मुंबई: महाराष्ट्र में बीजेपी को रोकने के लिए महागठबंध हर तरह से प्रयास कर रही है। गठबंधन में अब तक कई छोटी पार्टियों को भी शामिल किया जा चूका है। शरद पवार लगातार राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना को भी अंदर लाने के लिए पूरा प्रयास कर रहे हैं। लेकिन कांग्रेस नहीं चाहती की राज ठाकरे की पार्टी की वजह से उनका बचा हुआ भी उत्तर भारतीय वोट बीजेपी के तरफ चला जाए। इस बीच राज ठाकरे ने भी मौके का फायदा उठाने की पूरी कोशिश शुरू कर दी है।

अब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता अजित पवार ने मंगलवार को कहा कि वह भाजपा-शिवसेना के बीच संभावित गठबंधन के खिलाफ लोकसभा चुनावों में मतों का विभाजन रोकने के लिए महाराष्ट्र नव निर्माण सेना (मनसे) के साथ पार्टी के गठजोड़ के पक्षधर हैं।

राकांपा प्रमुख शरद पवार ने पिछले शनिवार को कहा था कि उनकी पार्टी राज ठाकरे नीत मनसे के साथ गठबंधन को लेकर बातचीत नहीं कर रही है। इसी के मद्देनजर अजित पवार की यह टिप्पणी आई है।

पूर्व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने कहा कि भाजपा विरोधी दल उन स्थितियों को दरकिनार कर एक साथ आ सकते हैं जो पहले एक-दूसरे के लिए अस्वीकार्य थी।

उन्होंने एक बयान में कहा कि वह समझते हैं कि अगर हम वास्तव में शिवसेना-भाजपा गठबंधन को हराना चाहते हैं तो हमें उन सभी को एक साथ लाना चाहिए जो धर्मनिरपेक्ष विचारधारा को स्वीकार करते हैं।

 

हाल के दिनों में एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे और एनसीपी प्रमुख शरद पवार की नजदीकियां लगातार बढ़ी है। शरद पवार की कोशिश को देखते हुए राज ने उनके सामने एनसीपी कोटे की तीन सीटें मांग ली हैं। राज ठाकरे की पार्टी की तरफ से बाला नांदगांवकर एनसीपी से बात कर रहे हैं। इस बातचीत में एमएनएस ने शरद पवार की पार्टी एनसीपी से तीन से चार सीटों की मांग कर रही तो एनसीपी एक से दो सीटें एमएनएस को देने पर सकारात्मक तरीके से विचार कर रही है।

MNS के आने से कांग्रेस – एनसीपी को फायदा

राज ठाकरे चाहते हैं कि, एनसीपी उन्हें अपने कोटे की मुंबई की उत्तर पूर्व, ठाणे और नासिक की सीट दे। जबकि एनसीपी ने ज्यादातर सीटों पर अपने उम्मीदवारों की लिस्ट फाइनल कर ली है और उनके नेता प्रचार में भी जुट गए हैं। एनसीपी ठाणे लोकसभा सीट एमएनएस को देने को तैयार है। आधिकारिक तौर पर फिलहाल दोनों पार्टियां इस खबर की कोई पुष्टि नहीं करना चाहते हैं।

शरद पवार का ये गणित है की अगर महागठबंधन में एमएनएस साथ आती है तो शहरी छेत्रों में कांग्रेस-एनसीपी को फायदा हो सकता है। इतना ही नहीं राज ठाकरे की पार्टी शिवसेना बीजेपी के मराठी वोट बैंक में बड़ी सेंधमारी कर सकती है।