यह जुमला 1985 – 86 के शाहबानो तलाक के मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद, कठमुल्ला मुस्लिम समुदाय के तरफसे शुरू किया गया आंदोलन में से निकल कर, उसी के आसपास सोमनाथ से अयोध्या के रथयात्रा तत्कालीन बीजेपी के अध्यक्ष श्री लालकृष्ण आडवाणी ने, और उनके सहयोगियों ने लपक लिया था ! जो आज पैतिस साल से अधिक समय से बदस्तूर जारी है !
पहले अयोध्या तो सिर्फ झांकी है ! काशी मथुरा बाकी है ! जैसे और भी जुमले इस बीच उभर कर सामने आये हैं ! जैसे इस मुल्क में और कोई भी समस्या बची नहीं है ! सिर्फ और सिर्फ मंदिर – मस्जिदों के इर्द-गिर्द संपूर्ण राजनीति को लाकर खड़ा करने का संघ का प्रयास आज परवान पर चढ़ा हुआ नजर आ रहा है !
हालांकि 1974 के पहले यही संघ महात्मा गाँधी जी के हत्या के बाद मुह छुपाते हुए घुम रहा था ! लेकिन सबसे पहले गुजरात के नवनिर्माण आंदोलन 1972-73 (मोरवी के सरदार पटेल इंजीनियरिंग कालेज की मेस के एक रुपया थाली का दाम सव्वा रुपया होने के कारण मोरवी के कालेज के छात्रों के इस आंदोलन ने संपूर्ण गुजरात में महंगाई के खिलाफ उग्र रूप धारण कर लिया था !) जिसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री चिमणभाई पटेल की सरकार को अपदस्थ किया गया था ! और पहली बार बाबुभाई पटेल के नेतृत्व वाली, जनता सरकार का गठन हुआ था ! उसके तीन साल बाद जनता पार्टी का जन्म हुआ है !


उसके पस्चात बिहार में छात्रों का आंदोलन शुरू हुआ ! जिसका नेतृत्व सत्तर साल पार कर चुके, जयप्रकाश नारायण को छात्रो ने आग्रह कर के करने के लिए मजबूर किया था ! और उसके बाद 25 जून 1975 के रात में आपातकाल की घोषणा और जयप्रकाश से लेकर लाखों की संख्या में राजनीतिक नेताओं को गिरफ्तार करने का इतिहास, इस जून में 47 साल पूरे कर रहा है !
लेकिन 1977 की उन्नीस महीनों की जनता पार्टी की सरकार और उसके पतन के बाद चरणसिंग, चंद्रशेखर, वीपी सिंह, देवे गौडा, आई के गुजराल और तेरह दिनों की अटलबिहारी वाजपेयी की सरकार और बाद में छ साल की उनकी ही सरकार और इस संपूर्ण उठापटक के काल में 1977 से 2014, 37 साल में हिंदुत्ववादीयो के तरफसे चलाए जा रहे, सवाल आस्था का है ! कानून का नही ! यह घोषणा के इर्द-गिर्द चलाए जा रहे, द्वेषपूर्ण प्रचार – प्रसार के कारण आज बनारस के ज्ञानव्यापी मस्जिद का विवाद को पहले श्रृंगार देवी के पूजा करने के आड में संपूर्ण मस्जिद का विवाद गत कई दिनों से भी ज्यादा समय से देश के सभी अहम मुद्दों की जगह (महंगाई आसमान को छू रही है !) सिर्फ ज्ञानव्यापी मस्जिद के संबंध में अखबार, टीवी चैनल और सोशल मीडिया में छाया हुआ है !
हालांकि वर्तमान सरकार सबका साथ सबका विकास के नारे, और महंगाई, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी जैसे विषयों पर ही 2013 के चुनाव प्रचार में वर्तमान प्रधानमंत्री जो उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री थे ! एक बार भी पांचसौ के आसपास सभाओं में बोलते हुए दिखाई नहीं दिए थे ! सिर्फ मुझे एक मौका दो ! और मै देश के विदेशी बैंकों में जमा काला धन वापस लाने से लेकर, उस पैसे को देश के हरेक नागरिक के बैंक खातों में पंद्रह लाख रुपये जमा करने का झांसा देने तक ! देश के भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी की समस्या को दूर करने के लिए मुझे एक मौका दो ! इस तरह का प्रचार कर रहे थे !


और अण्णा हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन और जनलोकपाल बिल को लाने के लिए चल रहे आंदोलन के कारण ! भारत के बहुसंख्य उद्योगपतियों ने भारतीय जनता पार्टी के पिछे अपने पैसे जैसे किसी उद्योग में लगाते हैं ! बिल्कुल वैसा ही 2013 के चुनाव प्रचार में दोसौ से अधिक टेलीविजन चैनल खरीदने से लेकर अपने प्रायवेट जेट विमान नरेंद्र मोदी और बीजेपी को मुहैया कराने का काम किया है ! और 2014 के मई माह में सत्ता परिवर्तन हुआ है ! लेकिन चुनाव में दिया गया एक भी वादा पूरा करना तो दूर उल्टा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी ने कहा कि चुनाव प्रचार में बहुत कुछ बोलना पड़ता है ! उसे भूल जाईए !


2019 के दुसरी बार फिर कोरोना के कारण और वर्तमान सरकार की असंवेदनशीलता के कारण, लाखों की संख्या में लोग मारे गए हैं ! हमारे देश की स्वास्थ्य सेवा की असलीयत सामने आई ! और आर्थिक स्तर पर तथाकथित सुधार के नाम पर मुनाफा कमाने वाले सभी सरकारी उद्योगों को प्रायवेट मास्टर्स को सौपने से लेकर, जिस देश की आधी आबादी खेती – किसानी के उपर निर्भर है ! उसे भी प्रायवेट मास्टर्स के हवाले करने की कोशिश का डटकर विरोध किसानों को सालभर से ज्यादा आंदोलन करने के बाद, सरकारने तात्कालिक परिस्थितियों देखते हुए वेट & वॉच का निर्णय लिया है !


और संपूर्ण 2019 का चुनाव हिंदुत्व के मुद्दे पर लडने की भारत के संविधान के खिलाफ ! संपूर्ण चुनाव में बीजेपी के अध्यक्ष से लेकर प्रधानमंत्री और सभी नेताओं तथा कार्यकर्ताओं ने चुनाव प्रचार किया है ! सिर्फ और सिर्फ धार्मिक ध्रुवीकरण के अलावा और कोई भी मुद्दे पर चर्चा करते हुए संघ और उसकी राजनीतिक इकाई बीजेपी ने पूरे चुनाव प्रचार में प्रचार किया है ! लेकिन नहीं हमारे चुनाव आयोग ने कोई कार्रवाई की ! और न ही सर्वोच्च न्यायालय ने ! सभी मुकदर्शक बने रहे ! क्योंकि आपातकाल की आलोचना करने वाले संघ ने इस देश की सभी संविधानिक संस्थानों को खत्म करने में और अधिक से अधिक अपने कारिंदे घुसेडकर उन्हें लचर बनाने के लिए कोई कोर – कसर छोडी नही है ! यह अघोषित आपातकाल ही चल रहा है !
नोटबंदी, कोरोना तथा आर्थिक, औद्योगिक, शैक्षणिक, आरोग्य, कृषी, बेरोजगारी और सामाजिक स्तर पर देश के इतिहास में प्रथम बार खुद सत्ताधारी दल ध्रुवीकरण की राजनीति कर के दोबारा सत्ता में आने का एकमात्र कारण सही मायने में गंगा – जमनी संस्कृति वाले देश को हिंदु – मुसलमानों में बाटने में संघ और उसके राजनीतिक इकाई बीजेपी ने दोबारा सत्ता में वापसी की है ! लेकिन 2022 के 15 अगस्त को भारत की आजादी का पचहत्तरवा साल भी आ रहा है ! और जिस आजादी के आंदोलन में शामिल न होने वाले लोगों के द्वारा भारत की आजादी का पचहत्तर साल का जश्न मनाया जाना भारत की आजादी के आंदोलन के दौरान विकसित सर्वसमावेशी मुल्यो का अपमान है ! गंगा – जमनी संस्कृति को तार – तार करने की कृती में ही मंदिर – मस्जिदों की राजनीति आती है !


और देश महंगाई की मार झेल रहा है और बहस चल रही हैं मस्जिद के जगह मंदिर बनाने की ! और सबसे हैरानी की बात कुछ तथाकथित नंबर एक चैनल कहने वाले चानलो के एंकर, भूल गए हैं कि वह पत्रकारों का धर्म तटस्थता से किसी भी विषय पर आयोजित चर्चा में वह संघ के प्रचारक के जैसे अल्पसंख्यक समुदाय के प्रतिनिधि के साथ जवाब तलब किया करते हैं ! वास्तविक संघ के प्रतिनिधि को भेजने की जरुरत नहीं है ! लेकिन संघ का प्रतिनिधि और एंकर मिलकर पूरी बहस का रुख मंदिर के पक्ष में करने की कृती देखकर लगता है कि अल्पसंख्यक समुदाय के प्रतिनिधियों ने सिधा बहिष्कार करना चाहिए !
तो फिर इतिहास के गडे मुडदो को निकालने का काम शुरू किया है तो ! भारत में आर्यों के आने से लेकर, इसी देश में दो महान धर्म ढाई-तीन हजार साल पहले जन्में बौद्ध और जैन धर्म के पतन और उसके अवशेषों के उपर खड़े भारत के कोने-कोने के हजारों मंदिर संकट के घेरे में आ सकते हैं ! क्योंकि बात आस्था की है तो इस देश में सभी आक्रमको ने स्थानीय लोगों के आस्था के केंद्र नष्ट करने से लेकर उनकी स्त्रियों के साथ अत्याचार यह लगभग सभी युद्ध में होते आ रहा है !

तथाकथित मानवीय सभ्यता (मुझे सभ्यता बोलने का संकोच हो रहा है !) के समस्त विश्व के प्रवास का आकलन करने जायेंगे तो वर्तमान में अमेरिका, कनाडा, अॉस्ट्रेलिया, न्यूझीलंड जैसे तथाकथित विकसित देश पंद्रहवीं शताब्दी के पहले कौन से लोगों को खत्म करने के बाद बने हैं ? अकेले कोलंबस ने शुरुआत में ही दो करोड़ स्थानीय लोगों को मार कर वर्तमान समय की अमेरिका बनाने की शुरुआत की है ! और कम – अधिक प्रमाण में विश्व के बहुत सारे देशों का निर्माण स्थानीय लोगों को खत्म कर के या वर्तमान समय में पहाड़, जंगल में छुपे फिर वह रेड इंडियन हो या भारत के विभिन्न आदिवासी समुदाय हो या समस्त अफ्रीका खंड हो ! विश्व के शायद ही कोई मुल्क होगा जो स्थानीय लोगों को मार कर या भगाकर अपने देश की स्थापना नही किया हो !


और यही आलम समस्त विश्व में शुरू हुआ तो समस्त पृथ्वी पर उल्टा-पुल्टा हो जायेगा ! भारत जैसे विश्व के सबसे पुराने देश में इतिहास के दुरूस्त करने का सिलसिला शुरू किया तो ! फिर उसका कोई अंत नहीं है ! क्योंकि कोई लाख कहे कि ध्रुव प्रदेश पहले वर्तमान समय का भारत ही है ! लेकिन वैज्ञानिक अनुसंधान में आर्य भारत में उत्तर से आए हैं ! और मोहंजोदाडो – हडप्पा के खुदाई के बाद द्रविड़ संस्कृति के विकास के अवशेषों की साक्ष पर्याप्त है ! वही बात वर्तमान आयोध्या कभी साकेत थी और बनारस से लेकर मथुरा – वृंदावन के निचे बौद्ध और जैनियों के पुराने अवशेष दबे-छिपे है ! शायद ही भारत का कोई कोना बाकी होगा जहाँ बौद्ध – जैन जैसे भारत में ही जन्मे धर्मों के विहार, स्तूपो और धार्मिक स्थल नहीं है ! और उसी जगह पर मंदिरों का निर्माण नहीं हुआ है !
वर्तमान नये आंध्र प्रदेश के लिए नई राजधानी का निर्माण कार्य अमरावती नाम की जगह पर जारी है ! और वहा चल रही खुदाई में बौद्ध धर्म और जैनियों के पुराने अवशेष मील रहे हैं !
यही विवाद गत आठ हजार सालों से जेरूसलेम नाम के जगह को लेकर जारी है ! जबकि इस्लाम और ख्रिश्चन धर्म पांच हजार साल बाद निर्माण हुए ! और विवादों का सिलसिला आठ हजार साल पुराना !


और उसी विश्वविद्यालय के 46 साल के प्रोफेसर युवाल नोआ हरारी इतिहास के शिक्षक है ! और अपनी सेपियन्स और होमो डेअस जैसे किताबों के लेखक का जन्म उसी भूमि पर हुआ है ! जहाँ पर भगवान के चुनें हुए लोगों की मान्यता है ! और छियालिस साल का नुआल हरारी उन सब मान्यताओं को नकारते हुए ! हम सभी मनुष्यजीव कैसे एक ही मां की संतान हैं ! तो फिर हिंदु मुस्लिम,यहूदी , ख्रिश्चन, बौद्ध, जैन या जाति, रंग और स्त्री-पुरुष सभी भेद असंबद्ध हो जाते हैं !
डॉ सुरेश खैरनार 24 मई 2022, नागपुर

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