी इन्टरनेशनल के पार्ट आपकी समता पार्टी कबसे हो गई ?

जॉर्ज साहब आप सोशल डेमोक्रेट है लेकिन आपमे डेमोक्रेसी का अंश नहीं है इसलिये लालूप्रसाद यादव जो आप सोशलिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर थे उस समय लालूप्रसाद यादव पटना यूनिवर्सिटी यूनियन के अध्यक्ष थे आज समय बदल गया है वर्तमान स्थिति में ड़ॉ राम मनोहर लोहिया के सौवे पावे पिछड़ा 60 वाले सिद्दांत के कारण आज वे बिहार के पिछड़े वर्ग के नेता के रूप में उभरकर सामने आये हैं जो आपके गले नहीं उतर रहे हैं और इसीलिए आप इर्ष्या में समता पार्टी का गठन करने की गलती की है जिससे बीजेपी के लिए मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं ! जीस बीजेपी को इतनी रथ यात्राये नीकाल नेके बावजूद देशके लोगों ने स्वीकारा नही है !जेपीजीने 74 मे संघ फासिस्ट है तो मै भि फासिस्ट हूँ यह गांधीजी की हत्या के आरोप के कारण उन्हें जन समर्थन नही मिल रहा था लेकिन एक गलती जेपी ने करने के बाद आप दुसरी गलती कर रहे हो इसमे आपकी राजनैतिक कब्र खोदने पर तुले हुए हैं जया नीतीश कुमार को मुम्बई भेजना आपका निर्णय संघ परिवार को उत्तर भारत में बढानेमें मददगार साबित हो सकता है इसलिये मै आपका मुरीद हूँ मेहरबानी करके इस तरह की राजनीति मत कीजिये क्योकी हम लोग जेलों में थे तो एस एम जोशी जी जेपिके आदेश पर हम सभी साथियों को जनता पार्टी के गठन पर राय जानने हेतू मीलनेका अवसर मिला उस समय मैने एस्सेम जीको साफ शब्दों में जनसंघ जैसे घोर सामप्रदायीक तथा पूँजीवादी पार्टी के साथ पार्टी बनाने का फैसला आत्मघाती होगा बहुत हूआ तो चुनावी गठजोड़ कर सकते पर एक पार्टी समाजवादी पार्टी के लिए बहुत घाटेका निर्णय होगा तो एस्सेम ने कहा कि मै अभि अभि तिहाड जेल में जार्ज को मिलकर आ रहा हूं और जार्ज का भी यही कहना है ! मैंने एस एम जोशी जी को कहा कि मुझे खुशी है कि मेरेसे डबल उम्र के मेरे मास्टर जॉर्ज फर्नांडीज अगर यही राय रखते है तो मेरी सोच को मान्यता मिल चुकी है इसलिये मुझे बहुत खुशी हो रही है ! यह आपका मत था तो अभी आपको क्या हो गया है ? की आप जाने अनजाने बीजेपी के लिए मार्ग प्रशस्त कर करने जा रहे हैं !


मेरे पास आपके दो ऑडियो क्यासेट है अगले दिल्ली प्रवास के दौरान मै लेकर आउन्गा ताकी आप मुझे कन्फ़र्म कीजिये की वह आवाज आपहीकी है या नहीं है ! जार्ज साहब आपने संघ परिवार की जोरदार आलोचना की है और भारतीय मुसलमानों की नेशन बिल्डिंग में क्या क्या योगदान है यह मै इस मुद्दे को लेकर कुछ काम करने की कोशिश कर रहा हूँ लेकिन आपके इस विषयपर जो धाराप्रवाह भाषण को मैंने कितनी बार सुना है इसका कोई हिसाब नहीं है यह बात 1997 मई के महीने की है !


बादमे 2002 गुजरात कंधमाल ओरिसा के फादर ग्राहम स्टेंस और उनके दो बच्चे जलानेका मामला है और मेरे कीसी समयके हिरो इन सब सवालो पर एन डी ए के कन्विनर की हैसियत से समर्थन करते हुए देखकर लगता है कि यह जॉर्ज फर्नांडीज की राजनीतिक आत्म हत्या है ! बादमे वे बाथरूम में गिरनेके कारण अल्जाइमर रोग के शिकार हो गये वे अपने आपको भी नहीं पहचान पाते थे आखिरी सास 29 जनवरी 2019 को ली ! और उह्णे पीडा से मुक्ति भी मिली मै राष्ट्र सेवा दलके तरफ से विनम्र अभिवादन करता हूँ और जार्ज साहब अब एक किव्दंती के रुपमे हमेशा हमेशा याद कीये जायेंगें !


हालाकी वे एक तरह से संघ परिवार के बौद्धिक प्रमुख जैसी भूमिका निभाने के लिए तैयार हो गये थे ! लेकिन राष्ट्र सेवा दलकी अहमियत समझने वाले लोगों में से भि प्रमुख लोगों मेसे एक थे ! विरोधाभास देखीये राष्ट्र सेवा दलका निर्माण संघ को रोकने के लिए सेवा दलके सस्थापकोने किया है इसलिये मैंने व्यक्तिगत स्तर पर जॉर्ज फर्नांडीज के इस वैचारिक पतन को कभी माफ नहीं किया है इसलिये मै 1997के मई में उनसे अनिल सदगोपाल जी के साथ अन्तिम बार मिला था उसके बाद उनके लम्बे समय तक स्वीय सहायक अनिल हेगड़े दिल्ली मे कभी-कभी मिला करते थे तो उनका हाल बातया करते थे ! लेकिन मुझे उनसे मिलने का कभी-कभी मन तो करता था पर मित्रोसे वे खुद जॉर्ज फर्नांडीज है यह भी मालुम नहीं है तो आपकी हमारी बातही क्या है ?
वैसे हम समाजवादी नियति वगैरा नही मानते हैं पर जॉर्ज जैसे शार्प मेमरी वाले नेताको हजारों-हजार लोगोंके नाम याद रहते थे दस भाषा में आसानी से बातचीत करते थे ! वे जीवन के आखिरी दस साल से भी अधिक समय गर्दिश की जींदगी जिनेके लिए मजबुर हो जाय कही कालने अपना बदला तो नही लिया ?

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